सर अब हम अमेरिका की बात कर रहे थे। मैं जानना चाहता हूं कि जो भी अमेरिका के मित्र राष्ट्र हैं चाहे वो इजराइल हो गया और सऊदी अरब हो गया अगर ये किसी फैसले को लेकर दबाव बनाते हैं अमेरिका पर वाइट हाउस पर तो क्या उस दबाव का असर होता है?
क्या वाइट हाउस में जो राष्ट्रपति बैठता है वो इस दबाव में आकर कोई फैसला लेता है अगर इतिहास से जोड़कर मैं पूछूं तो या फिर राष्ट्रपति का जो फैसला होता है वो स्वतंत्र फैसला होता है। उसमें किसी का दबाव नहीं होता। और नहीं राष्ट्रपति किसी भी डेमोक्रेटिक कंट्री का चाहे वो अमेरिका हो या कोई भी हो किसी भी राष्ट्र अध्यक्ष का फैसला स्वतंत्र हो ही नहीं सकता है। उसको इलेक्शन लड़ना है।
अगले बार उसको इलेक्शन के लिए पैसा चाहिएगा और पैसा कौन देगा? ताकतवर लोग देंगे। और ये ताकतवर लोग क्या कर रहे हैं? हथियार बना रहे हैं। ये ताकतवर लोग क्या है जो ईरान को लूटना चाहते हैं। तो ये बिल्कुल नहीं होगा। इजराइल का मामला ऐसा है कि अमेरिका में जितने भी जो मीडिया हाउसेस है अमेरिका के बड़े-बड़े जो वहां पर उद्योग है वो सारे जस लॉबी है उनका खासकर मीडिया तो पूरी तरीके से चाहे वो बड़े-बड़े अखबार का नाम ले लीजिए अखबार का नाम तो क्या ले वाशिंगटन पोस्ट से लेकर सब कुछ सारे के सारे जो है ।
वो जस लोगों के कब्जे में है Facebook वो भी जो जकरबर्ग है वो भी जस मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहता पर तमाम जो पूरा मीडिया इंडिया से ले बड़े-बड़े हथियार बनाने वाले लोग हैं। वो सारे के सारे जूस है और उनका एक जो जो प्रॉमिस लैंड जो जिसको ये लोग बोलते हैं आपने भी जिक्र किया था थोड़े दिनों पहले तो कहीं ना कहीं उनका जो जुड़ाव है उन तमाम चीजों से तो दबाव तो रहता ही है। एक जो आपका प्रश्न है उसका जवाब ये है खासकर कि यूरोपियन यूनियन जो है जो अभी अमेरिका के सुर में सुर नहीं मिला रही थी वो अचानक से उसको क्या हो गया कि फ्रांस के इमान मैक्रो और जो जर्मन जो जर्मन चांसलर है वो अमेरिका के सुर में सुर मिलाने लगे और उन्होंने आईआरसी पर प्रतिबंध लगा दिया।
इसका कारण यह है कि उनको पता है कि लूट तो मचेगी। अब इस लूट में हिस्सेदारी के लिए अगर यूरोप पीछे रहेगा तो कोई खास फायदा है नहीं। तो यूरोप ने अभी अमेरिका के सुर में सुर मिलाना शुरू कर दिया है। भले ही ग्रीनलैंड के मसले पर उसका अमेरिका से अलग विचार है या विभेद है। इसलिए यूरोप साथ आ गया है क्योंकि जब लूट मचेगी तो कुछ जो फायदा है वो यूरोपियन कंपनी को भी हो। तो तजावत सर हम ये मान ले कि अगर सऊदी अरब और इजराइल के वोट से दबाव डाला जाता है तो ना चाहते हुए भी ट्रंप इस में शामिल हो सकते हैं। नहीं सऊदी अरब तो पूरा तरीके से पपेट है। उसके बोलने ना बोलने से कोई फर्क ही नहीं पड़ता है।
