भारतीय हिंदी सिनेमा की एक ऐसी अभिनेत्री जिसकी खूबसूरती मुस्कुराहट सादगी ने हर दिल में घर कर दिया था यह फिल्मी जगत का वो नगीना थी जिसकी चमक से आज भी हिंदी सिनेमा रोशन है इस सदाबहार अभिनेत्री के अभिनय का जादू ऐसा था कि यह 30 साल तक लगातार हिंदी सिनेमा में फिल्म फेयर अवार्ड जीतने वाली अभिनेत्री बनी लेकिन इनके इसी अवार्ड को इनके परिवार में किस लड़की ने छीन लिया तुम ही मेरे मंदिर तुम ही मेरी पूजा कैसे यह अभिनेत्री 50 के दशक में मिस इंडिया बन गई और गुजरे दौर में जिस वक्त बहू बेटियां पर्दे के अंदर डरी सहमी छुपी रहती थी।
उस वक्त यह अभिनेत्री स्विम सूट में सबके सामने आ गई ब्लैक एंड वाइट के दौर में भी अपने अभिनय से फिल्मी पर्दे पर रंग भरने वाली इस मशहूर और खूबसूरत अभिनेत्री की जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था कि इनको खुद की फिल्म देखने नहीं दिया गया और इनको फिल्म के प्रीमियर में गेट से ही बाहर कर दिया गया जिस पथ पे चला उस पथ पे मुझे जिस एक शानदार फिल्मी सफर और कामयाब शादीशुदा जिंदगी होने के बावजूद यह अभिनेत्री अपनी जिंदगी में कई तकलीफ और दुख दर्द समेटे हुए थी।
अपनी सगी मां के साथ इनके साथ ऐसा क्या हुआ था कि मां बेटी कोर्ट में एक दूसरे के खिलाफ लड़ती रही तो वहीं सगी बहन के साथ बढ़ते झगड़े ने 54 साल की उम्र में इनको वह दिन दिखाए कि यह अभिनेत्री इस दुनिया को छोड़ना चाहती थी अपने आप को धोखा देकर झूठ दिखावा इन सब के सहारे जीने से कहीं अच्छा है इतना नाम इतनी शोहरत होने के बाद भी इस अभिनेत्री की वह कौन सी ख्वाहिश थी जिसको यह अपने अंतिम दिनों में पूरा कर पाई थी और इनके साथ ऐसा क्या हुआ था कि इन्होंने एक दूसरे मशहूर सज्जन अभिनेता को जोरदार तमाचा जड़ दिया था।
इस अभिनेत्री की अदाकारी ऐसी कि भारत सरकार ने इनके नाम पर भारतीय डाक टिकट जारी किया तो वहीं फोब्स ने इनको 25 सबसे सफल अभिनय परफॉर्मेंस की लिस्ट में जगह दी और क्या है राज इनके मरने के बाद इनकी भटकती का एक ऐसी अभिनेत्री के बारे में बात करने जा रहे हैं जो किसी परिचय की मोहताज नहीं है भारतीय हिंदी सिनेमा की सबसे सौम्य अभिनेत्रियों में इनका नाम गिना जाता है 14 साल की उम्र में बॉलीवुड में डेब्यू तो वहीं 16 साल की उम्र में मिस इंडिया का खिताब इतनी कम उम्र में दोनों उपलब्धियां हासिल करना हर किसी के लिए बस एक सपने जैसा है जब लड़कियों को लेकर लोगों की सोच अलग होती थी।
तब इस अदाकारा ने बोल्डनेस का वो तड़का लगाया कि जिसके लिए इनको आज तक याद किया जाता है यह अभिनेत्री कोई और नहीं बल्कि पद्मश्री विजयता फिल्म फेयर की क्वीन के ताज से सजी नूतन जी की हम बात कर रहे हैं चंदन सा बदन चंचल चितवन धीरे से हम आपको नूतन जी की जिंदगी और उनके सुख दुख के बारे में बताएं उससे पहले आइए नजर डाल लेते हैं इनके परिवार पढ़ाई लिखाई और इनके शुरुआती फिल्मी सफर के बारे में वो चांद खिला वो तार हसे ये रात अजब मतवारी श नूतन का जन्म 4 जून 1936 को मुंबई में एक पढ़े-लिखे संपन्न फिल्मी परिवार में हुआ इनके पिता श्री कुमार सेन समर्थ थे जो हिंदी सिनेमा में फिल्म निर्देशक और कवि हुआ करते करते थे तो वहीं इनकी मां का नाम था शोभना समर्थ शोभना भी 40 के दशक में हिंदी सिनेमा की एक मशहूर उम्दा अभिनेत्री रही हैं तेरे संग संग संग पिया खेल के मैं रंग हाय हाय हाय हुई बदना तो वही नूतन की नानी रतनबाई भी अभिनेत्री और भजन गायिका रही थी नूतन की दो छोटी बहने थी तनुजा और चतुरा तो वहीं इनका भाई जयदेव भी है नूतन बचपन में सांवली लंबी और पतली दुबली लड़की थी ।
इसीलिए उनके आसपास के लोग उनको खूबसूरत नहीं मानते थे जिसकी वजह से नूतन अक्सर बचपन में भद्दे भद्दे तानों को सुनती थी नूतन जब मात्र 9 साल की थी तो पहली बार इन्होंने एक फिल्म में बाल कलाकार के रूप में काम किया था फिल्म का नाम था नल दमयंती जिसको खुद इनके पिता ही बना रहे थे नूतन के घर में सभी लोग फिल्मी दुनिया से जुड़े रहे हैं तो लिहाजा इनके उज्जवल भविष्य की जिम्मेदारी इनकी मां शोभना के ऊपर आ गई थी।
नूतन तो एक गायिका बनना चाहती थी इसीलिए वह अक्सर स्टेज पर सिंगिंग करती रहती थी लेकिन इनकी मां इनको एक सफल अभिनेत्री बनाना चाहती थी इसीलिए इनकी मां ने साल 1950 में खुद की निर्देशित फिल्म हमारी बेटी से 14 साल की नूतन को दुनिया से रूबरू कराया हालांकि यह फिल्म चल तो नहीं पाई लेकिन लेकिन नूतन ने इस फिल्म से सबका ध्यान अपनी तरफ जरूर खींचा छोटी सी गुड़िया की लंबी कहानी सुनो छोटी सी इसके बाद नूतन बैक टू बैक तीन फिल्में शबाब हम लोग नगीना में काम किया लेकिन यह तीनों फिल्में भी फ्लॉप हो गई थी आपको बता दें कि नूतन की फिल्म नगीना का जब प्रीमियर हुआ तो नूतन भी इसको देखने वहां पहुंची थी नगीना फिल्म को उस दौर में एडल्ट फिल्म का दर्जा मिला था लिहाजा जब नूतन गेट के अंदर जाने लगी तो वहां खड़े चौकीदार ने नूतन को रोक दिया यह कहकर कि यह फिल्म 18 साल के लोगों के लिए है लेकिन नूतन चौकीदार से कहने लगी कि वह भी इस फिल्म की हीरोइन है।
चौकीदार ने उनकी इस बात पर यकीन नहीं किया और इनका हाथ पकड़कर उस हॉल से बाहर कर दिया मैं खुद गई थी अकेली और इस प्रकार नूतन खुद की फिल्म के प्रीमियर से बाहर हो गई मुझे इसकी कोई परवाह नहीं शुरुआती फिल्म के फ्लॉप होने के बाद इनकी मां ने इनको भारत देश के बाहर स्विटजरलैंड में फिनिशिंग स्कूल चैटन में पढ़ाई के लिए भेज दिया यहां रहकर नूतन ने पढ़ाई की और अपने लुक्स पर काम किया और ठीक एक साल के बाद वह फिर से भारत वापस लौट कर आई और आते ही अपनी मां की मदद से इनको एक फिल्म सीमा के लिए साइन कर लिया गया इस फिल्म में इनके साथ फिल्म एक्टर बलराज साहनी थे साल 1955 में यह फिल्म रिलीज हुई और यह फिल्म उस दौर की सुपर डुपर हिट फिल्म साबित हुई तू प्यार का सागर है तेरी एक इस फिल्म से नूतन को दिल खोलकर तारीफ मिली और अब वही लोग वही रिश्तेदार वही दोस्त जो नूतन को खूबसूरत नहीं मानते थे वह अब नूतन को अपनी पलकों पर बैठा रहे थे सीमा फिल्म के लिए नूतन को पहली बार फिल्म फेयर का बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड भी मिला इसके बाद तो की जिंदगी दौड़ पड़ी और इन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा वो चांद खिला वो तार हसे ये रात अजब मतवारी और हीर बारिश लाइट हाउस बसंत छबीली कभी अंधेरा कभी उजाला अनाड़ी जैसी कई फिल्मों में काम किया और अपने दम से हिंदी सिनेमा का मान बढ़ाया दिल की नजर से नजरों की दिल से ये बा क्या है नूतन एक जबरदस्त अभिनेत्री तो थी ही साथ में यह संगीत में भी अपनी रुचि रखती थी ।
