क्यों मनोज कुमार को बदमाश बोल गई जया बच्चन ?

यह जगह है यह सवाल पूछने का? प्लीज स्टॉप टेकिंग पिक्चर्स। आई हेटेट इट बिकॉज़ इट्स राइट इंटू माय आई। डोंट एक्ट स्मार्ट विद मी। बॉलीवुड में विवाद और चर्चाएं कोई नई बात नहीं। लेकिन जब बात दिग्गज हस्तियों की हो तो यह चर्चाएं और भी सुर्खियां बटोरती हैं। हाल ही में जया बच्चन और मनोज कुमार से जुड़ा एक ताजा विवाद सोशल मीडिया पर तूफान मचाए हुए हैं। यह घटना मनोज कुमार की प्रार्थना सभा के दौरान हुई जिसने ना केवल बॉलीवुड बल्कि उनके फैंस को भी हैरान कर दिया।

साथ ही जया और मनोज के बीच पुराने पेशेवर मतभेदों की कहानी भी फिर से चर्चा में आ गई है। । 4 अप्रैल 2025 को बॉलीवुड के भारत कुमार कहे जाने वाले दिग्गज अभिनेता और फिल्म प्रोड्यूसर मनोज कुमार का 87 वर्ष की आयु में मुंबई के कोकिला बेेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में निधन हो गया। दिल से संबंधित समस्याओं के कारण उनका देहांत हुआ। जिसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को गहरा सदमा दिया। मनोज कुमार अपनी देशभक्ति फिल्मों जैसे शहीद, उपकार, पूरब और पश्चिम और रोटी, कपड़ा और मकान के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। उनकी याद में 6 अप्रैल 2025 को मुंबई के एक पांच सितारा होटल में एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। इस सभा में बॉलीवुड के कई बड़े सितारे शामिल हुए। जिनमें आमिर खान, राकेश रोशन, अमिताभ बच्चन, सलीम खान, प्रेम चोपड़ा, सोनू निगम और जया बच्चन जैसे नाम थे। माहौल गंभीर और भावनात्मक था क्योंकि लोग मनोज कुमार के योगदान को श्रद्धांजलि दे रहे थे।

लेकिन इस सभा में एक ऐसी घटना घटी जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। प्रार्थना सभा के दौरान एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। जिसमें जया बच्चन एक बुजुर्ग महिला के साथ तीखी प्रतिक्रिया करती दिखी। वीडियो में देखा गया जया बच्चन कुछ महिलाओं के साथ बातचीत कर रही थी जब एक बुजुर्ग महिला ने उनके कंधे पर धीरे से हाथ रखा। शायद एक तस्वीर लेने की इच्छा के साथ। लेकिन जया बच्चन इस इशारे से असहज और नाराज दिखी। उन्होंने तुरंत महिला का हाथ पकड़ा और उसे किनारे कर दिया। साथ ही एक पुरुष को जो शायद महिला का साथी था और मोबाइल फोन पर वीडियो रिकॉर्ड कर रहा था उसे भी डांट लगाई। जया का चेहरा गुस्से से लाल था और उन्होंने कथित तौर पर कहा, क्या कर रही हो? क्या तमाशा बना रखा है? इस घटना ने प्रार्थना सभा के पवित्र माहौल को प्रभावित किया और सोशल मीडिया पर एक बहस छेड़ दी। इस वक्त जहां लोग मनोज कुमार की जर्नी को याद कर रहे हैं, वहीं एक पुराना किस्सा जया बच्चन से अनबन का भी खूब सुर्खियों में है।

जब एक्ट्रेस ने उन्हें तक कह दिया था। जया बच्चन बॉलीवुड की उन शख्सियतों में से एक हैं जो अपनी बातों को बेबाकी से रखने के लिए जानी जाती हैं। हालांकि उनकी बेबाकी कई बार लोगों को चुभती भी है। जया ने अपने इस कोस्टार को सेट पर उनके व्यवहार के लिए काफी कुछ सुना डाला था। मनोज कुमार ने कई एक्ट्रेसेस के साथ काम किया है। लेकिन जब बात जया बच्चन की आ जाती है तो उन दोनों का विवाद लोगों को सबसे पहले याद आता है। एक समय था जब जया बच्चन ने अपनी भड़ास मनोज कुमार पर निकाली थी। दोनों का विवाद फिल्म शोर के सेट पर हुआ था। इस फिल्म में जया और मनोज कुमार लीड रोल निभा रहे थे।