जिसके शाह की इतनी हिम्मत नहीं है। वो वहां अमेरिकन प्रेसिडेंट को हवाई जहाज गिफ्ट किया घूमता रहता है। उस व्यक्ति की कोई हैसियत नहीं है। उस राष्ट्र अध्यक्ष की कोई हैसियत? सऊदी अरेबिया ने पहले क्यों दिया था ये स्टेटमेंट? ये भी अमेरिका के कहने से दिया था। इसका कारण यह था कि जो अब्राहम लिंकन जिसकी हम अक्सर जिक्र करते हैं थडो ब्रजवेल जो है एनएसएस थडो ब्रल वो वही था अब्राहम लिंकन को स साउथ चाइना सी से आना था तो उसने ये जो मेरे अंदाज से 2 जनवरी के आसपास वहां से यात्रा शुरू की थी सॉरी 15 जनवरी के आसपास वहां से यात्रा शुरू की थी और 26 जनवरी तक आते-आते वो यमन की खाड़ी है उसके पीछे छुप गया।
ये भारत को इसलिए पता है या भारत की इंटेलिजेंस आपको इसलिए कि उस जहाज का पता कैसे करें जो उसके आसपास जो हेलीकॉप्टर्स बनाते हैं उसको वो सिक्योरिटी देने के लिए या उसको एक्सपोर्ट करने के लिए तो जीपीएस के जरिए हम हेलीकॉप्टर्स और जो आसपास की जो गतिविधियां होती है हम उनको ट्रैक करते हैं और उसके बाद में हमें पता चलता है कि ये जहाज कहां है तो वो दिखता है गायब हो जाता है दिखता है गायब हो जाता है और अभी यमन की खाड़ी से उसकी लोकेशन कहां है हमें पता नहीं है 26 जनवरी तक वो यमन की खाड़ी में था अगर अमेरिका पहले से ही ईरान को चेतावनी दे देता तो बहुत सारी चीजें उलटपलट हो सकती थी।
इसलिए अमेरिका को समय चाहिए था और उसके लिए अमेरिका का स्टेटमेंट जो कि अमेरिकन प्रेसिडेंट है उनको कोई रिलायबल मानता ही नहीं है। तो उन्होंने सऊदी अरेबिया के राष्ट्रध्यक्ष से या उनके जो जितने भी हुक्मरान है उनसे ये इस तरीके के खासकर वहां के फॉरेन मिनिस्टर से ये स्टेटमेंट दिला है और उसके बाद में जब ईरान को हालांकि ईरान सतर्क है और अब जबकि वो अब्राहम लिंकन एनएसएस अब्राहम लिंकन वहां पहुंच चुका है। अमेरिका अपनी तैयारियां पूरी कर रहा है तो बस वो तो पपेट है सर जैसा कि बंसल सर कह रहे हैं और कोचर सर कह रहे हैं क्या आपका भी यह मानना है कि अमेरिका जो भी वहां पर घेरेबंदी कर रहा है उससे यही साबित हो रहा है कि वो हमला करेगा ही चाहे आज नहीं तो कल वो खाली हाथ लौट कर नहीं जाने वाला है।
बिल्कुल मुझे जहां तक लगता है हमला होगा जब तमाम टीवी चैनल्स पर जब अलग-अलग एक्सपर्ट ये बोल रहे थे जब सऊदी अरेबिया ने कहा था कि अब अमेरिका के पास बेस नहीं है तब अब हमला नहीं होगा उस समय भी मेरी यही राय थी कि ये सारे पपेट है इनकी कोई निजी राय है नहीं उन पर भरोसा नहीं करना चाहिए और अमेरिका हमला करेगा अगर वैभव साहब अमेरिका ने इस समय हमला नहीं किया तो वह भविष्य में कभी हमला नहीं कर पाएगा ठीक वैसे जैसे कि उत्तर कोरिया पे अमेरिका के बस का नहीं है हमला करना वैसे ही ईरान उसके हाथ से निकल जाएगा।
