जी जब वो तीन नेता मिलने गए थे फनवीस जी से उसके बाद उनका कहना था कि जो भी फैसला लिया जाना चाहिए वो जन भावनाओं का ख्याल रखते हुए लिया जाना चाहिए। तो कहीं ऐसा नहीं हो सकता था कि अभी अजीत दादा की मौत के बाद जैसी सहानुभूति की लहर है उनके परिवार के साथ उनकी पत्नी और बेटों के साथ अगर किसी और नेता को बना दिया जाता तो भारी पड़ सकता था वो।
मिश्रा जी मैं यही बात 10 सेकंड ले कंप्लीट करना चाह रहा था जो आपने पूछ ली और यह सारी इंटेलेक्चुअल बात इधर रख के भारतीय राजनीति में सिंपथी वेव तो हमेशा रही है भाई इमरजेंसी लाने के बाद इंदिरा गांधी की जो हत्या हुई निशंस हत्या उस सिंपथी वेव में तो राजीव गांधी जी ने रिकॉर्ड बना दिया जो रिकॉर्ड मोदी मैजिक भी तोड़ नहीं पाया मोदी जगन्नोट भी तोड़ नहीं पाया तो सिंपथी वेव तो है और वो सबसे इंपॉर्टेंट फैक्टर है और अगेन ये जो मैं बोल रहा हूं उसके लिए मैं क्षमा चाहता हूं जो अंग्रेजी में हम कहते हैं बीइंग द डेवल एडवोकेट बट सिंपथी वेव ठंडी हो उसके पहले सुनेत्रा ताई को अजीत दादा की गद्दी पर बिठा दिया जाए ये इनकी सर्वसम्मति थी पार्टी के भीतर विलय को लेकर आपके पास कोई जानकारी है.
क्या दोनों एनसीपी एक हो सकती हैं अभी भी संभावना है इसकी देखिए विलय को लेके मैंने एक बात ये राष्ट्रीय चैनल पे एक जगह रखी थी विलय को लेके ऐसा है कि मैं शरद पवार पवार को शरद चंद्र पवार को महाराष्ट्र का कैप्टन अमरिंदर सिंह बनते देख रहा हूं। लगभग उनकी जो एज है 85 86 के आसपास तो अब राजनीतिक तौर पे कुछ उनके पास नया बचा नहीं है। ही इज़ इन द लास्ट और फैग एंड ऑफ ह पॉलिटिकल करियर। तो एक पिता के नाते उनको अपने वारसदारों को सेट करना होगा। मैं स्पष्ट भाषा में बात कर रहा हूं। लागलपैट नहीं कर रहा। तो उस दृष्टि से उनको दिखेगा कि आने वाले समय में तो मोदी और मोदी बीजेपी एनडीए का बोलबाला रहेगा। तो विलय को लेके मुझे कोई संदेह नहीं। दोनों पार्टी को संदेह नहीं।
एक संदेह फैक्टर है जो कि अहम फैक्टर है। महिला नहीं मुस्लिम फैक्टर कि यदि संदेह होता है तो जो शरद दादा का कोर मुस्लिम वोटर है वो कहां जाएगा? उनका क्या होगा? इतना ब्रेन स्टार्मिंग करना है। लेकिन ये आपका मेरा विषय नहीं है। केवल पवार परिवार तय करेगा कि क्या होना है। हां अभय भाई मैं आपके पास आऊंगा। ूंगा युवराज जी शरद पवार का जो बयान आया था कि मेरी जानकारी नहीं है मेरे पास यह जानकारी कि सुत्रा पवार बनने जा रही हैं उप मुख्यमंत्री मुझे समाचार पत्र के जरिए पता चला उस उनके बयान में एक दर्द भी झलक रहा था क्या वो यह उम्मीद कर रहे थे कि उनसे भी सलाह मशवरा किया जाए उनसे भी पूछा जाए और पूछा नहीं गया मिश्रा जी अमित शाह के आने के पहले यदि आप लोग याद करें तो शरद पवार को सही मायनों में चाणक्य कहा जाता था वो सूंघ थे कहां सत्ता और क्या लोगों का मूड है। तो आज ढलते पड़ाव पे जब वह आ गए हैं और सही मायनों में इलेक्शन कमीशन ने नाम चिन्ह पार्टी नेता अजीत दादा को दे रखे हैं।
तो अजीत पवार और उनके फैक्शन ने तय किया। कहा यह भी जा रहा है कि इसमें दिल्ली की भूमिका रही। अह देवेंद्र बा की देवेंद्र फडनवीस की भूमिका रही और अजीत दादा का जो कुणबा है एनडीए के साथ तो यह स्वाभाविक है कि उन्होंने शरद पवार से पूछा नहीं और ये एक मैसेज दे दिया कि एनसीपी हम है मराठा मानुष हम है हम सत्ता में है तुम अपना देखो और तुम विलय कर लेना और ये सब बाहर की बात है कमरे के अंदर पर ये जो कुटुंब एक साथ बैठेगा पवार परिवार तो मुझे लगता है कि यह एनडीए में ही आके बैठेंगे चलिए अभय के पास चलते अभय भाई आप इस विषय पर कुछ जोड़ना चाह रहे थे और इसके साथ ही एक सवाल भी है जो आप दोनों की बातचीत सुनकर मुझे लग रहा है वो मुझे ऐसा लग रहा है कि शरद गुट ज्यादा चाहता है कि विलय हो और अजीत गुट की उतनी इच्छा नहीं है। क्या ये सच है? बिल्कुल ये सच है। लेकिन उससे पहले देखिए युवराज जी ने जो बातें कही उसमें से ऑलमोस्ट सारी बातें सही है। लेकिन एक बात से मैं उनसे असहमत हूं।
देखिए अमरिंदर सिंह शरद पवार महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स के नहीं बन रहे। इस वजह से मैं बताता हूं कि देखिए 48 घंटे हुए थे अजीत पवार के पार्थिव को वो अग्नि मिले। उसके बाद 48 घंटों के भीतर ही शरद पवार मीरा नदी के तट पर थे। किसानों के बीच वहां पर देख रहे थे कि किस तरीके का पानी की समस्या है और किस तरीके का पानी प्रदूषण की समस्या है। उन्होंने ये भी कहा कि देखिए स्टेट और सेंटर के साथ जो मीटिंग लेनी होगी वो मीटिंग मैं ले लेता हूं और उसके बाद हम डिसाइड करेंगे क्या नहीं होता। तो शरद पवार एक ऐसा फैक्टर है बिल्कुल सही कहा सर ने कि अमित शाह आने के बाद जो चाणकी की पदवी शरद पवार को दी जाती थी अब वो अमित शाह के पास है क्योंकि रिजल्ट बोलता है लेकिन ये भी बात सच है कि कई बार कई बार जो मैसेजिंग जरूरी होती है.
वो शरद पवार माघरे में लेकिन लेकिन हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए अभय भाई कि शरद पवार की एक उम्र हो चली है वो वैसी अवस्था में नहीं है नहीं नहीं नहीं देखिए उनकी अवस्था में मुझे आज भी याद है कि मैं स्कूल में था देखिए स्कूल और कॉलेज में था तब उस समय शरद पवार का रिटायरमेंट अब बहुत पास आ गया। ये बात बोली जाती थी। आज बिल्कुल सही है कि वो ऑलमोस्ट व्हीलचेयर पे आ चुके हैं। लेकिन देखिए ये जो उन्होंने मैसेज दिया है कि मुझे कुछ पता नहीं है।
मुझे न्यूज़पेपर्स के जरिए पता चला। दैट मींस इस सिग्नलिंग वो सिग्नल दे रहे हैं कार्यकर्ताओं को वो सिग्नल दे रहे हैं लोगों को कि देखिए कुछ लोग हैं जो सोनत्रा के थ्रू पार्टी को या फिर एनसीपी को जिसके देखिए आज के नेता अजीत पवार बिल्कुल थे लेकिन फाउंडर शरद पवार थे। तो वो एक तरीके से पार्टी लेके जा रहे। आपने जो दूसरी बात कही कि शरद पवार बिल्कुल अभी उनमें यह बात नहीं है कि वह प्रचार सभाएं कर लेंगे हर जगह