ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की तस्वीरें या वीडियो आपने देखी हो तो आपने एक बात जरूर गौर की होगी उनके हाथों में रत्नजित अंगूठियां होती हैं यह केवल एक फैशन नहीं है बल्कि शिया इस्लाम की गहरी आध्यात्मिक परंपरा है जो सदियों से धार्मिक और सामाजिक जीवन का हिस्सा रही है ईरान के मौजूदा सुप्रीम लीडर खामने अक्सर लाल नीले हरे और पीले रंग के पत्थरों वाली चांदी की अंगूठियां पहनते हैं उनकी आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूद तस्वीरों में भी यह अंगूठियां साफ दिखाई देती हैं.
दरअसल उनके पास कुछ खास रत्न हैं जिनमें पीला अकीक प्रमुख है यह पत्थर आमतौर पर चांदी में जड़ा होता है और उस पर तावीज़ जैसी नक्काशी होती है इसे रूहानी सुरक्षा और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ा जाता है फिरोजा यह नीले हरे रंग का एक पत्थर होता है जिसे बरकत और जीत का प्रतीक माना जाता है इसे पहनने वाले को मानसिक शांति सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य मिलने की मान्यता रहती है दूर-ए नफज़ यह एक पारदर्शी कॉटेज जैसा पत्थर होता है जो इराक से आता है इसे मन की शांति और आध्यात्मिक स्पष्टता से जोड़ा जाता है .
ईरान की इस्लामिक क्रांति के जनक आयातुल्ला खुमैनी भी अक्सर लाल यमनी अकीक पहनते थे यह पत्थर शिया समुदाय के लिए खास दर्जा रखता है और धार्मिक शुद्धता का प्रतीक माना जाता है यह चलन ईरान में सिर्फ शीर्ष नेतृत्व तक सीमित नहीं है बल्कि आम ईरानी नागरिक भी शादी ब्याह धार्मिक उत्सवों और आध्यात्मिक सुरक्षा के लिए इन पत्थरों का इस्तेमाल करते हैं यह एक रिवाज की तरह पीढ़ियों से चला आ रहा है फारसी में फिरोजा का अर्थ होता है जीत यही वजह है कि इस पत्थर को ईरान का राष्ट्रीय पत्थर भी माना जाता है इसे मस्जिदों दरगाहों और ऐतिहासिक इमारतों में भी इस्तेमाल में लिया जाता है जिसका खासतौर पर इस्तेमाल मस्जिदों की गुंबदों पर होता है नेशाबूर का फिरोजा काफी प्रसिद्ध है दरअसल विश्व प्रसिद्ध खदान यहीं से निकलने वाले पत्थर की चमक और गुणवत्ता काफी अतुलनीय मानी जाती है .
आपको बता दें 700 साल से अधिक पुरानी इन खदानों से निकले फिरोजे की कीमत प्रति कैरेट $10 से लेकर $3000 तक जाती है इसहान और कुंभ यह शहर हैं जहां अकीक हदीद और दूर नफस जैसे प्रसिद्ध पत्थर मिलते हैं यहां पारंपरिक बाजारों में कारीगर खुद पत्थर तराशते हैं और ग्राहक अपनी पसंद से अंगूठी बनवाते हैं आपको बता दें जनवरी 2020 में जब अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरानी कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी की निधन हुई तो उनकी पहचान उनके हाथ में पहनी हुई लाल अकीक की अंगूठी से की गई हमले के बाद जो तस्वीर सामने आई उसमें मलवे में पड़ा एक जला हुआ हाथ नजर आया जिसमें वही लाल अकीक की अंगूठी थी जिसे सुलेमानी सार्वजनिक मौके पर पहनते थे यह रत्न अब सुलेमानी विरासत का हिस्सा बन चुका है और कई लोग उन्हीं की तरह अंगूठी पहनने लगे हैं कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने इस अंगूठी का जिक्र किया जिससे उनकी पहचान पुख्ता हुई थी।
ईरान में रत्नजित अंगूठियों का चलन सिर्फ आभूषण नहीं बल्कि एक रूहानी और सांस्कृतिक प्रतीक है यह सिर्फ पत्थर नहीं बल्कि धार्मिक विश्वास का हिस्सा बन चुका है इसीलिए चाहे वहां के सुप्रीम लीडर हो या फिर कोई आम नागरिक यह सभी ईरानियों की पहचान बन चुका है।
