राजधानी दिल्ली में एक बड़ी प्रॉपर्टी डील होने जा रही है। इतनी बड़ी कि देश भर में उसकी चर्चा हो रही है। इस डील में महाराजा साहब की हवेली शामिल है। दिल्ली के लुटियन जोन में 3.2 एकड़ में बने टिहरी गढ़वाल के महाराजा मनुजेंद्र शाह की कोठी बिकने जा रही है। पांच भगवान दास रोड पर बनी इस कोठी के लिए ₹1000 करोड़ की कीमत तयहुई है। जितनी चर्चा इस कोठी की हो रही है, उतनी ही चर्चा इस कोठी के खरीदार की भी हो रही है।
दरअसल इसे खरीदने वाले शख्स ने हाल ही मेंपूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पहले आधिकारिक आवास को 1100 करोड़ में खरीदा था। महाराजा मनुजेंद्र शाह के दिल्ली वाले आलीशान बंगले को खरीदने वाला दिल्ली के फूड बिजनेस सेक्टरसे जुड़े हैं।
बस इतनी जानकारी सामने आई है कि बिजनेसमैन दिल्ली के फूड एंड बेवरेज सेक्टर में मजबूत दावेदारी रखने वाले हैं। हालांकि खरीदार की पहचान फिलहाल सामने नहीं आई है। [संगीत] बस यह जानकारी फिलहाल सामने आई है कि दिल्ली के जिस बिजनेसमैन ने नेहरू का पहला आधिकारिक आवास खरीदा था वहीं इस बंगले को भी खरीद रहे हैं।
बायरर्स पहले से ही दिल्ली के लूटियन जोन में रहते हैं और महाराजा की यह प्रॉपर्टी को खरीदने के फाइनल स्टेज में है। [संगीत] इन दोनों ही प्रॉपर्टीज को ट्रॉफी स्टेट की श्रेणी में रखा गया है। मतलब बेहद दुर्लभ और आलीशान प्रॉपर्टी माना गया है। दिल्ली में पुरानी संपत्तियों में खरीदारों की बढ़ती दिलचस्पी यह बताती है कि दिल्ली का लूटियंस जोन आज भी रियलस्टेट मार्केटके लिए खास है।
टेहरी गढ़वाल के महाराजा मनोजेंद्र शाह की कोठी की डील और 1000 करोड़ की वैल्यू्यूएशन ने बता दिया है कि दिल्ली का रियलस्टेट मार्केट आज भी आकर्षण का सेंटर बना हुआ है। लोग आज भी हेरिटेज संपत्तियों में दिलचस्पी रखते हैं।
महाराजा जी के इस प्रॉपर्टी की बात करें तो 12,950 वर्ग मीटर में फैला यह बंगला गढ़वाल राज परिवार की परंपरा उनकी विरासत को दर्शाता है। टिहरी गढ़वाल के महाराज मनुजेंद्र शाह टिहरी गढ़वाल राजघराने के सातवें राजा हैं। 1948 में उनका जन्म हुआ और 7 जनवरी 2007 में उन्हें टिहरी गढ़वाल का राजा घोषित किया गया।
दिल्ली के मॉडर्न स्कूल से पढ़ाई और सेंट स्टीफन कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने महारानी माला राज्य लक्ष्मी शाह से शादी की। उनकी एक बेटी है। महाराज के पास ऐसी [संगीत] कई संपत्तियां हैं। वह इस बंगले को बेच रहे हैं। क्योंकि राज परिवारों के पास पुरानी संपत्तियों की देखभाल की जिम्मेदारी होती है।