जाके फिर से पार्टी को नए सिरे से बांधेंगे नेताओं को चुप बिठा देंगे बिल्कुल नहीं लेकिन असली लड़ाई जो हो रही है वो एक लेगसी की है और वो लेगेसी किस तरीके की है जो आपने बात बोली कि शरद पवार का गुड ज्यादा चाहता है क्यों चाहता है क्योंकि उनके पास वो लीडर्स है पवार फैमिली के थ्रू जो आगे लीड कर सकते है देखिए सुनेत्रा वहिनी जो है सुनेत्रा वहिनी एक पॉलिटिकल फैमिली से आती है। पद्म सिंह पाटिल की वो बेटी है और उनके भाई खुद बीजेपी के बड़े महाराष्ट्र के नेता है। तो वो बिल्कुल कंपटेंट है। सुनेतरा जी काफी कंपटेंट है पूरी पार्टी को भी संभालने के और सत्ता में रहकर सारा कामकाज करने के लेकिन जो फसेस है जैसे मैं देखिए महाराष्ट्र की कुछ भावनाएं मैं बताना चाहता हूं कि महाराष्ट्र के लोग जो है यहां पर इमोशनल राजनीति बहुत होती है। खास करके पश्चिम महाराष्ट्र में जहां पर एनसीपी का स्ट्रांग होल्ड है। वहां पर इमोशनल राजनीति इतनी होती है कि सातारा की एक सभा शरद पवार की उसके बाद वहां पर छत्रपति के वंशज सीट हार गए थे।
तो वही बात है कि जो 12 दिन रुकना चाहिए था ये क्यों बोला जा रहा है? क्योंकि वहां की लोग वहां के लोग इमोशनल है। उनको यह बात सहज नहीं लग रही कि इतनी जल्दी हो चुका है। पार्टी की मजर की बात है। तो जो इक्का है वो है रोहित पवार। रोहित पवार एक ऐसे नेता है जो क्योंकि पवार फैमिली में बेटे का मतलब कार्ड आगे नहीं होता या फिर आपके पुत्र पुत्री का कार्ड आगे नहीं होता। वहां पर हो रहा है कि भाई मेरा चाचा था ये भतीजा था तो चलो ये चल गया। पहले थे यशवंत राव चौहान। उन्होंने शरद पवार को अपना मानस पुत्र कहा। उनके बाद उन्होंने अजीत पवार को सामने लाया। पहले बेटी से भी पहले उनको और अजीत पवार होते-होते रोहित पवार ने अपनी जगह पार्टी में बना ली। उसके बाद यही देखिए उन्होंने अपने दादा के साथ चले गए। तो यह बात है कि पार्थ वगैरह देखिए पार्थ के पीछे जो नाम वाम वो सारी चीजें है सुत्रा अभी के लिए टर्बुलेंस पीरियड में उसको लीड करेगी लेकिन इवेंचुअली क्या होगा तो शरद पवार का गुड इसलिए आग्रह भी है कि उनके पास पवार फैमिली से सबसे बड़ा चेहरा है आगे के लिए आप रोहित पवार का नाम बता रहे हैं। इसके साथ ही और भी तो कई सारे पवार परिवार के युवा हैं जिनकी अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं। उसमें योगेंद्र पवार भी है जो अजित पवार लड़े थे लेकिन लेकिन उनके बर्डन है यही बात है देखिए अभी कुछ महीने पहले ही पार्थ पवार का पुणे के स्कैम जो एक एलगेशंस उनके ऊपर लगे थे उसकी वजह से उनकी प्रतिमा मिली हुई मावर में एक बार पहले वो चुनाव लड़ चुके हैं लोकसभा का वहां पर वो हार गए जो भाषा शैली होनी चाहिए जो भाषण देने की कला होनी चाहिए एक नेता के लिए किसी खास करके पवार फैमिली के लिए वो उनमें नहीं है खेती की खेती का ज्ञान बारामती से कनेक्ट ये सारी चीजें कहीं ना कहीं जो शरद पवार की गुट में जो नेता है.
