नमाज़ ऐप को इज़रायल ने ईरान के खिलाफ़ कैसे यूज किया?

जब ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमले चल रहे थे, उसी वक्त लाखों ईरानियों के मोबाइल फोंस में एक साथ घंटी बज रही थी। घंटी एक रहस्यमई नोटिफिकेशन की। लिखा था मदद आ गई है। कौन सी मदद? कैसी मदद? यह मदद मांगी किसने थी? ये सारे सवाल सेकेंडरी थे। पहला सवाल था कि आखिर ये कथित मदद भेजी किसने है? जवाब किसी को नहीं मालूम।

यही वजह है कि ये नोटिफिकेशन रहस्यमय हो गई। रहस्यमय माने इसको माने जाने की एक और वजह थी यह नोटिफिकेशन उस ऐप पर आई थी जो नमाज का वक्त याद दिलाता है। आज वो ऐप कौन से वक्त के दस्तक की इत्तला दे रहा था ये उन लाखों ईरानियों को तब तक नहीं मालूम था। फिर हमलों का शोर बढ़ने लगा।

एक्सपर्ट्स कहते हैं यह महज एक मामूली नोटिफिकेशन नहीं थी। यह असल में था एक साइकोलॉजिकल वॉर का हथियार। साइकोलॉजिकल वॉर और इस हथियार का इस्तेमाल कर रहा था इजराइल। पूरी खबर आपको डिटेल में बताते हैं। इंडिया टुडे ओपन सोर्स इंटेलिजेंस की जर्नलिस्ट खुशी सोनकर की रिपोर्ट के मुताबिक यह पूरा मामला बादे सबा ऐप से जुड़ा है। यह एक तरह का कैलेंडर और रिमाइंडर ऐप है जिसका इस्तेमाल ईरान के लाखों लोग करते हैं।

ऐप उन्हें नमाज के वक्त रिमाइंडर नोटिफिकेशन भेजता है ताकि वह समय पर नमाज अदा कर पाएं। इसी ऐप में 28 फरवरी की सुबह 9:52 पर एक नोटिफिकेशन आती है। मगर यह नमाज का वक्त नहीं था। मैसेज भी कुछ और था। लिखा था हेल्प हैज़ अराइव्ड मदद आ गई है।

फिर सुबह 10:14 पर इसी का एक फॉलो अप मैसेज आता है। वायर्ड मिडिल ईस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक इस मैसेज में कहा जाता है ईरान की आजादी के सपोर्ट में अपने हथियार डाल दें या आजादी की फौज में शामिल हो जाए। इसके बाद भी 30 मिनट के अंदर कई और नोटिफिकेशंस आई जो इसी तरह की थी। इनमें ईरानी सेना से जुड़े लोगों को एक शर्त पर माफ करने की बात लिखी थी। एक नोटिफिकेशन में कहा गया बदला लेने का वक्त आ गया है। दमनकारी ईरान की सरकार की फर्सेस को ईरान के मासूम लोगों के खिलाफ अपने क्रूर और बेरहम कारवाइयों की कीमत चुकानी होगी।

जो कोई भी ईरानी मुल्कों को बचाने और उसकी रक्षा करने में शामिल होगा उसे राज क्षमा और माफी दी जाएगी। अमेरिकी मीडिया वायर्ड ने इन नोटिफिकेशंस के कुछ स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं। ये घटना बहुत ही अनयूजुअल थी क्योंकि जिस ऐप पर ये नोटिफिकेशंस आ रही थी वो धार्मिक प्रार्थना नमाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

इंडिया टुडे ओसेंट की रिपोर्ट के मुताबिक इस ऐप में इस्लामिक कैलेंडर दिखता है जो रोजाना पांच वक्त की नमाज के लिए रिमाइंडर भेजता है। साथ ही ऐप में अजान के वक्त पर सीधे लॉक स्क्रीन पर साउंड अलर्ट भेजा जाता है। इसके अलावा इस्लाम से जुड़ी सभी अहम तारीख जैसे पैगंबरों के जन्मदिन, शहादतों की सालगिरह और धार्मिक छुट्टियों से जुड़ी जानकारी इस ऐप पर होती हैं। फिर सवाल है कि लाखों यूज़र्स वाले एक ऐसे धार्मिक एक्ट पर यह नोटिफिकेशन आई कैसे?