इसलिए नूतन ने अपनी खुद की कुछ फिल्म जैसे हमारी बेटी छबीली पंग गेस्ट में खुद की आवाज में गाने भी गाए हैं आप अभी इश्क की तहजीब से नूतन जिस दौर में फिल्मों में काम कर रही थी उस समय बहू बेटियों को पर्दे में रहना पड़ता था उनको अपने अंग प्रदर्शन की इजाजत कतई नहीं थी तो ऐसे में नूतन ने साल 1958 में दिल्ली का ठक फिल्म में पहली बार स्विम सूट पहन डाला बेहद बोल्ड अंदाज में दिखी नूतन सबको हैरान कर रही थी वह ऐसा करने वाली भारत की पहली अभिनेत्री थी जहां एक तरफ इनके इस बोल्ड कदम की तारीफ हो रही थी तो समाज के कुछ लोग नूतन का विरोध और आलोचना भी कर रहे थे इसकी कोई परवाह नहीं स्विम सूट का रोश अभी शांत भी नहीं हुआ था कि नूतन फिल्म बारिश में एक बार फिर से बोल्ड सीन देकर पहले से लगी आग को उन्होंने और भड़का दिया जिसके बाद नूतन काफी चर्चाओं में रहने लगी थी।
जे इसके बाद नूतन की गिनती टॉप एक्ट्रेसेस में होने लगी मधुबाला मीना कुमारी माला सिन्हा नर्गिस वै जंती माला वहीदा रहमान यह सभी अभिनेत्री भी उस समय नूतन से पीछे हो गई थी ए मेडी मैड मैड माने पागल ओ वाय बॉय बॉय माने लड़का अरे मतलब इसका तुमका नूतन ने सोने की चिड़िया और सुजाता फिल्म में बेहद शालीनता वाला किरदार निभाकर अपनी बोल्डनेस वाली छवि को तोड़कर सभी के दिलों में जगह बनाई नूतन कामयाबी के शिखर पर थी और नूतन ने धर्मेंद्र बलरा सहनी राजेंद्र कुमार शमी कपूर राज कपूर देवानंद सुनील ल दत्त मनोज कुमार और अमिताभ बच्चन जैसे बड़े सभी सुपरस्टार्स के साथ काम किया माना जनाब ने पुकारा नहीं क्या मेरा साथ भी हम आपको यहां पर यह बता दें कि शमी कपूर और नूतन बचपन से ही अच्छे दोस्त थे शमी कपूर और नूतन की बचपन की दोस्ती प्यार में बदल गई और यह दोनों शादी करना चाहते थे लेकिन नूतन की मां को यह रिश्ता पसंद नहीं था।
इसीलिए यह कहानी अधूरी रह गई मैं जिसे चाहती हूं शायद आप उसे पसंद ना करें तो वहीं दूसरे सुपरस्टार राजेंद्र कुमार भी नूतन के प्यार में पागल थे व भी नूतन से शादी करना चाहते थे तो तुम एक एक्ट्रेस से शादी करोगे बाबू जी वो एक अच्छी और शरीफ लड़की है और इसी उम्मीद में वह नूतन की मां से उनका हाथ मांगने पहुंच गए लेकिन नूतन की मां ने उनका हाथ तो नहीं दिया बल्कि राजेंद्र कुमार को काफी भला बुरा बोलकर जलील किया और घर से निकाल दिया मैं कहती हूं मेहरबानी करके आप यहां से चले जाइए नूतन की मां को फिल्म एक्टरों का यूं नूतन की तरफ आकर्षित होना नहीं भाया और साल 1959 में इनकी शादी भारतीय नौसेना के लेफ्टिनेंट कमांडर रजनीश बहल से कर दी गई शादी के कुछ दिन पहले ही नूतन की फिल्म सुजाता रिलीज हुई थी।