स्पेशली रोहित पवार उनका पगड़ा भारी कत आज के समय में देखिए सुरेंद्र पवार इज मोर दन इनफ बहुत कंपेटेंट लोगों के बीच में जो सिंपथी है वो भी कैश इन होगा और वो हमें जिला परिषद की इन चुनाव में भी दिखेगा कि कितना कैश इन होगा। बिल्कुल अभय सुनेत्रा पवार पर अभी आगे हम और बात करेंगे। अभी हम बात कर लेते हैं अजीत पवार वाली एनसीपी में उन नेताओं की जिनसे सलाह मशवरा लेकर सुतित्रा पवार अपनी आगे की राजनीति करने वाली हैं। आपके हिसाब से वो कौन से नेता हो सकते हैं? एक दो नाम तो जाहिर सी बात है सबको पता है। प्रफुल पटेल जो बेहद ही करीबी थे और दिल्ली वाला सारा मामला भी देखते हैं। आपने खुद ही बताया।
तो आपको क्या लगता है कि कौन से वो नेता हैं अजीत वाली गुट वाली एनसीपी में जो सुनेत्रा पवार के अब आंख नाक कान बनने वाले हैं? देखिए मिश्रा जी मुझे जो अभी जानकारी मिली बंबई के कुछ दोस्तों से जी तो अभी तो देवेंद्र फडनवीस से लेकर दिल्ली तक का जो भी पूरा सेटअप है ये सुनील ततकरे जी और प्रफुल पटेल जी देखेंगे कुछ बफर समय दिया जाएगा ताई को वहिनी को और सुनेत्रा जी जैसे देखिए वो जैसे हमारे मित्र अभय ने कहा कि वो राजनीतिक घराने से आई है। उन्होंने राजनीति अपने घर में जीवन में देखी है। तो कुछ लोग होंगे जो उनके भी लॉयलिस्ट बनेंगे। यह राजनीति में ऐसा कहीं नॉर्म नहीं है कि जो अजीत दादा के खासम खास रहे हो वही सुनेत्रा ताई के आसपास रहे। अभी के लिए वो ट्रांजिशन भी बना सकती हैं। ट्रांजिशन फेस में ये दो तीन लोग रहेंगे और इनका पलड़ा बहुत भारी रहेगा।
सुनील ततकरे जी हो, दिलीप पालसे पाटिल हो या प्रफुल पटेल हो। लेकिन आने वाले समय में सुनीत्रा जी भी हमें सरप्राइज़ कर सकती हैं। भाई हमारे देश में तो इंदिरा को भी गूंगी गुड़िया कहा था जो इमरजेंसी लेके आई थी। तो हमें नहीं पता कि कितना पॉलिटिकल एक्यूमन और मादा वह रखती है। अब हम देखेंगे अब महाराष्ट्र देखेगा और हो सकता है एक नई टीम बनाए क्योंकि मुझे जो जानकारी है सेंस है इस टीम में दिल्ली दरबार की भी सहमति है और इन लोगों में दिल्ली का भी काफी कुशल भूमिका है कि कौन कब क्या रहेगा तो यह भी हो सकता है कि आज की चुनावी राजनीति से प्रभावित होके महिलाओं को आगे किया जाए। कुछ महिला सशक्त करके हो सके राजघराने की महिला हो पिटिकल परिवार की महिला हो लेकिन उनको भी आगे रख सकते हैं कुछ युवाओं को आगे रख सकते हैं जिनका तारतम्य नितिन नवीन से अच्छा हो आने वाली युवा पीढ़ी को मौका दिया जाए तो अभी मैं एक बहुत सीधी बात करूंगा कि आगे कौन आएगा इनके पत्ते पत्ते खुले नहीं है आज की तारीख में लेकिन मुझे लग रहा है सरप्राइजेस अवश्य आने वाले हैं युवराज जी एक सवाल और है जैसे कि आप दिल्ली की बात कर रहे थे दिल्ली यानी भारतीय जनता पार्टी का आलाकमान क्या यह चाहता है कि शरद गुट भी उसके वाले महायुती गठबंधन में आ जाए? खासकर अमित शाह ऐसा चाहते हैं। देखिए जब हम ओल्ड चाणक्य वर्सेस न्यू चाणक्य की बात करते हैं तो मुझे एक चीज मेरी एक अंडरस्टैंडिंग है कि अमित शाह को आपने बतौर गृह मंत्री देखा तो आपने बोला अरे वाह वाह वाह बड़ी बात। लेकिन मैं उन्हें बतौर कोपरेटिव मंत्री देख रहा हूं। मैं फिर दोहराऊंगा महाराष्ट्र और खास करके यह उत्तरी और पश्चिमी महाराष्ट्र कोपरेटिव सहकारी मंडलियों का दबदबा रहा है और अजीत दादा ने भी शुगर कोऑपरेटिव बोर्ड में एक बोर्ड मेंबर के नाते राजनीति शुरू की और पुणे में डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव सेंट्रल बैंक के वो चेयरमैन रहे काफी वर्षों तक तो कोऑपरेटिव पे जिसकी जिसका दबदबा होगा.
