ख़ामेनेई को अब तक दफ़नाया क्यों नहीं गया?

1 मार्च 2026 को एक बड़ी खबर आई। ईरान के तत्कालीन सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामनी की इजराइली अमेरिकी में हो गई है। जब हम यह वीडियो शूट कर रहे हैं तब 17 मार्च 2026 है। यानी इस खबर को आए 16 दिन बीत चुके हैं। मगर अब तक अली खमेई का अंतिम संस्कार या कफ़न दफन नहीं किया गया है। इस बीच 13 मार्च को ईरान की ओर से एक वीडियो जारी किया गया। जिसने कुछ अटकनें बढ़ा दी।

वीडियो का टाइटल था खामेनी इज बैक। इसे देखकर अली हुसैनी खमेई के कई सपोर्टर्स और फॉलोअर्स के मन में यह ख्याल आया कि क्या उनके रहबर अब भी जिंदा है? ये एक बड़ा सवाल था जो और बड़ा इसलिए हो गया क्योंकि फिर एक और सवाल लोगों के मन में आने लगा।

सवाल ये कि अगर सचमुच आयातुल्लाह अली खमैनी की मौत हो चुकी है तो फिर उनकी नमाज़ जनाजा अब तक क्यों नहीं हुई? उन्हें अब तक दफन क्यों नहीं किया गया? उनकी डेड बॉडी यानी जनाजा आखिर है कहां? इन सवालों के जवाब टटोलने के लिए हमने कुछ खबरें खगा ली। जिसके बाद कुछ जानकारियां, कुछ पैटर्न्स और कुछ लॉजिक सामने आए हैं। उन पर जाने से पहले आपको एक खबर की हेडलाइन दिखाते हैं जो आपकी स्क्रीन पर है इस वक्त। लिखा है यूएस इजराइली जारी है। ईरान ने खमेई का अंतिम संस्कार टाला। ये बीबीसी की एक रिपोर्ट है जिसे डेविड ग्रिटन ने पब्लिश किया।

तारीख 4 मार्च 2026 की है। इससे आपको थोड़ा बहुत अंदाजा लग सकता है कि इजराइली और अमेरिकी लगातार जारी बमबारी के चलते अली खमेई के फ्यूनरल सेरेमनी पोस्टपोन कर दी गई है। लेकिन सिर्फ यही पूरी कहानी नहीं है। एक वजह इससे भी बड़ी है। उस वजह को समझने के लिए लगभग 37 साल पीछे चलना होगा। ये 6 जून 1989 की तारीख थी। ईरान के पहले सुप्रीम लीडर रूहल्ला खुमैनी का निधन हुए तीन दिन बीत चुके थे। 3 जून 1989 को उनके फौत होने के बाद पूरे मुल्क में गम का माहौल था। लाखों लोग अपने रहबर का आखिरी दीदार करना चाहते थे।

सो लोगों की ख्वाहिश का ख्याल रखते हुए ईरान सरकार ने तीन दिनों तक खुमैनी का जनाजा आम लोगों के देखने के लिए रख दिया। उनकी बॉडी तेहरान के मुसल्ले यानी प्रार्थना मैदान में रखी गई। उस वक्त क्या हुआ उसका बयान टाइम मैगजीन के एक कोस्पोंडेंट ने किया। जिन्होंने यह सब अपनी आंखों से देखा था। वह बताते हैं आयतुल्लाह रुल्लाह खमैनी के जनाजे ने उनके सख्त समर्थकों के बीच भावनाओं का एक उफान पैदा कर दिया था जो पश्चिमी दुनिया के लोगों की समझ से परित था। नजारा कुछ यूं था कि जितनी दूर तक देखते उतनी दूर तक लोगों की भीड़ ही भीड़ नजर आ रही थी।

द टाइम्स में छपा एक आर्टिकल बताता है कि यह उस दिन का सबसे चौंकाने वाला पल था जब आयतुल्लाह खुमैनी का जनाजा एक हेलीकॉप्टर से नीचे उतारा गया। दर्द में डूबे रोते लोग अचानक उस ओर दौड़ पड़े। उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर यानी आईआरजीसी के सैनिकों से ताबूत छीन लिया और उसे भीड़ के बीच उठा ले गए। आईआरजीसी ने स्थिति दोबारा काबू करने की कोशिश की लेकिन भीड़ इस बीच खुमैनी के शव को छूने, चूमने और पकड़ने लगी। लोग उनके कफ़न को टुकड़ों में फाड़ कर अपने साथ ले जा रहे थे। उनके लिए यह पवित्र निशानियां थी। उस दिन वहां मौके पर मौजूद इकलौते विदेशी फोटो पत्रकार थे। एरिक बोवे वह उस दिन को इस तरह बताते हैं। लोग दीवानों की तरह दौड़ रहे थे।