जिसका खुलासा एक्ट्रेस ने अपने एक इंटरव्यू में किया। जया ने बताया कि फिल्म के दौरान उनका अनुभव अच्छा नहीं था। किस्सा करीब 53 साल पुराना है। मनोज कुमार और जया बच्चन दोनों फिल्म शोर में एक साथ नजर आए। जया बच्चन आज से नहीं करियर की शुरुआत से ही अपनी बात बेबाकी से रखने के लिए जानी जाती थी। अपना पक्ष रखने में वह देरी तब भी नहीं करती थी। फिर चाहे किसी को भला लगे या बुरा। साल 1972 में आई फिल्म शोर के सेट पर भी कुछ ऐसा ही हुआ था। एक रिपोर्ट के मुताबिक शोर के सेट पर जया और मनोज का मतभेद हो गया था। यहां तक कि जया ने उनको गुंडा तक कह दिया था और भारत कुमार वाली उनकी छवि को पूरी तरह से फर्जी करार दे दिया था। दरअसल जया बच्चन को मनोज कुमार पर गुस्सा इस बात को लेकर आया था कि उन्हें किसी भी ट्रायल शो के लिए नहीं बुलाया गया था। जिस वजह से उन्होंने मनोज को अहंकारी भी बता दिया था।

जया बच्चन के गुस्से पर मनोज कुमार ने रिएक्ट किया था और अपनी सफाई देते हुए कहा था कि ट्रायल शो सिर्फ एडिट करने के पर्पस से रखा गया था और उस वक्त मूवी भी पूरी नहीं हुई थी। उन्होंने गुड्डी फिल्म देखने के बाद जया को शोर के लिए कास्ट किया था और फिल्म का किरदार उनको ही जहन में रखकर लिखा गया था। दरअसल जिस वक्त शोर फिल्म की शूटिंग चल रही थी उस समय अमिताभ बच्चन जया को डेट कर रहे थे और वह अक्सर सेट पर उनसे मिलने आते थे। इस फिल्म की रिलीज के 1 साल बाद जया और अमिताभ ने शादी रचा ली थी। इस मूवी के सेट से ही मनोज कुमार और बिग बी की दोस्ती की शुरुआत भी हुई थी। 24 जुलाई 1937 को ब्राह्मण परिवार में जन्मे मनोज कुमार का असली नाम हरिकिष्ण गिरी गोस्वामी था।

पाकिस्तान के एपटाबाद शहर में जन्मे मनोज कुमार उस वक्त महज 10 साल के थे जब बंटवारे के दौरान उनका पूरा परिवार पाकिस्तान से राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में आकर बस गया था। मनोज कुमार जब छोटे थे तब उन्होंने दिलीप कुमार की फिल्म शबनम देखी थी। इस फिल्म में दिलीप के किरदार का नाम मनोज था। शबनम से हरिकिशन गोस्वामी इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने एक्टर बनने की ठान ली और जब एक्टर बने तो अपना नाम मनोज कुमार रख लिया। दिल्ली के हिंदू कॉलेज से स्नातक की शिक्षा हासिल करने के बाद मनोज कुमार अभिनेता बनने का सपना लेकर मुंबई आ गए। कॉलेज के दिनों में वो काफी अच्छे दिखते थे। इसलिए हीरो बनने की चाहत में थिएटर से जुड़ गए। मनोज कुमार ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1957 में फिल्म फैशन से की।

जिसमें उन्होंने एक छोटी सी भूमिका निभाई। यह फिल्म ज्यादा सफल नहीं हुई और इसके बाद उन्होंने सहारा, चांद, पंचायत और हनीमून जैसी फिल्मों में छोटे-मोटे किरदार किए। इन शुरुआती फिल्मों में उनकी मौजूदगी को ज्यादा नोटिस नहीं किया गया। उनको पहला बड़ा ब्रेक 1961 में फिल्म कांच की गुड़िया में मिला जिसमें उन्हें मेन एक्टर के तौर पर कास्ट किया गया। इसके बाद पिया मिलन की आस, सुहाग सिंदूर और रेशमी रुमाल जैसी फिल्में आई। लेकिन यह फिल्में बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं दिखा पाई। मनोज कुमार को असली पहचान 1962 में विजय भट्ट की फिल्म हरियाली और रास्ता से मिली। माला सिन्हा के साथ उनकी जोड़ी को खूब पसंद किया गया था।

