हैदराबाद और कश्मीर में लोग ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खमनाई की का शोक मना रहे हैं। औरतें बिलक-बिलख कर उसे याद कर रही हैं।
एक ऐसे तानाशाह की मौत का शोक जो औरतों का ही सबसे बड़ा दुश्मन था। जहां ईरान में औरतें खुश होकर डांस कर रही हैं। हिजाब जला रही हैं। वहीं हमारे देश में कुछ लोग खासकर औरतें खुश होने की जगह खमिनानई को याद क्यों कर रही हैं? खमेई और उसकी सरकार ने किस हद तक ईरान की औरतों को टॉर्चर किया है।
समझने के लिए वीडियो को एंड तक जरूर देखना। 2022 में महसा अमीनी की ने सिर्फ ईरान में प्रोटेस्ट ही नहीं जगाए बल्कि दुनिया भर में एक बड़ा वुमस राइट मूवमेंट शुरू किया था। जिसे लोग वुमेन लाइफ फ्रीडम के नाम से याद करते हैं। महसा को तेहरान में मोरालिटी पुलिस ने अरेस्ट किया था क्योंकि उन्होंने एलेजिडली हिजाब इंप्रॉप्ली पहना था। उन्हें री एजुकेशन के लिए ले जाया गया और तीन दिन बाद ही वह कस्टडी में डेड पाई गई।
जिसे ऑफिशियली बताया गया लेकिन लोगों ने टॉर्चर और अब्यूज का एलगेशन लगाया। एमनेस्टी इंटरनेशनल की एक डिटेल्ड इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट के मुताबिक ईरानियन सिक्योरिटी फोर्सेस ने प्रोटेस्टर्स को डराने और तोड़ने के लिए वायलेंस का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट का टाइटल ही है द वायलेंटली आर्मी।
इसमें डॉक्यूमेंटेड केसेस बताते हैं कि कैसे डिटेंशन के दौरान महिलाओं, पुरुषों और बच्चों तक के साथ असॉल्ट किया गया। 12 साल तक के बच्चों को भी ब्रूटली इसका शिकार बनाया गया। रिपोर्ट के हिसाब से रेवोल्यूशनरी गार्ड्स, बसेज, मिलिशिया और इंटेलिजेंस ऑफिशियल्स ने आर्बिटरी अरेस्ट के बाद लोगों को कस्टडी में रखा।
जहां उनके साथ फिजिकल टॉर्चर के साथ-साथ सेक्सुअल टॉर्चर भी किया गया। वुमेन और गर्ल्स के साथ यहां तक कि मेन और बॉयज के साथ भी असॉल्ट्स की रिपोर्ट सामने आई। यह सिर्फ फिजिकल अटैक्स नहीं थे। यह एक साइकोलॉजिकल वॉरफेयर था। विक्टिम्स ने बताया कि उन्हें इलेक्ट्रिक शॉक्स दिए गए। मारा पीटा गया। कपड़े उतरवाकर बेइज्जती की गई और असॉल्ट को एक लेसन की तरह यूज किया गया ताकि प्रोटेस्ट करने की हिम्मत खत्म हो जाए। सबसे डिस्टर्बिंग बात यह है कि इन केसेस में अकाउंटेबिलिटी ऑलमोस्ट जीरो थी। ईरानियन जुडिशरी ने इन एलगेशंस पर इंडिपेंडेंट इन्वेस्टिगेशन तक नहीं की। कई सर्वाइवर्स ने जब कंप्लेंट करने की कोशिश की तो उन्हें धमकाया गया या चुप करा दिया गया।
यानी जो सिस्टम प्रोटेक्ट करना चाहिए था वही सिस्टम रिप्रेशन का भी हिस्सा बनगया। खमने की होने से पहले तक पूरे ईरान में वुमेन, यूथ और सिविल राइट सपोर्टर्स ने सालों से चल रहे ऑपरेशन, स्ट्रिक्ट ड्रेस कोड और जेंडर डिस्क्रिमिनेशन के खिलाफ प्रोटेस्ट किए थे। वुमेन अब सिनेमा से लेकर पब्लिक स्ट्रीट्स तक अपनी [संगीत] प्रेजेंस और राइट्स की डिमांड दिखा रही हैं। वुमेन सिर्फ हिजाब रूल्स के खिलाफ नहीं बल्कि अपनी चॉइससेस और ऑटोनोमी के लिए पीसफुली सिविल डिसओबिडियंस कर रही हैं। ड्रेसेस के नियमों को ओपनली चैलेंज करते हुए। लेकिन ईरान की अथॉरिटीज ने भी क्रैकडाउन कंटिन्यू रखे थे। एमनेस्टी और ह्यूमन राइट ग्रुप्स के मुताबिक सिक्योरिटी फोर्सेस ने कंपलसरी वेलिंग लॉस को इनफोर्स करने के लिए नूर प्लान और अदर मेजर्स को अग्रेसिवली यूज किया। वुमेन के अगेंस्ट फिजिकल वायलेंस, अरेस्ट, कार कन्नफेसिकेशन और और पब्लिकली डिस्क्रिमिनेटरी प्रैक्टिससेस को बढ़ाया। डेथ पेनल्टी का इस्तेमाल भी पॉलिटिकल डिसेंट कोर्ट दबाने के लिए हुआ।
जहां 100्स लोग प्रोटेस्ट से जुड़ी एक्टिविटीज के लिए अनफेयर ट्रायल्स के बाद एग्जीक्यूटेड या डेथ रोपर थे। ईरानियन वुमेन के सफर ने यह दिखाया है कि सोसाइटी में एक क्वाइट रेवोल्यूशन चल रहा था। जहां वुमेन सिर्फ लॉस को ब्रेक नहीं कर रही थी बल्कि उन ऑप्रेसिव नॉर्म्स को ओपनली रिजेक्ट कर रही थी। अब फाइनली कमई की डेथ के बाद ईरानियन वुमेन आर फीलिंग फ्री। शायद अब उन्हें और ऑपरेशन से आजादी मिल पाए। अब वापस से बात करते हैं इंडिया की।
श्रीनगर और कुछ शिया डोमिनेटेड एरियाज में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। जहां उन्होंने मॉर्निंग प्रोसेशन निकाली। ब्लैक फ्लैग्स लहराए और स्लोगंस भी लगाए। प्रोटेस्टर्स का कहना था कि खमने सिर्फ एक पॉलिटिकल लीडर नहीं बल्कि उनके लिए एक रिलीजियस अथॉरिटी भी थे। जिनका ग्लोबल शिया कम्युनिटी में काफी प्रभाव था।
इस वजह से उनकी की खबर ने एक इमोशनल रिएक्शन ट्रिगर कर दिया है। अब आप बताओ कि ऐसा इंसान जिसने ना जाने कितने लोगों को किया। खासकर औरतों को उसकी पर आंसू बहाना कहां तक ठीक है।
