यमन की जेल में सजा काट रही भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की फांसी पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। 38 साल की निमिषा को 2017 में यमन के एक नागरिक तलाल अब्दुल्ला की जान लेने के मामले में ज्वानलेवा की सजा सुनाई गई थी। उनकी आखिरी अपील 2023 में खारिज हो चुकी है। वहीं अब कुरान की एक अहम आयत ने यमन की जेल में बंद भरत की नर्स निमषा प्रिया के लिए जिंदगी भर की आस लाई है। जी हां। तो क्या है पूरी खबर? चलिए आपको बताते हैं।
दरअसल भारत के ग्रैंड मुफ्ती हजरत एपी अबू बकर मुसलियार ने कुरान की सूर अल बकरा की आयत नंबर 178 का हवाला देकर यमनके इस्लामिक स्कॉलर्स और सरकार से संपर्क साधा है। इस आयत में किस और माफी के सिद्धांत की बात की गई है। यानी जान के बदले जान लेकिन साथ ही पीड़ित परिवार को माफ करने और मनी स्वीकार करने का विकल्प भी बताया गया है।
दरअसल आयत में लिखा गया है कि ए ईमान वालों तुम पर किस यानी कि प्रतिशोध फर्ज किया गया है। मगर अगर किसी को माफ़ कर दिया जाए तो मुआवजे का रास्ता खुला है। इस आयत के आधार पर यमन में बातचीत का एक नया अध्याय शुरू हुआ है और तलाल के भाई अब्दुलफताह मेहंदी से बातचीत कर उन्हें माफ करने के लिए मनाने की कोशिशों पर अब और जोर दिया जा रहा है।
वहीं इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई। जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच के सामने भारत सरकार के अटर्नी जनरल आर वेंकट रमनी ने बताया कि निमिषा की फांसी को टाल दिया गया है और उनकी रिहाई के लिए राजनयिक प्रयास जारी हैं। कोर्ट ने केंद्र के प्रयासों की सराहना की और कहा कि सरकार हर संभव प्रयास करें ताकि निमिषा को मौत की सजा से बचाया जा सके। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 14 अगस्त 2025 की तारीख तयकी है।
अब इस पूरे प्रकरण में एक शब्द पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है और वो है ब्लड मनी। यही ब्लड मनी अब कहीं ना कहीं निमशा की सजा-ए मौत का फैसला करेगी। तो चलिए आपको बताते हैं कि आखिर क्या है ब्लड मनी। दरअसल ब्लड मनी एक रकम होती है जो पीड़ित परिवार को मुआवजे के तौर पर दी जाती है। अगर पीड़ित परिवार इस रकम को स्वीकार कर ले तो आरोपी को मौत की सजा से राहत मिल सकती है। यह इस्लामी कानून के तहत न्याय की एक अहम प्रक्रिया है। हालांकि यह पूरी प्रक्रिया सरकार की निगरानी में होती है ताकि पीड़ित परिवार पर कोई दबाव ना डाला जा सके। अब आप निमषाप्रिया का भी बैकग्राउंड जान लीजिए।
दरअसल निमिषा केरल की एक नर्स हैं जो 2017 में अपने यमनी बिजनेसमैन पार्टनर तलाल की हत्या के जुर्म में दोषी पाई गई थी। निमिषा का दावा है कि उन्होंने आत्मरक्षा में कदम उठाया क्योंकि तलाल उन्हें प्रताड़ित करता था। अब जबकि यमन में उनकी फांसी पर रोक लग चुकी है तो ब्लड मनी और माफी के जरिए निमिषा को राहत मिलने की उम्मीदें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं।
इस संवेदनशील मामले में धार्मिक, कूटनीतिक और कानूनी सभी रास्तों पर प्रयास जारी है। यह मामला केवल कानूनी ही नहीं बल्कि धार्मिक,मानवीय और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से भी जुड़ा है।