उसके पास एटॉमिक बम आ जाएंगे और उसके बाद में वो ताकतवर हो जाएगा। अभी सबसे कमजोर हालात में है घरेलू स्तर पर भी और बाहर के मोर्चे पर भी। चीन और रूस भी उसको सीधा भले ही वो बयानबाजी भले ही कर ले यूनाइटेड नेशंस में। बाकी वो पूरी तरीके से ना तो चीन आने वाला है ना रूस आने वाला है उसके साथ। केवल वो बयानबाजी करेंगे। इसलिए अब यह मान के चलिए वैभव साहब कि अगर अमेरिका अब हमला कर दिया तो कर लेगा। नहीं तो भविष्य में अमेरिका बिल्कुल नहीं कर पाएगा। और जो उसकी जो सुपर पावर बनने की जो ख्वाहिश है वो एक तरीके से उसको ब्रेक लग जाएंगे। वैभव साहब बिल्कुल अभी नहीं तो कभी नहीं। आपका ऐसा कहना है। कोचर सर के पास चलते हैं।
कोचर सर हम लगातार बात करते आ रहे हैं कि ईरान वेनेजुएला नहीं है। ट्रंप ने भी अब यह कह दिया है। उन्होंने कहा है कि हम वेनेजुला में हमने जो सैन्य ताकत भेजी थी वहां पर जैसी हमने सेना भेजी थी जहां पर जैसे हमने सैनिक भेजे थे उससे कहीं गुना ज्यादा कहीं गुना मजबूत ताकत हम ईरान में लगा रहे हैं और हम कुछ ना कुछ तो हल उसका निकालेंगे ही।
तो आपसे मेरा यह सवाल है कि अमेरिका भी समझ रहा है कि ईरान के पास कैसी ताकत है और इसके साथ ही अभी जैसा कि तेजावत सर ने कहा कि रूस और चीन उनका एक तरीके से समर्थन रहता है ईरान की ओर और कल एक मेजर साहब से बात हो रही थी। उनका कहना था कि बहुत सारी मदद चीन की ओर से ईरान को की जा रही है। कई सारे विमान चीन के वो ईरान में लैंड कर रहे हैं जिसमें हो सकता है कि बहुत सारे भी हो। तो आपके पास ऐसी कोई जानकारी है? क्या ईरान भी चीन और रूस से मदद लेकर युद्ध की तैयारी में जुटा हुआ है?
देखिए इसमें कोई शक नहीं है। बिकॉज़ आजकल कोई चीज छुपी नहीं है। अगर आप एक हवाई जहाज आते हैं लैंड करते हैं उसमें से सामान निकलता है। आजकल सेटेलाइट्स है और ये जो डिप्लॉयमेंट्स है ना जब बात करते हैं कि ये छुप गया या इसको दिखाई नहीं दिया। कोई आजकल के दौर में ये पॉसिबल नहीं है। बिकॉज़ जो आपका मैदू सेटेलाइट है चाइना का और वो ईरान के साथ उसका टाई अप है और वो पूरी इन ईरान को मिलती है कि इसको क्या-क्या डिप्लॉयमेंट्स है और उस हिसाब से ईरान भी अपनी डिप्लॉयमेंट्स प्लान कर रहा है।
तो मुझे कोई शक नहीं है जब हम एक ऐसी स्टेटमेंट देते हैं कि जो रशिया से मदद आपको मिली है। देखिए आपको मैं एक इस पहले बात बता दूं 12 दिन की लड़ाई के बाद रशिया ने 12 सुखई के जो हवाई जहाज है वो ईरान को दिए हैं सुई 30 मार्क वन और पायलट्स भी आए थे रशिया के उनको ट्रेनिंग देने के लिए उस टाइम पे तो और जो भी डिप्लीशन हुआ था बिकॉज़ एक एक अनुमान लगाया जा रहा है कि इसको ईरान ने तकरीबन 500 से 600 अपनी फायर करी थी और उनका एक एक इन्वेंटरी है तकरीबन जो सोर्सेस के हिसाब