ईरान के लिए पूरा ख़ानदान लुटा देने वाले मुज्तबा ख़ामनेई की असली कहानी।

यह हैं मुजतबा खामनाई ईरान के नए और थर्ड सुप्रीम लीडर। इनके बारे में वो सबसे पहली चीज कि जिसको सुनकर ही आपको अंदाजा हो जाएगा कि इनका बनना अमेरिका के लिए क्यों परेशानी की बात है वो यह है कि न्यूक्लियर बम बनाने को लेकर इनकी जो सोच है वो पुराने सुप्रीम लीडर मतलब कि सैयद अली खामनाई से बिल्कुल अपोजिट है। जहां एक तरफ सैयद अली खामनाई न्यूक्लियर बम बनाने के खिलाफ थे। बल्कि उसको इंसानियत के लिए खतरा मानते हुए उन्होंने इसका बनाना नाजायज करार दे रखा था।

तो वहीं दूसरी तरफ उनके ये जो बेटे हैं मतलब कि अगले सुप्रीम लीडर ये ईरान की तरफ से न्यूक्लियर बम बनाने के हक में खड़े हुए नजर आते हैं। वैसे यहां पर एक इंटरेस्टिंग बात यह भी है कि अभी दो-तीन दिन ही गुजरे हैं कि जब ट्रंप ने मीडिया के सामने ईरान को यह देते हुए कहा था कि मेरे पास इस तरह की रिपोर्ट्स आ रही हैं कि ईरान का जो सिस्टम है वो अंदर ही अंदर सैयद अली खामनाई के बेटे मुस्तबा खामनाई को सुप्रीम लीडर बनाने के बारे में सोच रहा है। तो जान लो कि मुस्तबा खामनाई एक सुप्रीम लीडर के तौर पर मेरे लिए अनएक्सेप्टेबल है।

मतलब उनको लीडर बनाने की हिम्मत ना करना। इसके अलावा एक स्टेटमेंट में डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए यह भी कहा था कि उनका सुप्रीम लीडर कौन होगा यह मैं चुनूंगा। मतलब ईरान जिसको भी अपना अगला नया लीडर बना रहा है उसके सिलेक्शन में मुझे भी शामिल करें। मगर देखिए कि ईरान ने अगले एक से दो दिन के अंदर उसी खास इंसान को ही अपना लीडर चुन लिया है कि जिसको ना बनाने की ट्रंप की तरफ से [संगीत] धमकी दी जा रही थी। मतलब हम कह सकते हैं कि ईरान ने करारा जवाब दिया है। मुस्तबा खामनाई के जिनको आईआरजीसी का हद से ज्यादा करीबी समझा जाता है।

उनके बारे में एक और खास बात यह भी है कि इनको अपने फादर मतलब कि सैयद अली खामनाई से भी ज्यादा हार्ड लाइनर के तौर पर देखा जाता है। जिसका आसान भाषा में मतलब यह हुआ कि अमेरिका और इजराइल के मामलात को लेकर यह सैयद अली खामनाई से भी ज्यादा कठोर नजर आएंगे। मुस्तबा खामनाई कि जिनकी उम्र इस वक्त लगभग 56 साल के करीब है। इनका जन्म 8 सितंबर 1969 में हुआ था। मतलब ईरान के अंदर क्रांति होने से लगभग 10 साल पहले जिसका मतलब यह हुआ कि जिस वक्त इनके फादर सैयद अली खामनाई ईरान की राजनीति की सीढ़ियों पर चढ़ रहे थे उस वक्त यह बच्चे ही हुआ करते थे। बात करें इनके बाकी भाई बहनों की मतलब कि सैयद अली खामनाई की औलादों की तो वो छह के करीब हैं। जिनमें से चार बेटे हैं, दो बेटियां हैं। मगर खास बात यह है कि मुश्तबा खामनाई के अलावा इनके बाकी तमाम भाई बहनों ने ईरान की राजनीति से दूरी बना कर रखी है। मतलब वो पब्लिक में बम मुश्किल ही नजर आते हैं। जबकि यह खुद जो मुश्तबा खामनाई हैं, इनका बैकग्राउंड फौज का है। मतलब यह आईआरजीसी में सर्विस दे चुके हैं। 1980 से लेकर 1988 के दौर में इराक और ईरान के बीच जो एक खतरनाक जंग चली थी। उस जंग के अंदर किसी दौर में मुस्तबा खामनाई बिल्कुल फ्रंट लाइन पर लड़ चुके हैं और जिस वक्त ये इस जंग के अंदर बड़े-बड़े ऑपरेशंस में हिस्सा ले रहे थे उस वक्त इनकी उम्र 17 से 18 साल के करीब हुआ करती थी।

इनके बारे में यह भी दावा किया जाता है कि सन 2009 से मुस्तफा खामनाई ही अनऑफिशियली बसीज को लीड करते आ रहे हैं। आपको नहीं पता है तो बता दें कि यह जो बसीज है यह दरअसल ईरान की जो आईआरजीसी है उसकी पांच ब्रांचेस में से एक ब्रांच है इसके लाखों की तादाद में मेंबर्स हैं और यह ईरान के जो अंदर के सिक्योरिटी मामलात होते हैं उनको देखती है। बात करें एजुकेशन की तो ये बताया जाता है कि इनके जो सबसे शुरुआती कुछ टीचर्स थे उनमें से एक टीचर इनके खुद के फादर मतलब कि सैयद अली खामनाई भी थे। इसके अलावा इन्होंने अलग-अलग लेवल पर सरदश, महाबाद और कौम जैसे अहम शहरों में तालीम हासिल की है। यहां पर यह बात भी याद रखने वाली है कि अमेरिका और इजराइल की तरफ से शुरू की गई इस जंग के बिल्कुल शुरुआती हमलों में ही मुस्तबा खामनाई ने अपने फादर मतलब कि सैयद अली खामनाई, अपनी मदर मतलब कि उनकी बीवी, अपनी बहन, अपने बहनोई और अपनी भांजी और भांजे वगैरह को खो दिया था। अब जहां तक सवाल उनके ईरान के सुप्रीम लीडर बनने का है तो वैसे तो वेस्टर्न वर्ल्ड के कुछ ऐसे मीडिया आउटलेट थे कि जो बहुत लंबे वक्त से ही यह सिग्नल देते आ रहे थे कि शायर मुस्तफा खामनाई को सैयद अली खामनाई का सक्सेसर चुन लिया जाएगा।