जो एक जबरदस्त हिट फिल्म थी और इस फिल्म के लिए नूतन को अपना दूसरा बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्म फेयर अवार्ड भी मिला था शादी के बाद नूतन फिल्मों में काम नहीं करना चाहती थी साल 1960 में फिल्म निर्माता विमल रॉय नूतन के पास एक फिल्म बंदनी का ऑफर लेकर गए लेकिन नूतन ने इस फिल्म को करने से मना कर दिया क्योंकि वह गर्भवती थी और फिल्मों से दूर रहना चाहती थी लेकिन पति के कहने पर नूतन ने हां कर दी फिर साल 1961 में नूतन ने एक बेटे को यानी मोहनीश बहल को जन्म दिया और साल 1963 में इनकी फिल्म बंदिनी रिलीज हुई यह फिल्म सुपर डुपर बंपर हिट हुई बॉलीवुड की ऑल टाइम क्लासिक बुक में इस फिल्म को शुमार किया गया फोब्स बीबीसी आउटलुक जैसी सभी मीडिया नेटवर्क नूतन की इस एक्टिंग को वर्ल्ड की बेस्ट एक्टिंग परफॉर्मेंस मानते हैं गजब की अदाकारी के बलबूते पर नूतन को अपनी जिंदगी का तीसरा बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्म फेयर अवार्ड मिला ये क्या बात है आज की चांदनी में कि हम खो गए इसके बाद नूतन ने 60 के दशक में छलिया तेरे घर के सामने खानदान दिल ने फिर याद किया।
रिश्ते नाते सरस्वती चंद्र जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया साल 1968 में इनकी फिल्म मिलन के लिए इनको चौथा बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्म फेयर अवार्ड मिला कितना शुभ दिन है आज हां बसंती कितना शुभ दिन है इसके बाद साल 1970 में एक ऐसी घटना घट गई जिसको नहीं होना था हुआ यूं कि संजीव कुमार और नूतन एक फिल्म देवी एक साथ कर रहे थे यह वही समय था जब नूतन और संजीव कुमार के अफेयर के चर्चे थे नूतन को कहीं से पता चला कि यह अफवा खुद संजीव कुमार ही मीडिया के सामने फैला रहे हैं यह बात उन दोनों ने मुझसे अभी तक छुपा कर रखी लिहाजा इस बात को लेकर नूतन ने संजीव कुमार से बात की और सच जानने की कोशिश की लेकिन संजीव कुमार ने बात गंभीरता से नहीं ली और गुस्से में आग बबूला नूतन ने सबके सामने संजीव को जोरदार तमाचा रसीद कर दिया जिसका अफसोस कभी नूतन को नहीं है इस घटना के बाद इन दोनों के बीच कोई कभी बातचीत नहीं हुई समझ लो आज से मैं तुम्हारे लिए मर चुका हूं 70 के दशक में नूतन अपने उसी दमखम के साथ काम कर रही थी और यादगार अनुराग सौदागर सजन बिन सुहागन जैसी कई फिल्में हिंदी सिनेमा को उन्होंने दी।
इसके बाद साल 1978 में नूतन ने एक फिल्म की मैं तुलसी तेरे आंगन की मैं तुलसी तेरे आंगन की और इस फिल्म में शानदार अभिनय के लिए नूतन को उनका पांचवां बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्म फेयर अवार्ड मिला तू इस घर से जाएगी जरूर लेकिन इस घर को बरबाद करने के बाद नूतन अब वो पहली एक्ट्रेस बन गई थी जिनके नाम लगातार पांच फिल्म फेयर अवार्ड हो गए थे साथ ही 40 की उम्र पार करने के बाद भी नूतन को लीड रोल की फिल्मों के ऑफर आ रहे थे समय गुजरा और साल 1980 में नूतन ने अपने किरदार में बदलाव किया और मेन एक्ट्रेस के रोल छोड़कर सपोर्टिंग एक्ट्रेस के रोल निभाने लगी और मेरी जंग नाम कर्मा जैसी फिल्में हम सभी को दी जिनको आज तक नहीं भुलाया जा सका है दिया है जो भी देंगे वतन नूतन जब फिल्म जगत में आई थी तो उनकी ख्वाहिश थी कि वह दिलीप कुमार के साथ काम करें उनकी हीरोइन बने लेकिन उनका जवानी का यह सपना कर्मा फिल्म में जाकर पूरा हुआ जिसमें इन्होंने दिलीप कुमार की पत्नी का रोल अदा किया।