सब लोग खुनी के सबसे करीब जाना चाहते थे। सबसे करीब होना चाहते थे। इसलिए वो दौड़ पड़े और ताबूत को उठा ले गए। फिर ताबूत नीचे गिर गया और मैंने खुनी का शव देखा। इस दौरान खुमैनी के बेटे अहमद खुमैनी डर और सदमे के कारण जमीन पर गिर पड़े। जब आईआरजीसी और सुरक्षाकर्मियों ने हालात को संभालने की कोशिश की। ताबूत को वापस हेलीकॉप्टर में लेकर चढ़ने की कोशिश कर रहे थे। तो हेलीकॉप्टर के लैंडिंग स्किट से कई श्रद्धालु लटक गए और उसके पीछे-पीछे दौड़ते रहे। बोवे बताते हैं कि उनकी भावनाएं बिल्कुल असली थी। वो उस एक शख्स से मोहब्बत करते थे। इतने लोग 10 लाख से भी ज्यादा। लोग गर्मी में रो रहे थे। बेहोश हो रहे थे। काले कपड़ों में पसीने से तर-बतर थे। वो एक अलग दिन था।

यह एक अलग दिन है। तभी ईरान के सुप्रीम लीडर का निधन स्वास्थ्य कारणों से हुआ था। लेकिन अब उनके सुप्रीम लीडर आया अली खामेनी की हत्या की गई है। यह मुल्क में जंग का आलम है। ईरान इस वक्त अपनी सबसे भारी हवाई बमबारी का सामना कर रहा है। जिसे देखते हुए अंतिम संस्कार का सरकारी आयोजन टाल दिया गया।

ईरानी अधिकारी इस बात का आकलन कर रहे हैं कि जंग के बीच खमेई का जनाजा किस तरह सरकारी सेरेमनी के साथ दफनाया जाए। हालांकि का खतरा बने रहने के बावजूद 6 मार्च को ईरान की सरकारी टीवी ने यह दिखाया कि कामगार खामनई के ताबूत के लिए एक बड़ा मंच तैयार कर रहे हैं। द टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस मंच में कांच का डिस्प्ले कैबिनेट लगाया जा रहा था।

मगर अब उस रिपोर्ट को भी लगभग 11 दिन बीत चुके हैं। उसके बाद कोई भी अपडेट नहीं आई। लेकिन इससे एक बात साफ है ईरान सरकार अपने दिवंगत सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खमैनी का भी अंतिम संस्कार उसी तरह करना चाहती है जिस तरह पहले सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह रुल्लाह खुमैनी का किया गया था।

मगर चिंता यही है कि कहीं वैसी ही भीड़ और मैनेजमेंट में वैसी ही चुनौतियां इस बार खामैनी के अंतिम संस्कार में भी ना सामने आ जाए। आईआरजीसी और सरकार इस बात से भी चिंतित हैं कि अगर ऐसी बमबारी के बीच इतनी बड़ी तादाद में एक जगह लोग एकजुट हो गए, इकट्ठे हो गए तो लोगों की जान का भी भारी खतरा होगा।

साथ ही इस वक्त ईरानी शासन देश में बाहरी हमलों से निपटने में भी पूरी तरह फोकस्ड है। ऐसे में एक इतने बड़े आयोजन को सही तरह से संभाल पाना प्रैक्टिकल नहीं लगता। यही वजह है कि ईरान से आयतुल्लाह अली खमैनई के जनाजे की या उनके कफ़न दफन की कोई भी तस्वीर या खबर अब तक नहीं आई है। क्या आगे ईरान सरकार इसी स्तर का एक बड़ा आयोजन खामने के लिए करेगी जिससे उनके जनाजे तक ईरान की आवाम पहुंच सके या फिर गुजरते दिनों के बीच एक शांत और एकांत भरे समारोह में उन्हें दफना दिया जाएगा।

या कहीं ऐसा तो नहीं कि खमे का अंतिम संस्कार पहले ही किया जा चुका है। लेकिन अभी तक कुछ बताया ना गया हो। इन सारे सवालों के जवाब तभी साफ होंगे जब ईरान सरकार इस पर कोई आधिकारिक जानकारी दे या कोई बयान जारी करे।

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