2025 फिल्म फेयर अवार्ड में किरण राव की लापता लेडीज का जलवा रहा। इस फिल्म ने कुल 13 अवार्ड्स जीते। इसमें बेस्ट फिल्म का अवार्ड भी शामिल है। इस बात से द केरल स्टोरी के डायरेक्टर सुदीप तो सेन नाराज हो गए। उन्होंने फिल्मफेयर अवार्ड्स को तो बुरी तरह लतार लगाई साथ ही लापता लेडीज को चोरी की फिल्म बता डाला। लक्ष्य की फिल्म तिल को भी उनके कोप का भाजन बनना पड़ा। 13 अक्टूबर को सुदीप तो ने अपने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट डाली।
इसमें वो लिखते हैं। इस साल फिल्म फेयर ने सच में भारतीय नवतरंग का असली चेहरा दिखाया है। एक साफ-साफ नकल की गई फिल्म एक फिल्म जो हिंसा का सबक देती है और एक फिल्म जो बॉक्स ऑफिस पर 72 घंटे से ज्यादा टिक नहीं पाई।
उन्हें सबसे ज्यादा अवार्ड्स मिल गए। जैसे कि उम्मीद थी 204 के सबसे अच्छे काम अनदेखे रह गए। अब समझ आया कि फिल्म फेयर द केरल स्टोरी को नेशनल अवार्ड मिलने पर इतना विरोध क्यों कर रहा था। मैं खुश हूं कि यह वुड समुदाय हमें पहचानते, आमंत्रित करता और चुनता नहीं है।
वो आगे लिखते हैं, हम नकली मुस्कान, दिखावे की दोस्ती और सबसे जरूरी बात चापलूसी में शामिल होने से बच गए हैं। अंत में मैं खुश हूं कि हम मुंबई में सिनेमा के नाम पर चल रहे इस तमाशे और कान में सेल्फी लेने में के झमेले से दूर हैं। कम से कम हम सिनेमा के नाम पर होने वाले नकली दिखावे और झूठे रंग ढंग से तो बच ही गए हैं। सुदीप तो ने इस पोस्ट के कैप्शन में भी अपना गुस्सा निकाला। बकल सुदीप तो उन्हें भारतीय मीडिया और सिनेमा संस्थानों से कोई उम्मीद नहीं है।
यह अमीरों और ग्लैमर की दुनिया से प्रभावित हो जाते हैं। बिल्कुल वैसे ही जैसे गांव और छोटे शहर के लोग अमिताभ बच्चन या शाहरुख खान के घर के बाहर खड़े रहते हैं। डायरेक्टर के मुताबिक ऐसे लोगों का सिनेमा और आर्ट में कुछ खास योगदान भी नहीं होता है। सुदीपो को उम्मीद थी कि फिल्म फेयर द केरल स्टोरी को ही बेस्ट फिल्म का अवार्ड देगी।
इस फिल्म को हाल ही में बेस्ट डायरेक्शन और बेस्ट सिनेमेटोग्राफी के लिए नेशनल अवार्ड मिला था। मगर फिल्म फेयर अवार्ड्स में इसका कहीं कोई जिक्र नहीं हुआ। जहां तक लापता लेडीज की बात है, इस फिल्म पर शुरू से ही चोरी के आरोप लगते रहे हैं। इसे 2019 में आई अरेबिक शॉर्ट फिल्म बुर्का सिटी और 1999 की भारतीय फिल्म घूंघट के पटखोल की नकल बताया जाता है। खास बात यह है कि इन दोनों ही फिल्मों के डायरेक्टर लापता लेडीज पर चोरी का इल्जाम लगा चुके हैं।
बुर्गा सिटी बनाने वाले फैब्रिस ब्राक ने इस फिल्म को अपने काम की नकल बताया था। उन्होंने फिल्म के ट्विस्ट पर भी सवाल खड़े कर दिए और कहा कि वह इसे देखकर काफी निराश हुए हैं। वहीं घूंघट के पट खोल बनाने वाले नेशनल अवार्ड विनिंग फिल्म मेकर अनंत महादेवन का भी यही कहना है। मगर लापता लेडीज के राइटर विप्लभव गोस्वामी ने इन दावों का खंडन कर इसे पूरी तरह ओरिजिनल फिल्म बताया है।