हर कम अपना करेंगे ऐ सनम ते इसके बाद नूतन को फिल्म मेरी जंग के लिए उनका छठा बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का फिल्म फेयर अवार्ड भी मिला जी जा हम तू अगर संग है यह था नूतन का पूरा फिल्मी सफर आइए अब आपको बताते हैं इनके निजी जीवन का पूरा सच जिसे आप जानकर हैरान हो जाएंगे नूतन की जिंदगी की सच्चाई हकीकत में वैसी नहीं थी जैसी कि फिल्मी पर्दे पर दिखती थी या फिर बायोग्राफीज में बताया गया है दरअसल नूतन का अपनी मां शोभना समर्थ के साथ इनका रिश्ता ठीक नहीं था शोभना ने अपने स्वार्थ के लिए अपनी बड़ी बेटी को जबरदस्ती फिल्मों में उतारा था वह उनका सिर्फ इस्तेमाल कर रही थी।
जब फिल्म उनकी शुरुआत में फ्लॉप हुई तो उनको उनकी मां ने नूतन के उज्जवल भविष्य के लिए इंडिया से बाहर नहीं भेजा था बल्कि उनको लगता था कि बाहर नूतन की ग्रूमिंग कराकर उनको वापस इंडिया बुला लिया जाएगा और हुआ भी ऐसा ही कुछ नूतन को वापस बुलाकर तुरंत इनकी मां ने इनको फिल्मों में फिर से लगा दिया था।
नूतन की मां काफी तेज थी जब शम्मी कपूर और राजेंद्र कुमार के घर शादी का रिश्ता लेकर गए थे तो उनकी मां यह सोचकर ही रिश्तों के लिए मना कर दिया करती थी कि अगर नूतन की शादी हो जाएगी तो उनके हाथ से पैसे कमाने की मशीन चली जाएगी इसलिए तो नूतन की मां इनकी अरेंज मैरिज करवाना चाहती थी और कराई भी थी अपनी पसंद का लड़का उन्होंने देखा यह सोचकर कि उनको यह अपने काबू में रखेंगी लेकिन इनकी यह सारी चाल उल्टी पड़ गई क्योंकि इनके इसी पति ने नूतन की मां का स्वार्थ और लालच की भावना को पहचान लिया और उनको सचेत कर दिया जिसका नतीजा यह हुआ कि कुछ समय बाद नूतन और उनकी मां के बीच फंड्स और इनकम टैक्स की बचत को लेकर झगड़ा हो गया बोलो मां मैं क्या करूं क्या मुंह लेकर इस दुनिया के सामने जाऊं जिसके बाद नूतन ने अपनी मां शोभना पर यह आरोप लगाया कि उन्होंने उनके साथ पैसों की धोखा धड़ी की है इसके बाद आलम यह हो गया कि मां और बेटी दोनों एक दूसरे के लिए दुश्मन बन गए।
लेकिन यह तो ना होता जब हुआ है एक मिनट पहले आप मेरी नजर में क्या थे और अब आज मुझे हर चीज से नफरत हो रही है अपने आप से नफरत हो रही है और नूतन ने अपनी मां के खिलाफ ही पुलिस में केस कर दिया और यह केस कोर्ट में चला गया मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नूतन ने 20 साल अपनी मां से बात नहीं की और ना ही कभी उनका मुंह देखने की कोशिश की दुश्मनी इस कदर थी कि एक बार नूतन काम से चेन्नई के लिए जा रही थी जैसे ही वह जाने के लिए प्लेन में घुसी तो वहां अपनी मां को देखकर गुस्सा हो गई और उस प्लेन से उतर गई और दूसरे प्लेन से टिकट लेकर गई साल 1983 और 84 में जाकर इस केस का फैसला आया और नूतन की