से कि 3000 से 3500 उनके पास मिसाइल्स है तो उनकी एक की आपकी इन्वेंटरी भी कम हो गई तो उसको भी एक्चुअली पूरा किया गया है और एक उनका मैन्युफैक्चरिंग बहुत स्ट्रांग है इसका मिसाइल का और चाइना की हेल्प से मिसाइल वो अपनी बनाते हैं। टेक्नोलॉजी भी अवेलेबल है। रशिया उनको जो काफी हेल्प करता है और ये भी सुनने में आया कि एस 400 जो एक इस इसको इजराइल ने इनके एयर डिफेंस सिस्टम्स नष्ट किए थे उस लड़ाई में और खासतौर पे काफी नुकसान हुआ था ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम का तो मुझे लगता है अब चाइना से लिए हैं एयर डिफेंस सिस्टम इसलिए हम ये जो हवाई जहाजों की बात कर सर आपको रोकना चाहूंगा वनेजुला के पास भी S300 तो था ही ना। जहां तक मेरी जानकारी है
देखिए आपको समझना पड़ेगा। वो एक जब वेनेजुला के ऊपर हुआ था उससे पहले एक टोटल ब्लैक आउट किया गया था। साइबर हुआ था। और जैसे भारत ने टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करके पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम्स को आपको इनफेक्टिव एक्चुअली कर दिया था। सिमिलरली हमने इसको देखा कि यूएस ने वेनेजुला के सारे एयर डिफेंस को इन इफेक्टिव कर दिया था। एक टोटल ब्लैक आउट हुआ था वहां पे। बट यू सी आपको आप फिर से एक्चुअली कंपेयर मत कीजिए बिकॉज़ वेनेजुला इज़ अ वेरी स्मॉल कंट्री। एक छोटे एरिया में जो इस तरीके का साइबर अटैक पॉसिबल है और और वो इफेक्टिव भी होता है। बट इसको ईरान का आप साइज देख लीजिए इतना फैला हुआ है और उसने तकरीबन एक एक आप अनुमान लगा सकते हैं कि उसके पास मोर देन 100 साइट्स हैं और जहांजहां पे उनकी जो मिसाइल्स है वहां पे उनका एयर डिफेंस भी है। तो हम अह इसको एक एक मिलिट्री एनालिस्ट के हिसाब से अगर मैं अनुमान लगाऊंगा कि अगर अमेरिका ने साइबर अटैक किया हम एक एक सिनेरियो इसको पकड़ के चलते हैं कि अमेरिका ने साइबर किया तो वो साइबर जो इस तरीके का आप तीन चार पांच छह प्रोमिनेंट जगह में आप कर सकते हैं। अमेरिका ने पहले भी किया ईरान के अगेंस्ट उनके जो उसको न्यूक्लियर जो आपके एनर्जी प्लांट्स है उनको अमेरिका ने इनफेक्टिव कर दिया था अभी पांच या छ साल आपकी पुरानी बात है तो पर दुश्मन भी जानता है देखिए ईरान भी जानता है अमेरिका क्या करेगा एक हमको वॉर गेमिंग करनी पड़ेगी वॉर गेमिंग हम इसको इसलिए बोलते हैं बिकॉज़ हम जब भी अपनी फौजियों की स्ट्रेटजी बनाते हैं हम हम उसको वॉर गेन करते हैं तो इसको ईरान भी जानता है। उसने वॉर गेम किया हुआ है कि जो किस टाइप का अटैक ईरान के ऊपर आएगा और और उस अटैक से हम कैसे बच सकते हैं और किस हद तक बच सकते हैं। देखिए टोटली तो बच नहीं पाएंगे बिकॉज़ डिस्ट्रक्शन तो होगा और जो इसको अमेरिका ने अपनी टर्मक मिसाइल्स का इस्तेमाल किया था वो दोबारा से करेगा।
