बहन-भाई में की शादी से क्यों पैदा हो रहे ऐसे बच्चे ?

शादी एक ऐसा बंधन जिसमें भारत में आमतौर पर कुंडलियां मिलाने का चलन है जिसमें लड़के और लड़की की कुंडलियां मिलाई जाती हैं कि आखिर दोनों के बीच भविष्य में जब रिश्ता आगे बढ़ेगा तो समन्वय कैसा रहेगा। लेकिन आपको बता दें कुछ ऐसे भी देश हैं जहां पर कुंडली तो छोड़िए। भाई-बहन में ही शादी करने का प्रचलन है। जब हम भाई-बहन कहते हैं तो इसको अंग्रेजी में कहा जाता है कजन मैरिज। और पाकिस्तान में खासतौर पर इस तरह की शादियों का चलन है। लेकिन इस तरह की शादियां कितनी सही है? क्या वैज्ञानिक आधार पर भी उनके कुछ दुष्परिणाम होते हैं? यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब अब एक रिसर्च के जरिए सामने आया है। जिस रिसर्च में क्या कुछ बताया गया है? किस तरीके से इस तरह की शादी में पैदा होने वाले बच्चों पर असर पड़ रहा है और इसके पीछे का बड़ा कारण क्या है?

इस पर डिटेल्ड रिसर्च किया है और समझा है कि आखिर भाई-बहन कजिन मैरिज को अगर हिंदी में कहें तो भाई और बहन के बीच में हुई शादी आखिर कहां तक जायज है? लेकिन सबसे पहले वैज्ञानिक रिसर्च में क्या कुछ सामने आया है ये निकिता से समझते हैं और उससे भी पहले यह समझते हैं कि आखिर ये बात ट्रेंड में कैसे आई और क्यों आई? ये बात इस समय ट्रेंड में इसलिए है क्योंकि टॉमी रॉबिनसन नाम के एक एक्टिविस्ट हैं ब्रिटिश एक्टिविस्ट।

उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और उस वायरल वीडियो में वो कई बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं इस्लाम के बारे में और कजिन मैरिज के बारे में मुस्लिम्स के बारे में स्पेशली पाकिस्तानी मुस्लिम कम्युनिटी जो इस समय ब्रिटेन में है उनके बारे में तो यहां से ये बात ट्रेंड में आई है। जी निकिता क्या कहा है इन्होंने? ऐसी क्या बात कह दी कि ट्रेंड में सी भी आ गई ये बात। तो टॉमी रॉबिनसन जो है उनका ये कहना है कि जितने पाकिस्तानी हैं इस समय ब्रिटेन में ब्रिटिश पाकिस्तानी कम्युनिटी जो कि है उसमें से 76% अपने कजिन से शादी करते हैं।

फर्स्ट कजिन वो भी फर्स्ट कजिन हो गए आपके चाचा के बेटे, मामा के बेटे, बुआ के बेटे, मासी के बेटे। ये आपके फर्स्ट कजिन हो गए। तो उनका यह कहना है कि 76% पाकिस्तानी ब्रिटिश कम्युनिटी अपने फर्स्ट कजिन में शादी करती है। जिसकी वजह से ब्रिटेन में जितने बच्चे पैदा होते हैं उसमें से 33% बच्चे जेनेटिक डिजीजेस का शिकार होते हैं। और ये किस वजह से? ये कजिन मैरिजेस की वजह से। ये उनका बड़ा दावा है जो इस समय सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

इसके चलते डिबेट चल रहे हैं कि आखिर ये जो कह रहे हैं कहां तक सही है और कहां तक गलत है। ओके लेकिन हम अपने दर्शकों को जैसा कि मैंने सबसे पहले यही सवाल किया था कि ये कितना इसमें इसमें कितनी सच्चाई है और इसके पीछे फैक्ट क्या है ये भी बताइए निकिता। देखिए फैक्ट हमें पता पड़ता है एक बीबीसी की रिपोर्ट से। बीबीसी ने एक रिपोर्ट साइड करी है बोर्न इन ब्रैडफोर्ड।

जी यह रिसर्च हुई थी 2007 से 2010 के बीच में जिसमें सैंपल बनाया गया था ब्रैडफोर्ड की 13000 बच्चे हम छोटी मोटी आबादी की बात नहीं कर रहे हैं। हम 13,000 बच्चों की बात कर रहे हैं। तो बोर्न इन ब्रैटफोर्ड की उस स्टडी में यह पता पड़ा कि हर छह बच्चे में से एक बच्चा ऐसा है जिसके मां-बाप आपस में कजिंस हैं। ये हम ब्रैडफोर्ड की बात कर रहे हैं ब्रिटेन में। हर छह बच्चे में से एक बच्चे के मां-बाप आपस में फर्स्ट कजिंस हैं। यानी कि चाचा, ताई, मामा, मौसी के बच्चे उनकी आपस में शादी हुई है। जिसके बाद और ज्यादातर इसमें जिसे हम भारत में चचेरे, मौसेरे, ममेरे, भाई-बहन कहते हैं। जिसमें ज्यादातर इनमें से इन शादियों में से इन बच्चों में से ज्यादातर थे पाकिस्तानी ब्रिटिश कम्युनिटी। ओके। और इनमें से 3% बच्चे ऐसे थे जो कि जेनेटिक डिजीजेस का शिकार थे। इस वजह से क्योंकि उनके मां-बाप आपस में भाई-बहन हैं। सिर्फ 3% ऐसा नहीं है जैसा कि टॉमी ने बोला कि 33% नहीं।

