इसी बीच एक बड़ी खबर आपको बता दें। इजराइल पर ईरान ने से हमला किया है और इसकी
कोरम शहर मिसाइलों से हमले ईरान ने इजराइल पर किए हैं। एक वॉर हेड से भी हमला किया गया है। हस्सी छोटे बम दिखाई दिए हैं। ये आसमान में किस तरीके से यह आतिशबाजी नहीं है और हैं जो कि नजर आ रही हैं। अली लाल जाने की की पुष्टि हो गई है।
बड़ी खबर बता रहे हैं आपको। को इसी बीच अली जाने की का दावा इजराइल लगातार कर रहा था। अब उनकी की पुष्टि भी हो चुकी है। ईरान ने अली लारे जाने की की पुष्टि कर दी है।
अली राजानी की से ईरान को बड़ा झटका लगा है क्योंकि ये बहुत बड़े कमांडर थे और इनका काफी ज्यादा इनवॉल्वमेंट था पॉलिटिक्स ईरान की जितनी भी रही है राजनीति उसमें और इनके के बाद ईरान को एक काफी बड़ा झटका लगा है। इस काफी कम से दावा कर रहा था। तो वहीं आपको यह भी बता दें कि अली लारी जानी के बेटे की भी मौत की पुष्टि हो गई है।
इजराइली हमलों में अली लारी जानी के मारे जाने की खबर तो है ही साथ ही उनके बेटे की भी मौत होने की पुष्टि की गई है। इजराइली हमलों में अली लारी जानी मारे गए हैं जो कि काफी ज्यादा अहम चेहरा ईरान के लिए रहा रहे हैं और उनके बेटे के भी मारे जाने की अब पुष्टि ईरान की तरफ से की जा चुकी है।
उनके एक्स अकाउंट से पोस्ट करके यह पुष्टि की गई है। तो अली लारी जानी के मौत के बाद उनके एक्स अकाउंट से पोस्ट किया गया। ईरानी के लोगों को संबोधित करते हुए यह पोस्ट किया गया। ईश्वर का एक सेवक अपने रब से जा मिला है। पोस्ट में यह कहा गया है। तो ये बड़ी खबर बता रहे हैं आपको। एक और अली लाली जानी के मौत के बाद पोस्ट किया गया है। उनके ही अकाउंट से पोस्ट किया गया है। अकाउंट से पोस्ट करके शोक जताया गया है।
इससे पुष्टि होती है कि अली जानी की मौत हो गई है और उनके बेटे की भी मौत की जानकारी मिली है। ईरान के लोगों को संबोधित करते हुए पोस्ट किया गया कि ईश्वर का एक सेवक अपने रब से जा मिला है। यह एक बहुत बड़ा झटका और लॉस ईरान के लिए है। अली लारी जानी का जाना क्योंकि वह काफी ज्यादा अहम फैसले लिया करते थे और यह एक बड़ा झटका ईरान के लिए इजराइल काफी समय से यह दावा कर रहा था ईरान के इजराइल के हमलों की तरफ से हो गई है।
तो एक और बड़ी खबर सामने आ रही है। ईरान की मीडिया ने यह पुष्टि की है। गुलाम रजा सुलेमानी की हत्या की पुष्टि की है। एक और मौत की पुष्टि की जा चुकी है। ईरानी मीडिया ने यह पुष्टि की है। सुलेमानी की मौत की। ईरानी बसीज फोर्स के चीफ रहे हैं गुलाम रजा सुलेमानी जिनकी मृत्यु हो गई है और इनकी मृत्यु की पुष्टि ईरानी मीडिया की तरफ से की गई है। तो इजराइली हमलों में लगातार एक के बाद एक कई चीफ और कमांडर्स ढेर हो रहे हैं।
एक और बड़ा झटका ईरान के लिए। तो इजराइल ने ईरानी मिसाइलों को रोका है। ईरानी को से पहले इंटरसेप्ट कर दिया है। आखिरी वक्त में यह हमला कैसे नाकाम हुआ? इसकी तस्वीरें आप देख रहे हैं। एयर डिफेंस ने हवा में ही मिसाइल को निशाना बनाते हुए नष्ट कर दिया। तो ये तस्वीरें आप देख रहे हैं। इजराइल की एयर डिफेंस सिस्टम भी लगातार काम पर है। और यह तस्वीर जो है इजराइल से जहां इजराइल में हवा में ही ईरान के को नष्ट कर दिया गया है। इंटरसेप्ट करते हुए इजराइल ने ईरान के मिसाइलों को नष्ट कर दिया है। तो मिडिल ईस्ट में जारी के बीच कई देशों को भारत से उम्मीद है।