मतलब इनके बाद मुमकिन है कि यही ईरान के लीडर बनेंगे। और ऐसा दावा करने के पीछे इन लोगों की दलील यही होती थी कि मुस्तबा खामनाई जो आम लोगों में भले ही नजर ना आते हो मगर पर्दे के पीछे से वो [संगीत] ईरान के सिस्टम में बहुत अहम किरदार अदा कर रहे थे। जबकि दूसरी तरफ हम देखते हैं कि वेस्टर्न मीडिया के ही बहुत सारे मीडिया आउटलेट्स और स्पेशली ईरान का जो स्टेट मीडिया था वो इन तमाम चीजों को रिजेक्ट करता था और रिजेक्ट करने की जो सबसे बड़ी वजह होती थी वो दरअसल खुद ईरान के सुप्रीम लीडर सैयद अली खामनाई थे। मतलब यह कि मुस्तबा खामनाई के अगले लीडर बनने का कोई सबसे बड़ा विरोधी था तो शायद वो इनके खुद के फादर सैयद अली खामनाई थे। और इसकी सिंपल सी वजह हम लोगों को यही नजर आती है कि शायद वो इनको इसलिए नहीं बनाना चाहते थे कि वो इनके खुद के बेटे थे।

मगर अब जैसा कि हम जानते हैं कि 8 और 9 मार्च की रात में अचानक से यह खबर आई कि असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स कि जिसके 88 मेंबर्स होते हैं और जिनकी यह जिम्मेदारी होती है कि वो ईरान के सुप्रीम लीडर को चुने उन्होंने मेजॉरिटी के साथ मुस्तबा खामनाई को ही अपने अगले सुप्रीम लीडर के तौर पर चुन लिया है। अब ऐसा क्यों हुआ? इसके पीछे कई अलग-अलग वजह बताई जा रही हैं। पहली वजह तो यही है कि यह जो अमेरिका और इजराइल ने 86 साल के उनके लीडर मतलब कि सैयद अली खामनाई को टारगेट किया है। उसके बाद से सैयद अली खामनाई के नाम के नीचे पूरी की पूरी ईरानी कौम जमा हो चुकी है। ईरान के तमाम लोग कि जो जंग से पहले चाहे सैयद अली खामनाई से पॉलिटिकली एग्री किया करते थे या नहीं किया करते थे। तमाम के तमाम एक झंडे के नीचे आ चुके हैं और तमाम के तमाम लोगों की हमदर्दियां खामनाई फैमिली के साथ हैं। तो बस ताकतवर दुश्मन के खिलाफ लड़ी जा रही जंग के दौरान आम लोगों के इसी जोशो जज्बे को आगे कायम रखने के लिए मुस्तबा खामनाई को चुन लिया गया। दूसरा फैक्टर यह है कि क्योंकि यह आईआरजीसी के बहुत ज्यादा क्लोज हैं और जैसा कि हम जानते हैं कि वो आईआरजीसी कि जो आम दिनों में भी ईरान के पूरे सिस्टम पर काफी इन्फ्लुएंस रखती है वो अब जंग के दौरान तो और भी ज्यादा ताकतवर हो चुकी है। तो मुमकिन है कि इस पूरे प्रोसेस में आईआरजीसी के इन्फ्लुएंस का भी अहम किरदार रहा हो। जबकि जो एक और फैक्टर है वो खुद डोनाल्ड ट्रंप हैं। जैसा कि हमने शुरू में ही बताया था कि उन्होंने ईरान के लोगों को धमकी दी थी और मुस्तफा खामनाई को ना चुनने की बात कही थी। तो मुमकिन है कि ईरान कि जो शुरू से ही लगातार अमेरिका को हर चीज का मुंहतोड़ जवाब दे रहा है। उसने इस चीज को एक डिसरिस्पेक्ट के तौर पर देखा हो और फिर वो मुस्तबा खामनाई कि जिनके सुप्रीम लीडर बनने के 50-50 चांस हो। उनको ही अमेरिका को करारा जवाब देने के लिए फुल मेजॉरिटी के साथ अपना अगला सुप्रीम लीडर चुन लिया हो।

तो कुल मिलाकर दोस्तों, यह जो अमेरिका ने ईरान के अंदर एक रिजीम चेंज ऑपरेशन शुरू किया है और ईरान के ऊपर एक बड़ी मुसल्लत कर दी है। इसकी वजह से बाकी कोई चीज तो नहीं बदली है। मगर हां एक चीज जरूर बदली है और वो यह है कि अमेरिका ने खामनाई को ही खामनाई से बदल दिया है। और यह बिल्कुल वैसा ही है कि जैसा अफगानिस्तान में अमेरिका ने 20 साल गुजारने के बाद अपने बेशुमार फौजियों की जान देने के बाद अरबों डॉलर्स खर्च करने के बाद तालिबान को तालिबान से ही बदलकर वापस आ गया था।

Leave a Comment