बात वो उनका स्टैटिस्टिक्स गलत है। बात वो सही कह रहे हैं कि रिस्क होता है जब भी कजिन मैरिजेस होती हैं ये साइंटिफिकली प्रूव प्रूवन है। ये मेडिकलली प्रूवन है कि जब दो इंसानों के जींस इतने ज्यादा सिमिलर होते हैं जो कि कजिंस में भाई बहनों में आमतौर पर होता है। तो उनसे जो बच्चे पैदा होते हैं उनमें डिजीजेस बहुत ज्यादा उनप चांसेस होते हैं। ऐसा नहीं है कि हर बच्चा जो कजिन मैरिज से पैदा हो रहा है उनमें ऐसा होता है। तो ब्रैडफोर्ड की जो स्टडी थी उसमें 3% बच्चे ऐसे पाए गए जिनको डिजीजेस हैं। किस वजह से? क्योंकि उनके मां-बाप आपस में भाई-बहन हैं।

इसमें मैं आपको और एक आंकड़ा बताती हूं। तो जब ये स्टडी हुई तो इसमें अब ये कि कितना प्रतिशत किसको कितनी बीमारी किस चीज की रहती है। तो सबसे कॉमन होता है स्पीच एंड लैंग्वेज डिसेबिलिटी। यानी कि आम भाषा में बातचीत करने में बच्चे को तकलीफ होना। क्योंकि डिसऑर्डर है। तो 11% बच्चे ऐसे पाए गए भाई-बहन के बच्चे ऐसे पाए गए जिनमें ये डिसऑर्डर था। और आमतौर पर जो लोग नहीं रिलेटेड हैं जब वो शादी करते हैं तो 7% बच्चे ऐसे मिलते हैं जिनमें ये होता है। लेकिन अगर आप भाई-बहन हैं तो वो आंकड़ा पहुंच जाता है 11% तक। ये जो बार बनाया गया है जिससे यह पता किया जाता है कि अगर किसी बच्चे की उम्र 5 साल है तो उसका दिमाग भी 5 साल का है या नहीं। तो यह जो टेस्ट होता है वो 64% बच्चे पास कर पाए जो कि नॉर्मल पेरेंट्स यानी कि जो कि रिलेटेड नहीं है उनसे पैदा होना।

अलग-अलग परिवारों से जो दो लोग आए हैं उन्होंने शादी करी है तो वो 64% बच्चे वो टेस्ट पास कर पाते हैं। लेकिन यही जब हम बात करते हैं कि जब आपस में कजिन है, भाई-बन हैं तो वो आंकड़ा गिर के पहुंच जाता है 54%। तो इससे हमें ये पता पड़ता है कि हां ये बात है। कहीं ना कहीं इस बात में सच्चाई है। कहीं ना कहीं इस बात में सच्चाई है लेकिन आंकड़े बहुत कुछ कहते हैं। हम ऐसा नहीं कह सकते कि सारे ही बच्चे वो जेनेटिक प्रॉब्लम्स होती हैं उनमें जो कजिन मैरिजेस से पैदा होते हैं। लेकिन ये रिस्क बढ़ जाता है। इसके लिए कई तरीके के प्रोग्राम्स चलाए गए हैं ब्रिटेन में कि आपको अवेयरनेस आपको डॉक्टर्स समझाते हैं कि ये जो आप करने जा रहे हैं अगर आप बच्चा प्लान कर रहे हैं तो कितने रिस्क इनवॉल्व्ड हैं।

किस बात का आपको ख्याल रखना है। कैसे आपको अपनी प्रेगनेंसी में रहना है। सब कुछ समझाया जाता है। तो क्यों? की और ये बात ऐसी नहीं है कि सिर्फ और सिर्फ पाकिस्तान में ऐसा होता है। काफी मिडिल ईस्ट की कंट्रीज, साउथ अफ्रीका, इवन साउथ एशियन कंट्रीज में भी काफी कंट्रीज में ये प्रचलन है जहां फर्स्ट कजिंस में शादी की जाती है। तो टॉमी रॉबिनसन ने जो कहा है वो पूरी तरीके से सच नहीं है। वो अधूरा सच है। वो मिसलीडिंग डाटा है। लेकिन वो झूठ भी नहीं है।

तो आपने समझा इस पर कि आखिर जो यह कजिन मैरिज होता है ये जो चचेरे ममेरे फुफेरे हम जो अमूमन भाषा में कहते हैं कि इनके बीच जब शादी होती है और उनके जब बच्चा पैदा होते हैं तो उनमें और जो एक अलग-अलग परिवार से जब शादियां होती है उनके बच्चों में क्या डिफरेंस होता है तो यह आपने पूरी तरीके से समझा तो टॉमी रॉबिनसन ने जो स्टडी किया और उन्होंने जो आंकड़ा बताया उसमें ना पूरी तरीके से सच्चाई है और ना ही वह पूरी तरीके से गलत है।

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