यह फिल्म उस समय एक सक्सेसफुल फिल्म रही और मनोज कुमार को एक उभरते हुए सितारे के रूप में स्थापित किया। 1960 के दशक में मनोज कुमार ने कई हिट फिल्में दी जिनमें शादी, डॉक्टर विद्या, गृहस्ती और फूलों की सेज शामिल हैं। 1964 में राज खोसला की मिस्टीरियस थ्रिलर फिल्म वो कौन थी में साधना शिव दसानी के साथ उनकी जोड़ी को काफी सराहा गया। इस फिल्म ने इंडस्ट्री में उन्हें एक अलग पहचान दिलाई। हालांकि मनोज कुमार की असली पहचान 1965 में फिल्म शहीद से बनी जिसमें उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह की भूमिका निभाई। इस फिल्म ने उन्हें नेशनल अवार्ड दिलाया और उन्होंने पुरस्कार राशि भगत सिंह के परिवार को दान कर दी। शहीद ने मनोज कुमार को देशभक्ति के प्रतीक के रूप में स्थापित किया और यहीं से उन्हें भारत कुमार का नाम मिला।

1967 में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नारे जय जवान जय किसान से प्रेरित होकर मनोज कुमार ने अपनी पहली डायरेक्टेड फिल्म उपकार बनाई। इस फिल्म में उन्होंने एक किसान और सैनिक की दोहरी भूमिका निभाई। उपकार ने कई फिल्मफेयर अवार्ड जीते जिनमें बेस्ट फिल्म, बेस्ट डायरेक्टर और बेस्ट स्टोरी शामिल है। फिल्म का गाना मेरे देश की धरती आज भी देशभक्ति का प्रतीक है। 1974 में मनोज कुमार ने अपनी सबसे बड़ी हिट फिल्म रोटी कपड़ा और मकान को डायरेक्ट किया और इसमें एक्ट भी किया। इस फिल्म में शशि कपूर, अमिताभ बच्चन, जीनत अमान और मौसमी चटर्जी जैसे सितारे थे।

यह फिल्म उस साल की सबसे बड़ी हिट थी और इसे ब्लॉकबस्टर फिल्म का दर्जा मिला। मनोज कुमार ने एक्टिंग के साथ-साथ डायरेक्शन, राइटिंग और एडिटिंग में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। उनकी डायरेक्टेड फिल्मों में उपकार, रोटी, कपड़ा और मकान और क्रांति शामिल हैं। क्रांति में उन्होंने अपने आदर्श अभिनेता दिलीप कुमार को कास्ट किया जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित थी और यह फिल्म भी एक ब्लॉकबस्टर रही।

1981 में क्रांति की अपार सफलता के बाद मनोज कुमार के करियर में गिरावट शुरू हुई। उनकी बाद की फिल्में जैसे कलयुग और रामायण, संतोष, क्लर्क और देशवासी जैसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल रही। 1995 में मैदान-ए-जंग उनकी आखिरी फिल्म थी। जिसके बाद उन्होंने एक्टिंग से सन्यास ले लिया। इतना ही नहीं उनके शानदार फिल्मी सफर को देखते हुए 1992 में उन्हें पद्मश्री अवार्ड से भी सम्मानित किया गया।

जबकि 2016 में उन्हें दादा साहब फाल्के अवार्ड से भी नवाजा गया था। मनोज कुमार को हिंदी सिनेमा के सबसे महान और सफल अभिनेताओं में से एक माना जाता है। उनकी फिल्मों ने न केवल मनोरंजन किया बल्कि देशभक्ति, सामाजिक सुधार और सांस्कृतिक मूल्यों को भी बढ़ावा दिया। भारत कुमार के रूप में उनकी पहचान और योगदान हमेशा भारतीय सिनेमा के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित रहेगा।

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