तेहरान में इतनी तबाही के बाद भी जिंदा है खामेनेई?

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक खास तरह का सस्पेंस फैल रहा है। लोग लिख रहे हैं अली खामने की डेड बॉडी अभी तक नहीं मिली। जनाजा नहीं निकला। की कोई फोटो नहीं आई। यह सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के सुप्रीम लीडर अभी भी जिंदा हैं? क्या इजराइयली हमले के बाद रूसी या चीनी खुफिया एजेंसियों ने उन्हें बचाकर छिपा दिया? क्या यह सब एक बड़ा प्लान है? दरअसल अयातुल्लाह अली खामिनी 28 फरवरी 2026 को तेहरान में अमेरिका इजराइल के संयुक्त हवाई हमले में मारे गए। उनकी मौत की पुष्टि ईरानी स्टेट मीडिया सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल और खुद ईरानी सरकार ने की।

फिर भी क्यों यह थ्योरी चल रही है? अब आपको पूरा घटनाक्रम समझाते हैं। सबसे पहले की टाइमलाइन देखें। 28 फरवरी 2026 को इजराइली एयरफोर्स और अमेरिकी सेना ने ईरान के कई हाई प्रोफाइल टारगेट्स पर प्रसीजन स्ट्राइक की यानी कि एकदम सटीक हमला। खामने का कंपाउंड जो राजधानी तेहरान में था और रिवोल्यूशनरी गार्ड की कड़ी सुरक्षा में था। वह हमले की पहली लहर में ही निशाना बन गया। इजरलीय खुफिया एजेंसी मोसाथ और यूनिट 8200 ने तेहरान के ट्रैफिक कैमरों को किया।

सिक्योरिटी गार्ड्स की मूवमेंट को भी ट्रैक किया और सेटेलाइट इमेजरी द्वारा डाटा इकट्ठा कर खामनाई की लोकेशन पिनपॉइंट की। अमेरिकी ने ईरानी कम्युनिकेशंस को जाम कर दिया जिससे कोई वार्निंग नहीं पहुंच सकी। आईडीएफ ने बाद में वीडियो भी जारी किया जिसमें खामई के अंडरग्राउंड बंकर पर 50 से ज्यादा जेट्स के हमले दिखाए गए। ईरानी स्टेट टीवी ने 1 मार्च को आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि 86 साल के खामनायक उनकी पत्नी, एक बेटे और कई टॉप अधिकारी उनके साथ मारे गए और 40 दिन का शोक घोषित किया गया।

अब सवाल उठता है कि डेड बॉडी कहां है? जनाजा क्यों टला? तथ्य बताते हैं कि यह सस्पेंस की वजह से है। अमेरिका इजराइल के हमले अभी भी जारी हैं। ईरान में हर दिन गिर रही है। सड़कें असुरक्षित हैं। ईरान की मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी अथॉरिटी खामनाई के जनाजे की तैयारी शुक्रवार रात यानी 6 मार्च को करना चाहती थी। लेकिन अमेरिकी इजराइली हमलों की तीव्रता के चलते उसे टाल दिया गया। बॉडी को सुरक्षित जगह पर रखा गया है ताकि कोई और हमला ना हो। की फोटो ना जारी करने का कारण भी यही है। ईरान की सरकार खामने की को सर्वोच्च बलिदान मानती है।

जाहिर है उनका जनाजा भी पूरे सम्मान और सार्वजनिक प्रदर्शन के साथ निकल निकालना चाहती है। लेकिन इससे पहले ईरानी सरकार सुरक्षा का पूरा ध्यान रख रही है। इसी तरह जब 1989 में खामने के पूर्ववर्ती अयात्तुला खुमेनी की मौत के बाद भी शुरुआती दिनों में पूरी डिटेल्स नहीं दी गई थी। यह कोई नई बात नहीं है। फिर रूसी और चीनी एजेंसी वाली थ्योरी कहां से आई? यह सोशल मीडिया पर वायरल हो रही अफवाहओं से निकली है। कुछ यूज़र्स का दावा है कि एसवीआर यानी रूसी खुफिया एजेंसी या एमएसएस चीनी खुफिया एजेंसी ने खामनाई को निकालकर किसी सुरक्षित जगह शायद मॉस्को या बीजिंग के पास छिपा दिया। लेकिन कोई भी विश्वसनीय सबूत नहीं है। रूस और चीन ने ईरान का समर्थन किया है।

दोनों देशों ने यूएन में अमेरिका इजराइल की निंदा की। लेकिन खामनाई को बचाने वाली कोई रिपोर्ट नहीं आई। अमेरिका और इजराइल के सोर्सेज स्पष्ट बताते हैं कि हमला सीआईए की इंटेलिजेंस पर आधारित था और खामई उसी दिन मारे गए। अगर कोई बचाव ऑपरेशन होता तो ईरान खुद इसे प्रचारित करता।

लेकिन उल्टा उन्होंने शोक मनाया। असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने उत्तरा असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया शुरू की। खामनानई के बेटे मौजूमा खामनई का नाम उत्तराधिकारी के रूप में चर्चा में है।

जो इस बात का संकेत है कि खामनाई अब जिंदा नहीं बचे। अगर वह जिंदा होते तो खुद वीडियो जारी कर सबको चुप करा देते। जैसा उन्होंने 1981 के हमले के बाद किया था। दरअसल 27 जून 1981 को उन पर एक मस्जिद में हमला हुआ था। जिस समय वे ईरान के राष्ट्रपति थे। उस हमले में खामने के दाहिने हाथ और फेफड़ों में गंभीर चोटें आई थी। तब उन्होंने वीडियो जारी कर अपने जिंदा होने का सबूत दिया था।

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