मां शोभना को नूतन के पैसे वापस करने पड़े मुझे नहीं मालूम था दौलत आदमी को ऐसा बुजदिल बना देती है नूतन की शादीशुदा जिंदगी वह तमाम मुश्किलों भरी थी जो वह कभी नहीं चाहती थी लेकिन नूतन अपनी दुख तकलीफ को किसी को भी नहीं बताती थी नूतन के पति रजनीश बहल भी काफी परेशान करते थे रजनीश भी नूतन के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते थे वह नूतन की आए दिन उनकी सहेलियों और करीबियों के सामने बेइज्जती कर देते थे जिसकी वजह से नूतन से लोगों ने रिश्ता तोड़ लिया था जिसका नूतन को बहुत दुख था इनके पति नूतन को हमेशा अपने कंट्रोल में रखना चाहते थे ।
बताया जाता है कि नूतन ने अपने पति के कहने पर ही संजीव कुमार को थप्पड़ जड़ा था वह ऐसा करना नहीं चाहती थी लेकिन पति के दबाव में आकर ऐसा उन्होंने कर डाला और उनके कहने पर ही संजीव कुमार से हमेशा के लिए दूरी बना ली थी क्या तेरे पास सन्या का कोई जवाब नहीं इतना सब कुछ सहते सहते नूतन जिंदगी से निराश हो गई थी वह एक बनावटी जिंदगी जी रही थी दुनिया के सामने हंसती थी और घर में उतनी ही दुख तकलीफ के साथ रहती थी उनके मन में जिंदगी को खत्म करने के विचार आने लगे वह अकेले में बस मरने के बारे में सोचने लगती और ऐसे में कुछ समय बाद ही साल 1990 में नूतन के सीने में दर्द हुआ डॉक्टर ने चेकअप किया तो पता चला कि नूतन को ब्रेस्ट कैंसर है कैंसर की बात सुनकर जहां लोग दुखी हो जाते हैं तो वही नूतन अपनी इस बीमारी को सुनकर खुश हो गई और अपनी सहेली से बोली कि अब मैं जिंदगी से मुक्त हो जाऊंगी।
अब आप खुद ही इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि नूतन अपनी जिंदगी से किस कदर परेशान थी साल 1989 में रिलीज हुए फिल्म कानून अपना अपना इनकी जिंदगी की आखिरी फिल्म बन गई क्योंकि 21 फरवरी 1991 को नूतन का कैंसर के चलते निधन हो गया और एक हिंदी सिनेमा का चमकता सितारा इस दुनिया से हमेशा के लिए बुझ गया मुझे आज्ञा दे कि मैं तेरी गोद में आकर सो जाऊ मैं तो तेरी वो संतान हूं जिसका मन तप रहा है शरीर चुलस रहा है।
नूतन की मौत से उनकी मां शोभना को जरा सा भी दुख नहीं हुआ था जिंदगी भर कमाने वाली नूतन दुख तकलीफ में दुनिया से चली गई उनके अंदर जीने की ख्वाहिश ही खत्म हो गई थी और समय से पहले ही वह इस दुनिया से रुखसत हो गई इसके बाद साल 2000 में नूतन की मां भी इस दुनिया से चली गई लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनकी मां की मौत काफी मिस्टीरियस रही थी।
क्या हुआ कैसे हुआ कुछ पता ही नहीं था लेकिन इनकी मां की मौत अविश्वसनीय उसको माना गया इसके बाद कुछ ऐसा ही दोबारा हुआ साल 2004 में जब इनके पति रजनीश की मौत हो गई बताया जाता है कि रजनीश के अपार्टमेंट में आग लग गई और वह उसमें फंस गए फायर ब्रिगेड के अधिकारी ने बताया कि हालत इतनी बदतर नहीं थी जहां सभी आम लोग वहां से भागकर बच गए लेकिन आमी ऑफिसर जिनको इन सब दुर्घटनाओं से निकलने की ट्रेनिंग दी जाती है बस वही नहीं भाग पाए लेकिन इस घटना के चश्मदीद ने एक बड़ा ही हैरत अंगेज बयान दिया जब वह नीचे उतर कर भाग