मुंबई के पवई में 17 बच्चे बंधक! पुलिस करवाई में गई गुनहगार की जान।

मुंबई में आज दिन दहाड़े मचा हड़कंप। एक फिल्म स्टूडियो ऑडिशन देने आए 17 मासूम बच्चे और एक सिरफिरा जिसने इन बच्चों को बना लिया अपनी ढाल। उसकी मांगे पैसा नहीं कुछ और थी। धमकी थी एक गलत हरकत और सब कुछ जला दूंगा। इसके बाद जो हुआ उसने पूरे देश की सांसे रोक दी।

आज मुंबई के सबसे पौश इलाकों में से एक पवई में जो हुआ वो किसी एक्शन थ्रिलर फिल्म की कहानी से कम नहीं था। एक वेब सीरीज के ऑडिशन के लिए आए 17 बच्चों और एक बुजुर्ग को एक शख्स ने स्टूडियो के अंदर ही बंधक बना लिया। यह कोई आम नहीं था। उसे पैसे नहीं चाहिए थे। तो फिर वह चाहता क्या था? और कैसे मुंबई पुलिस ने एक बेहद मुश्किल और खतरनाक ऑपरेशन को अंजाम देकर इन बच्चों को बचाया। इस सिरफिरे का क्या हुआ? कि यह सब कुछ शुरू कैसे हुआ।।

जगह थी पवई का आर ए स्टूडियोज। दोपहर के करीब पौ:45 बजे मुंबई पुलिस के कंट्रोल रूम में एक फोन घनघनाता है। खबर मिलती है कि एक शख्स ने कुछ बच्चों को बंधक बना लिया है। पुलिस बिना एक पल गवाए मौके पर पहुंचती है। बिल्डिंग को चारों तरफ से घेर लिया जाता है। अंदर का मंजर डराने वाला था। 17 बच्चे और एक सीनियर सिटीजन एक शख्स के कब्जे में थे जिसका नाम था रोहित आर्य। लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही इस रोहित आर्य ने अपना इरादा एक वीडियो मैसेज जारी करके दुनिया को बता दिया था।

इस वीडियो में उसने जो कहा वो हैरान करने वाला था। उसने क्या कहा था पहले सुन लीजिए। मैं रोहित आर्या। मरने करने की जगह मैंने एक प्लान बनाया है और कुछ बच्चों को इधर हॉस्टेज रखा है। मेरे कुछ ज्यादा डिमांड्स नहीं है। बहुत सिंपल डिमांड्स है। बहुत मोरल डिमांड्स है। बहुत एथिकल डिमांड्स है। पर मेरे कुछ सवाल है। मुझे कुछ लोगों से बात करनी है। उनको सवाल पूछने हैं। उनके जवाब पर अगर मुझे काउंटर क्वेश्चन है तो मुझे काउंटर क्वेश्चन पूछना है। लेकिन मुझे यह जवाब चाहिए।

मुझे दूसरा कुछ नहीं चाहिए। ना मैं हूं ना मेरे बहुत बड़ी पैसों की डिमांड है। कुछ भी पैसों की डिमांड तो है ही नहीं। इमोरल तो बिल्कुल भी नहीं है। सिंपल कन्वर्सेशंस करने हैं और जिसके लिए मैं इन बच्चों को हॉस्टेज लिया है। यह मैंने एक प्लान के तहत ही हॉस्टेज लिया है। लेट्स चेंज फॉर मैं सच में करने वाला था। करने वाला हूं। अगर जिंदा रहा तो मैं करूंगा। अगर मैं मर गया तो कोई और करेगा। लेकिन होगा जरूर। इन्हीं बच्चों के साथ होगा। अगर इनको हार्म नहीं होता है तो। बिकॉज़ द स्लाइटेस्ट रॉन्ग मूव फ्रॉम योर एंड विल ट्रिगर मी कि मैं यह पूरा जगह को आग लगा दूं और उसमें मर जाऊं। मैं मर जाऊं या नहीं मर जाऊं। बच्चे अननेसेसरी हर्ट होंगे। डेफिनेटली होंगे। उसके ऊपर कुछ होगा तो मुझे पता नहीं। उसका जिम्मेदार मुझे ना गिना जाए।

उसका जिम्मेदार उन लोगों को गिना जाए जो अननेसेसरी यह ट्रिगर कर रहे हैं। जबकि एक नॉर्मल कॉमन पर्सन सिर्फ बात करना चाहता है। मेरी बातें खत्म होने के बाद मैं खुद ही बाहर आऊंगा। मैं अकेला नहीं हूं। मेरे साथ और भी लोग हैं। कई सारे लोगों को यह परेशानियां है। और यह मैं स्यूशन देने वाला हूं सिर्फ बातें करके। प्लीज डू नॉट ट्रिगर मी टू डू सम हार्म टू एनीबडी। सोचिए एक ऐसा शख्स जिसके हाथ में बच्चों की जान है वो कह रहा है कि उसे बस बात करनी है। लेकिन उसकी चेतावनी बेहद खतरनाक थी।

पुलिस के लिए यह ऑपरेशन बहुत ही चैलेंजिंग था। एक तरफ बच्चों की सुरक्षा थी, दूसरी तरफ एक ऐसा शख्स जो किसी भी हद तक जा सकता था। पुलिस ने सबसे पहले बातचीत का रास्ता अपनाया। डीसीपी दत्ता नलावड़े की टीम ने रोहित से संपर्क साधने की कोशिश की। उसे समझाने की कोशिश की लेकिन वो अपनी मांगों पर अड़ा हुआ था। वो किसी की सुनने को तैयार नहीं था। जब बातचीत से कोई हल नहीं निकला तो मुंबई पुलिस ने वो किया जिसके लिए वह जानी जाती है। एक स्विफ्ट और शार्प ऑपरेशन। पुलिस को एक कमजोर कड़ी मिली। स्टूडियो का बाथरूम। एक स्पेशल टीम ने बाथरूम के रास्ते से एक फोर्स एंट्री की। कमांडोज़ अचानक अंदर दाखिल हुए और इससे पहले कि रोहित आर्य कुछ समझ पाता या कोई कदम उठा पाता। उसे दबोच लिया गया। और सबसे बड़ी राहत की खबर यह आई कि सभी 17 बच्चों और उसे एक बुजुर्ग को बिना किसी खरोच के सुरक्षित बचा लिया गया।

जब पुलिस ने सीन की तलाशी ली तो वहां से एक एयर और कुछ बरामद हुए। यह दिखाता है कि उसके इरादे कितने खतरनाक थे। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। इस कहानी में एक और बड़ा ट्विस्ट तब आया जब रेस्क्यू ऑपरेशन अपने आखिरी चरण में था। पुलिस के इस पूरे ऑपरेशन के दौरान आरोपी रोहित आर्य ने पुलिस पर कर दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को भी जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी।

पुलिस ने अपनी तरफ से एक राउंड किया और यह सीधे रोहित आर्य को लगी। वो बुरी तरह घायल हो गया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया। लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। तो एक ऐसे शख्स का अंत हो गया जिसने अपने कुछ अनसुलझे सवालों के जवाब पाने के लिए 17 मासूम जिंदगियों को दांव पर लगा दिया था।

पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आखिर उसकी वो नैतिक मांगे क्या थी? वो किन लोगों से बात करना चाहता था? क्या उसका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड था?

Leave a Comment