एक ऐसी नोटिफिकेशन जो लोगों को सीधे ईरान के इस्लामिक शासन के खिलाफ भड़काती हो। इंडिया टुडे की ओसेंट टीम ने इसकी पड़ताल की। फिर बताया कि असल में ये नोटिफिकेशंस एक एडवांस्ड साइबर साइकोलॉजिकल ऑपरेशन का हिस्सा थी। यानी सबसे पहले ईरानी लोगों के बड़े भरोसे वाले इस ऐप को हैक किया गया और फिर लोगों तक यह मैसेज पहुंचाए गए। मैसेज का मकसद साफ था ईरान के नागरिकों पर साइकोलॉजिकल असर डालना।

ईरानी शासन के खिलाफ अपने मिशन में उन्हें अपने साथ लेना। मगर किया किसने? यह साफ नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि अब तक किसी ने भी इस हैकिंग की जिम्मेदारी नहीं ली है। लेकिन इंडिया टुडे के मुताबिक यह ऐसा लगता है कि इजराइल ने ही ईरान पर यह कोऑर्डिनेटेड साइबर अटैक किया है। क्योंकि यह नोटिफिकेशन ठीक उसी टाइम पर भेजे गए थे जब इजराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए।

वही हमले जिनमें ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामन को निशाना बनाया गया और उनकी जान चली गई। यानी इजराइल ने जब ईरान पर हमले शुरू किए उसी वक्त वहां के एक धार्मिक ऐप को हैक करके मुल्क के बाशिंदों तक अपना मैसेज भी पहुंचा दिया। मैसेज पहुंचाने के लिए भी चुना गया तो बादे सबा कैलेंडर ऐप को। इंडिया टुडे ओसेंट के मुताबिक इजराइल ने इस ऐप का इस्तेमाल इसलिए किया क्योंकि उस पर ईरान के लाखों लोग बहुत भरोसा करते हैं।

दिन में कई बार वो इसे चेक करते हैं और इसकी दी गई जानकारियों पर कभी सवाल नहीं उठाते। पक्का यकीन है। साथ ही इस ऐप की रीच भी बहुत ज्यादा है। यानी ज्यादा से ज्यादा लोगों के मोबाइल फोंस में आपको यह ऐप इंस्टॉल्ड मिल जाएगा। सिर्फ Google Play Store पर 50 लाख से ज्यादा बार यह ऐप ऑफिशियली इंस्टॉल किया गया है। इसके अलावा कई थर्ड पार्टी प्लेटफॉर्म्स पर भी यह ऐप अवेलेबल है। इसलिए मुमकिन है कि यह और भी कई बार डाउनलोड किया गया हो।

वैसे इस पूरी हैकिंग में एक बहुत दिलचस्प बात भी है। वो यह कि ईरान का इंटरनेट बहुत ज्यादा फिल्टर्ड है। देश में प्रोपोगेंडा फैलाने से बचाने के लिए ईरानी शासन सख्ती से इसे कंट्रोल करता है कि लोग इंटरनेट पर क्या देखें, क्या नहीं। कई संदिग्ध विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर फायर वॉल भी लगाए गए हैं। यानी उस पर पाबंदियां लगा दी गई हैं। लेकिन बाद सबा ऐप ईरान का घरेलू ऐप है।

इसलिए वो बिना किसी रोक-टोक के ईरान में काम करता है। सबसे जरूरी बात यही है जिसकी वजह से इजराइल के लिए यह ऐप ईरान के लोगों तक अपना मैसेज भेजने और साइकोलॉजिकल का सबसे आसान और कारगर जरिया बना।

मगर सिर्फ यही एक अटैक नहीं है बल्कि बताया गया है कि बाद सबा ऐप की इजराइल के एक बड़े कोऑर्डिनेटेड साइबर अटैक का सिर्फ एक हिस्सा है। इसके अलावा इजराइल ने आईआरएनए, आईएसएनए, तबनाक और असर-ए- ईरान जैसे ईरान के बड़े मीडिया ऑर्गेनाइजेशंस पर भी साइबर अटैक्स हमले किए हैं। ऐसा करके वो लोगों तक अपनी बात पहुंचाना चाहता था और लोगों के ख्यालात मौजूदा ईरानी सत्ता के खिलाफ करना चाहता था।

अब वो अपने इस मकसद में किस हद तक कामयाब हो पाया है ये आने वाले वक्त में पता चलेगा जब जंग के बादल छटकर नीचे जमीनी माहौल कुछ समझ आ पाएगा कि लोगों के मन में चल क्या रहा है जो भी समझ आएगा हम

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