बॉलीवुड एक्ट्रेस करिश्मा कपूर इन दिनों अपने पूर्व पति दिवंगत बिजनेसमैन संजय कपूर के संपत्ति विवाद को लेकर लगातार सुर्खियों में है। संजय कपूर की संपत्ति विवाद ने साबित कर दिया है कि कई शादियों और उनसे होने वाले बच्चों की वजह से उत्तराधिकारी की लड़ाई कितनी पेचीदा हो जाती है। चलिए जानते हैं कि इस मामले में भारत का उत्तराधिकारी कानून क्या कहता है।
भारत के उत्तराधिकारी कानून में ऐसे मामले का जवाब मरने वाले व्यक्ति के धर्म पर काफी हद तक निर्भर करता है। अगर मृतक व्यक्ति सिख, जैन, बौद्ध या हिंदू है तो इस पर हिंदू उत्तराधिकारी अधिनियम 1956 लागू होगा।
इस अधिनियम के तहत मृतक की संपत्ति का वारिस क्लास एक के रिश्ते को रखा गया है। जिसमें पत्नी या पति, बच्चे और मां शामिल है। इन सभी का मरने वाले की संपत्ति में बराबर हक है। वहीं अगर मरने वाले व्यक्ति की कोई वसीयत है तो सबसे पहले भारतीय उत्तरा अधिकारी अधिनियम 1925 के तहत उस वसीयत की जांच की जाती है।
वहीं कई कोर्ट द्वारा भी साफ किया जा चुका है कि व्यक्ति की संपत्ति पर सिर्फ उसकी कानूनी तौर पर शादीशुदा पत्नी या पति ही उत्तराधिकारी होने का दावा कर सकते हैं। अगर मृतक का अपने पहले पार्टनर से तलाक हो गया है तो वह उसकी संपत्ति के उत्तराधिकारी होने का दावा नहीं कर सकते हैं। फिलहाल आपको क्या लगता है?
