ईरान और इजराइल के बीच लगातार जारी है और संघर्ष में ईरान के पड़ोसी देशों की भूमिका भी कम नहीं है। अमेरिका ने सऊदी अरब, कुवैत, यूएई, बहरीन और क़तर जैसे देशों में मौजूद अपने सैन्य ठिकानों से ईरान पर लगातार हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने भी इन देशों को अपनी मिसाइलों से निशाना बनाया।
हालांकि इन देशों के पास मजबूत सैन्य ताकत और आधुनिक हैं। फिर भी इन्होंने अब तक ईरान के खिलाफ खुलकर में हिस्सा नहीं लिया है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि इन देशों की सैन्य ताकत कितनी है और आने वाले समय में यह संघर्ष में क्या भूमिका निभा सकते हैं। इन सभी जानकारियों को आज हम इस वीडियो के माध्यम से बताने वाले हैं। सऊदी अरब सेना की सबसे बड़ी ताकत उसकी एयरफोर्स मानी जाती है।
सऊदी एयरफोर्स के पास 300 से ज्यादा F15 स्ट्राइक ईगल और यूरो फाइटर टाइफून जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान हैं। इसके अलावा इसके पास एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम पीस शील्ड भी है। सऊदी अरब के पास मिसाइलें और एडवांस भी है। इसी के साथ सऊदी की थल सेना भी मजबूत मानी जाती है। इसके पास अमेरिकी अब्राहम टैंक और अत्याधुनिक बख्तरबंद गाड़ियां हैं। सऊदी अरब अपनी नौसेना को भी मजबूत कर रहा है ताकि वह अपने समुद्री मार्गों और ऊर्जा ठिकानों को सुरक्षित कर सके।
हालांकि इतने बड़े रक्षा बजट के बावजूद सऊदी अरब की सेना काफी हद तक विदेशी और तकनीक पर निर्भर रहती है। यह अपने ज्यादातर और सैन्य सामान अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस से लेता आ रहा है। कुवैत की सैन्य क्षमता खाड़ी देशों में कुवैत अपनी सैन्य ताकत तेजी से मजबूत कर रहा है। साल 2024 में कुवैत का रक्षा बजट 7.79 अरब डॉलर था।
कुवैत में 18 से 35 वर्ष के पुरुषों के लिए अनिवार्य सेना सेवा लागू है। इसकी थल सेना के पास लगभग 300 67 बैटल टैंक और एयरफोर्स में 131 विमान शामिल हैं। इनमें से 50 लड़ाकू विमान हैं। गल्फ क्षेत्र में बढ़ते ड्रोन और मिसाइल खतरों को देखते हुए कुवैत ने लगातार अपने एयर डिफेंस सिस्टम और वायु सेना को आधुनिक बना रखा है। इसके पास एफ8 हारनेट जैसे लड़ाकू विमान हैं।
रणनीतिक रूप से कुवैत, पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका और ब्रिटेन के साथ मजबूत रक्षा साझेदारी बनाए हुए हैं। जो ट्रेनिंग, टेक्नोलॉजी और सुरक्षा सहयोग में अहम भूमिका निभाती है। संयुक्त अरब अमीरात की सैन्य क्षमता, यूएई के पास 63,000 सैनिक हैं। यूएई के पास टेक्नोलॉजी और सटीक हमलों के हथियार मौजूद हैं। 2024 में यूएई का सालाना रक्षा बजट 22.75 अरब डॉलर का था। संयुक्त अरब अमीरात मध्य पूर्व की सबसे आधुनिक और मजबूत सैन्य ताकतों में से एक माना जाता है। ईरान ने संयुक्त अरब में दुबई पर कई हमले किए हैं। लेकिन यूएई के डिफेंस सिस्टम ने 95% मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया।
लेकिन यूएई के डिफेंस सिस्टम ने 95% को इंटरसेप्ट किया। एयरफोर्स यूएई की सबसे बड़ी ताकत है जिसमें F16 और मिराज 2000 जैसे लड़ाकू विमान शामिल हैं। इसके पास पेट्रियट और थार्ड जैसे एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम है। यूएई अपनी सेना के आधुनिकरण पर लगातार निवेश कर रहा है और अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन जैसे देशों के साथ मजबूत रक्षा साझेदारी बनाए हुए हैं।
बहरीन की सैन्य क्षमता, बहरीन की सेना को बहरीन डिफेंस फोर्स कहा जाता है। यह सेना एडवांस और तकनीक के तौर पर मजबूत मानी जाती है। बहरीन की एयरफोर्स भी इसकी सबसे मजबूत यूनिट मानी जाती है।
बहरीन के पास F16 फाइटिंग फोल्कन है जो इसकी सेना को मजबूती देता है। समुद्री सुरक्षा के लिहाजे से रॉयल बहरीनी नेवल फोर्स के पास अमेरिकी मूल का ओलिवर हज़ार्ड पेरी क्लास का युद्धपोथ है। इसकी थल सेना के पास M6 A3 टैंक है। बहरीन का रक्षा बजट करीब 1.75 अरब डॉलर का है। जिसमें क्षेत्रीय तनाव के चलते बहरीन अपने रक्षा बजट में लगातार वृद्धि कर रहा है। हालांकि सेना का बड़ा हिस्सा विदेशी कॉन्ट्रैक्ट सैनिकों पर निर्भर है जो इसकी एक प्रमुख कमजोरी मानी जाती है। कतर की सैन्य क्षमता कतर खाड़ी क्षेत्र का सबसे छोटा देश है। क़तर ने अपनी सीमित आबादी के बावजूद आधुनिक सैन्य ताकत को हमेशा मजबूत करने पर जोर दिया है।
कतर की सेना आकार में भले ही छोटी हो लेकिन तकनीक और अत्याधुनिक के मामले में यह काफी आगे है। 2024 में इसका रक्षा बजट 15.41 अरब डॉलर का था। कतर की एयरफोर्स उसकी बड़ी ताकत मानी जाती है। इसी के साथ आपको बता दें कि क़तर के पास यूरो फाइटर, टाइफून और राफेल जैसे आधुनिक फाइटर हैं। कतर की नौसेना छोटी है लेकिन उसके पास अत्याधुनिक पेट्रोलिंग जहाज हैं जो उसकी समुद्री क्षमता पर निगरानी रखते हैं।
हालांकि क़तर की सबसे बड़ी चुनौती उसकी कम स्थानीय आबादी है। लगभग 3 लाख नागरिकों वाले इस देश की कुल आबादी में विदेशी नागरिकों की हिस्सेदारी 80% है। इसका असर सेना पर भी दिखाई देता है। क़तर अपनी सैन्य जरूरतों के लिए वहीं आपको बता दें कि रणनीतिक रूप से क़तर की जो सेना है वह नहीं है बल्कि रक्षात्मक भूमिका में तैयार की गई है। जिसका मुख्य उद्देश्य सीमाओं और ऊर्जा संसाधनों की सुरक्षा करना है।
इतनी ताकतवर सैन्य क्षमता के बावजूद यह देश ईरान पर हमला नहीं कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि क्या खाड़ी देश सिर्फ एक सपोर्ट रोल में रहेंगे या फिर आगे हालात उन्हें सीधे के मैदान में ला खड़ा कर देंगे।
