बॉलीवुड की वो खलनायिका जिसने पर्दे पर आते हीरोइनों की जिंदगी को नर्क बना दिया। कभी जुल्मी सास बनकर बहू पर जुल्म ढाए तो कभी रामायण की मंत्रा बन राम सीता को वनवास दिलवा दिया। नाम था ललिता पवार। एक ऐसा नाम जिसे ना किसी परिचय की जरूरत है और ना ही किसी पहचान के सहारे की।
આજે भले ही हिंदी फिल्मों की एक खलनायिका हमारी मौजूद है ना लेकिन ललिता पवार को हमेशा दमदार बीच अभिनय करने के लिए याद है. अपने किरदारों में ललिता पवार ही जान फुंकती थी कि लोग उनसे नफरत को मजबूर हो जाता है।
बद्दुआएं देने लगते थे। और फिर वह ऐसी बीमारी की शिकार हुई कि एक दिन उन्हें भी लगने लगा कि शायद यह उन्हीं बद्दुआओं का असर है। सगी छोटी बहन ने पति छीन लिया। आखिरी वक्त में बेटे ने अकेला छोड़ दिया और जब मौत आई तब उनके आसपास कोई नहीं था। तीन दिन तक ललिता पवार का शव उनके घर में सड़ता रहा।
ललिता पवार की जिंदगी के इसी पहलू के बारे में हम सबसे पहले तो आपको बता दें कि ललिता पवार का असल नाम अंबा लक्ष्मण राव शगुन था। लेकिन फिल्मों में आने के बाद वह ललिता पवार के नाम से मशहूर हुई। ललिता पवार के जन्म की कहानी भी किसी फिल्म के सीन से कम नहीं। बताया जाता है कि जब ललिता का जन्म होने वाला था तब एक दिन उनकी मां मंदिर गई थी।
वहीं उन्हें लेबर पेन शुरू हो गए। लेकिन जब तक उन्हें अस्पताल लेकर जाते उन्होंने वहीं बच्ची को जन्म दे दिया। इसी वजह से उनका नाम अंबा रखा गया। साल 1928 में ललिता ने 9 साल की उम्र में एक्टिंग की दुनिया में कदम रखे थे। उनकी पहली फिल्म राजा हरिश्चंद्र थी। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई यादगार किरदार निभाए। वह अपने दौर की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली एक्ट्रेस थी। लेकिन एक हादसे ने उनकी जिंदगी बदल दी। फिल्म लड़ाई आजादी के एक सीन की शूटिंग के दौरान भगवान दादा को ललिता पवार को थप्पड़ मारना था।
लेकिन भगवान दादा का यह थप्पड़ इतनी जोर से पड़ा कि ललिता पवार बेहोश हो गई। उनके कान से बहने लगा। उन्हें तुरंत ही अस्पताल ले जाया गया। लेकिन गलत इलाज के कारण उनकी हालत बिगड़ गई।
ललिता पवार के शरीर के आधे हिस्से में लकवा मार गया जिसके कारण उनकी एक आंख भी हमेशा के लिए सिकुड़ गई। हालांकि बाद में ललिता पवार की यही तिरछी आंख उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गई।
वैसे ललिता पवार की निजी जिंदगी भी दुखों से भरी रही। ललिता की शादीशुदा जिंदगी तब बिखर गई जब उन्हें पता चला कि उनकी खुद की छोटी बहन का उनके पति गणपतराव पवार के साथ चक्कर चल रहा था। इस अफेयर का खुलासा होते ही ललिता को गहरा सदमा लगा। लेकिन अपनी सेल्फ रिस्पेक्ट को देखते हुए उन्होंने अपने पति को तलाक दे दिया।
बाद में ललिता की जिंदगी में फिल्म मेकर राजकुमार गुप्ता आए जिन्होंने उनके टूटे दिल पर मरहम लगाने का काम किया। बाद में दोनों ने शादी कर घर बसा लिया। सात दशक तक फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाली ललिता पर निधन ने भी रहम नहीं किया। आखिरी दिनों में ललिता पवार को मुंह का बीमारी हो गया था।
कहा जाता है कि ललिता को अक्सर ऐसा लगता था कि उन्हें यह बीमारी फिल्मों में विलेन के रोल करने पर मिली बद्दुआओं के चलते हुई। उन्होंने 24 फरवरी 1998 को पुणे में दम तोड़ दिया। अंतिम समय में उनका परिवार उनके साथ नहीं था। हैरानी की बात तो यह है कि 3 दिन तक ललिता का देह उनके घर में सड़ता रहा। बेटों और परिवार को उनके निधन की जानकारी भी बेहद देर से मिली थी। जिसके बाद पूरा परिवार पुणे पहुंचा और ललिता पवार का अंतिम संस्कार किया गया।