बिकॉज़ अभी जो जानकारी आ रही है जहां जहां पे इनके जो एयरक्राफ्ट कैरियर्स है और जहां पर इनकी डिप्लॉयमेंट है वहां पर टॉमोहक मिसाइल्स ऑलरेडी तैनात हो चुकी है। और जो थर्ड मिसाइल सिस्टम भी अमेरिका ने लगा दिया है। उनकी सबमरीन इसलिए आई हुई है बिकॉज़ जो अमेरिका की सबमरी है वो टमक मिसाइल्स फायर करती है और वो 12 दिन की लड़ाई में भी फायर किया था और काफी इनफ जो काफी इफेक्टिव हुआ था फायर क्योंकि सबमरीन की लोकेशन ढूंढना बड़ा मुश्किल हो जाता है ईरान के लिए। एक बाकी लोकेशन पिन पॉइंट हो जाती है। बट अगर वो एक सबमरीन से फायर हो तो शायद वो मुश्किल है। तो इस तरीके की लड़ाई हम देख सकते हैं जिसमें आधुनिक लड़ाई होगी और जैसे कि हमने सिंदूर में देखा था मिसाइल्स और ड्रोन की लड़ाई होगी। वो मैक्सिमम इसमें इफेक्ट होगा।
साइबर एक साइबर अटैक उससे पहले किया जाएगा और नुकसान बहुत होगा ईरान का। इसमें कोई शक नहीं है। बट इसमें इजराइल भी अगर आप इसको इस फैक्टर को अगर ले तो ईरान किस पे स्ट्राइक करेगा? एक तो आपके यूएस एयर बेससेस हो गए जहां पे ऑलरेडी अपना एयर डिफेंस सिस्टम लगाया जा चुका है। और क्यों इस लड़ाई को डिले किया गया है। बिकॉज़ अमेरिका को टाइम चाहिए था अपने एयरसेस को सिक्योर करने के लिए। तो अमेरिका ने अपने एयर बेससेस को सिक्योर किया आज की डेट में और इसको इजराइल को भी सिक्योर करने की कोशिश हो रही है। इजराइल भी अपने आप को सिक्योर करने की कोशिश कर रहा है क्योंकि इजराइल के ऊपर भी हमला होगा। तो इस तरीके की इसको लड़ाई होगी और लास्ट पॉइंट है कि देखिए इसमें पूरा वर्ल्ड आपका जो आपका ऑलमोस्ट 20% ट्रेड आपका स्टेट ऑफ़ हॉरर्मस आपका गल्फ ऑफ़ ओमान और आपका रेड सी इसको ये इफेक्टिव है।
तो ये ऑलमोस्ट 20% ट्रेड आपका अफेक्ट होगा यहां पे वर्ल्ड ट्रेड जिसमें एलएनजी भी शामिल है। ऑयल भी शामिल है। ऑयल के प्राइसेस बढ़ेंगे। आपकी इनफ्लेशन बढ़ेगी। इसमें भारत को भी काफी इंपैक्ट होने वाला है। बिकॉज़ हमारे ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ेंगे। आप जानते हैं एक बार जब इसको हाउथिस ने रेड सी को जो उसको वहां पर टारगेट किया था तो उस टाइम भी हमने देखा कि आपके इंश्योरेंस कॉस्ट आपके बढ़ते हैं और आपका जो सप्लाई चेन है वो लंबे रूट से जाता है।
केप ऑफ गुड होप की तरफ से जाता है। तो यह सारी चीजें वर्ल्ड इकॉनमी को अफेक्ट करेंगी और एक एक अंत में मैं बोलना चाहता हूं कि जो ईरान के पास कैपेबिलिटी है कि ये स्ट्रेट ऑफ हॉरर्मूस को माइन भी करेगा। बिकॉज़ अगर उसको वहां से एक्चुअली माइन करेगा। जब उसको पता चलेगा कि अमेरिका अपनी शिप्स को आगे लेके आएगा या उसको अपनी रेट को कम करने की कोशिश करेगा तो वो इन एरियाज को भी माइन करेगा।