रहा था तो उसने देखा कि रजनी बस बाहर निकलने को ही थे लेकिन उनको ना जाने कहां से एक धक्का लगा और वह अंदर की तरफ गिर गए मानो जैसे किसी ने पीछे से पकड़कर उन्हें खींच लिया हो अंदर गिरते ही अचानक से खिड़की बंद हो गई और रजनीश की इस हादसे में जलकर मौत हो गई चश्मदीद के इस बयान के बाद तो नूतन के करीबी और आसपास के लोग यही मानने लगे कि उनकी मां शोभना और पति रजनीश की मौत अपने आप नहीं हुई है बल्कि उनको नूतन की आत्मा ने मारा है और ना मैं उस घर में जाना चाहती हूं मेरे लिए वोह घर उजड़ चुका है नूतन की आत्मा इन दोनों से बदला लेना चाहती थी और इन दोनों की मौत से उनका यह बदला पूरा हुआ नूतन की सहेली और लेखक ललिता बताती हैं कि इस की बात से इनको एक बात याद आई कि जो नूतन की मां शोभना ने उनको बताई थी कि बचपन में एक ज्योतिषी ने नूतन को देखकर उनकी मां से कहा था कि यह कोई महान पवित्र पत्र आत्मा है जो इस धरती पर दोबारा नहीं आना चाहती थी मगर कुछ था जो अधूरा रह गया था उसी को यह पूरा करने आई है लेकिन यह बहुत दुखी भी है इसीलिए शाम को 5 से लेकर सुबह 5 तक रोती रहती है और एक बात का ख्याल और रखना कि इस बार यह आत्मा कुछ भी अधूरा नहीं छोड़कर जाएगी यह सब कुछ पूरा करके जाएगी जब तक दुनिया को सच्चाई मालूम ना हो जाए मैं नहीं मरूंगी नूतन की बहन तनुजा जो अपनी मां के साथ रहती थी उन्होंने भी अपनी मां का ही साथ दिया था ।
जिस वजह से नूतन की अपनी बहन के साथ भी रिश्ते काफी खराब हो गए थे ये दुनिया गम का मेला है नूतन हिंदी सिनेमा की वोह अभिनेत्री थी जो छह बार फिल्म फेयर अवार्ड से नवाजी गई नूतन के इसी अवार्ड को उनकी बहन की बेटी काजोल ने उनसे छीन लिया क्योंकि उनके बाद सबसे ज्यादा फिल्म फेयर अवार्ड काजोल के ही नाम है तो वहीं साल 1974 में पद्मश्री अवार्ड से भी सम्मानित की गई नूतन ने कम उम्र में ही मिस इंडिया का खिताब भी जीता था व मिस मसूरी भी बनी थी नूतन के अंदर हुनर कूट-कूट कर भरा था वह टॉप अभिनेत्री थी उनके पास वह सब कुछ था जिसको सभी लोग पाने की ख्वाहिश रखते हैं इतना सब कुछ होने के बाद भी नूतन अपनी जिंदगी में रिश्तों के बीच पिसकर रह गई थी तेरा [संगीत] जाना जहां सगी मां ने पैसों के लिए बेटी को मरने के लिए छोड़ दिया सगी बहन बड़ी बहन के खिलाफ हो गई पति ने भी कभी इज्जत नहीं की हमेशा जिल्लत भरी जिंदगी दी और इसी वजह से नूतन हमेशा अपने लिए मौत मांगती थी।
जिंदगी से दूर भागती थी और एक दिन वो हम सबको अपनी यादों के बीच अकेला छोड़कर चली गई मेरे पास इस अन्याय का कोई जवाब नहीं कोई जवाब नहीं नूतन को हमेशा उनके शानदार काम के लिए याद किया जाएगा जब तक हिंदी सिनेमा का वजूद जिंदा है तब तक नूतन भी हमारे बीच जिंदा रहेंगी नूतन अपने पीछे अपने बेटे मोहनीश पहल को छोड़ गई हैं।
मोहनीश बहल भी हिंदी सिनेमा के एक मंझे हुए एक्टर हैं वो भी अपनी मां की तरह फिल्मों में हर तरह के किरदार निभाकर लोगों के बीच बने हुए हैं तो दोस्तों आपको क्या लगता है कि क्या नूतन ने ही अपनी मां और पति को मारा है आप उनकी वाली बात पर कितना यकीन करते हैं