उसका दबदबा उत्तर प्रदेश में भी रहेगा गुजरात के अंशों पर भी रहेगा महाराष्ट्र में भी रहेगा तो कोऑपरेटिव राजनीति की बहुत बड़ी भूमिका है जो कि ग्रास रूट है। उस ग्रास रूट पे अजीत दादा ने बहुत काम किया। अमित शाह और उनके लोग भी काम कर रहे हैं। तो आज की तारीख में पूरी फर्टाइल भूमि उपजाऊ भूमि तैयार है भाजपा के लिए और उसका सबसे नजदीक और सबसे सटीक उदाहरण है महाराष्ट्र में बीएमसी के चुनाव और बीएएमसी के साथ जो अन्य नगर निकाय के चुनाव हुए थे। बीजेपी अपने दम पे आगे आ गई। तो अब शरद पवार के पास क्या ऑप्शन है? लेकिन मैं सीधा आपसे वन टू वन बात कर रहा हूं कि भैया पूरी फर्टाइल भूमि मेरे पास केंद्र की सत्ता मेरे पास राज्य की सत्ता मेरे पास और कोऑपरेटिव ग्रास रूट मेरे पास तुम्हारे पास क्या बचा है 85 के हो गए हो आप आ जाओ शांति से हमारे साथ भारतीय जनता पार्टी को कोई तकलीफ नहीं है जो उनके साथ तारतम्य में चलेगा भारतीय जनता पार्टी सभी को अपने में समावेश करने तैयार है आज की तारीख में लेकिन युवराज कंपटीशन ही खत्म करना चाहती है ना बीजेपी शरद गुटवाली पार्टी में कई सारे ऐसे नेता हैं जो बीजेपी को बिल्कुल भी पसंद नहीं करते हैं। बहुत ज्यादा ही तल्ख टिप्पणियां करते रहते हैं। फिर चाहे उनमें हम जितेंद्र आवाड़ का नाम ले लें और जयंत पाटिल को लेकर कहा जाता है कि वो भी बीजेपी के साथ बहुत सहज नहीं है। क्या ये लोग कभी राजी हो पाएंगे? अगर शरद पवार खुद भी चाहे अनिल देशमुख भी रहे हैं। अनिल देशमुख जो है वो भी रहे हैं काफी। लेकिन मिश्रा जी, ये बड़ी स्पष्ट बात है। बीजेपी ने एक बड़ा सा ऑफर दे दिया शरद दादा को।
अब शरद पवार को देखना है कि यह ऑफर स्वीकारना मेरे हित में है और किस हद तक बनाने का ऑफर और उस हित को साधते हुए यदि आपको लगता है कि इक्कादुक्का नेता जिनका जनाधार हिल चुका है या जिनके बिना भी हम आगे बढ़ सकते हैं तो ये तो सीधा सा बाल्टर देखना है आपको हो सकता है हो सकता है बहन जी को शरद पवार जी की सुपुत्री जो काफी टाइम से सुप्रिया जी दिल्ली दरबार में बड़ी प्रचलित है फेमस कोई मंत्रालय मिल जाए उनको शरद का डिसजन है कि मेरी बेटी का मंत्रालय वर्सेस एक कार्यकर्ता एक एमएलए कम वो शरद दादा का डिसजन रहेगा पूरा