नेटो देशों में शामिल देश फिनलैंड के राष्ट्रपति एलेग्जेंडर सब का मानना है कि भारत उन देशों में से एक भी हो सकता है जो कि अमेरिका, इजराइल और ईरान के युद्ध में शांति स्थापित करने में मदद कर सकता है। यानी भारत ईरान, अमेरिका में सीज फायर करा सकता है। देखिए इस रिपोर्ट को। मिडिल ईस्ट में तबाही और मिसाइल हमलों के बीच भारत का शिवालिक और नंदा देवी एलपीजी लेकर हॉर्मूज के रास्ते भारत पहुंचे तो पूरी दुनिया ने भारत का दमखम देख लिया। दमखम भी ऐसा कि ईरान अमेरिका जंग रुकवाने के लिए नाटो देश भारत की तरफ उम्मीद से देखने लगे। जब ट्रंप ईरान पर कब्जे का रास्ता तलाश रहे हैं तब नाटो देश ग्लोबल टेंशन को खत्म करने के लिए भारत से मध्यस्थता चाह रहे हैं। ईरान, इजराइल और अमेरिका की जंग में भारत ने अपना रुख साफ कर दिया था।
भारत ने सभी पक्षों को संयम बरतने, संवाद और शांति के रास्ते पर चलने की सलाह दी थी। लेकिन ट्रंप की सनक समाधान नहीं ईरान का सरेंडर चाहती है। ईरान भी झुकने को तैयार नहीं है। इसलिए हर दिन जंग भीषण होती जा रही है। सवाल यह है कि जंग रुकेगी कैसे? क्या भारत मिडिल ईस्ट की बर्बादी को रोक सकता है? नाटो देश फिनलैंड के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर स्टब का मानना है कि भारत उन देशों में से एक हो सकता है जो अमेरिका, इजराइल और ईरान के युद्ध में शांति स्थापित करने में मदद कर सकता है। यानी भारत ईरान, अमेरिका में करा सकता है। एक इंटरव्यू में राष्ट्रपति एलेक्जेंडर ने कहा दुनिया को पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को खत्म कराने की कोशिश करनी चाहिए। हालिया समय में विदेश मंत्री एस जयशंकर की ईरानी नेताओं से बातचीत हुई है। ऐसे में मुझे लगता है कि भारत सच में इसमें शामिल हो सकता है तो यह काफी बेहतर होगा।
मुझे लगता है कि यह हो सकता है क्योंकि नई दिल्ली पर दोनों पक्षों का भरोसा है। फिनलैंड के राष्ट्रपति का बयान ऐसे समय में सामने आया है जब ट्रंप के होरमुज पर कब्जे वाले फरमान को नाटो देश ठुकरा चुके हैं। ट्रंप नाटो को टकराव में शामिल करना चाहते हैं तो नाटो शांति चाहता है। इसलिए नाटो उस देश से उम्मीद कर रहा है जिसका मूल मंत्र ही वसुधैव कुटुंबकम है। लेकिन सवाल जस का तस है। क्या दिल्ली मध्य पूर्व में सुलगते को ठंडा कर सकती है? भारत के अमेरिका के साथ विशेष सामरिक संबंध है।
वहीं ईरान के साथ सदियों पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध। भारत हमेशा डिप्लोमेसी को सुप्रीम मानता है। भारत के लिए दोनों पक्षों से बात करने का रास्ता खुला है। सीस फायर के समझौते में सबसे पहले फंसे हुए नागरिकों और व्यापारिक जहाजों को निकालने का प्रस्ताव भारत दोनों पक्षों के सामने रख सकता है। हालांकि 18 दिन की जंग के बाद अमेरिका और ईरान दोनों ही समझौते के मूड में नहीं दिख रहे। लेकिन अगर दिल्ली से टकराव रोकने का प्रस्ताव जाएगा तो उम्मीद है बारूदी बारिश रुक जाएगी। भारत ईरान और यूएस के बीच में मध्यस्थता कर सकता है क्योंकि भारत की डिप्लोमेसी बहुत बैलेंस है।
क्रेडेंशियल है और एक न्यूट्रल इमेज है। ईरान और भारत के बहुत ही अच्छे संबंध है। व्यापार और ऊर्जा में। यूएस के साथ भारत के रणनीति, रक्षा और व्यापार में अच्छे संबंध है। जंग रुकवाने के पक्ष में रूस भी नजर आ रहा है। रूस का कहना है इन्होंने यह सोचकर शुरू की थी कि 24 घंटे में जीत जाएंगे। अब वह समझ गए हैं कि उन्होंने बड़ी गलती कर दी। हम चाहते हैं कि दुश्मनी खत्म करने के लिए बातचीत के टेबल पर लौटना चाहिए अगर विश्वसनीयता और भरोसा बाकी है।
ईरान इजराइल की जंग में हजारों लोग मारे जा चुके हैं। बुनियादी ढांचा मिट्टी में मिल चुका है। गैस तेल की ग्लोबल महामारी हर दरवाजे पर दस्तक दे रही है। ऐसे में जंग रोकने का प्रयास नई दिल्ली से हो या फिर मॉस्को से जंग रोकनी चाहिए।
