कैमरे बंद, गार्ड गायब… अब तक उलझी है जेफरी एस्टीन के निधन की गुत्थी, क्या है पूरा सच?

साल था 2019 अगस्त की 10 तारीख। वर्जनिया ज़ूफ को खबर मिलती हैकि जेफरी एस्टीन ने जेल के अंदर जान दे दी। यह नाम वर्जनिया के लिए ऐसा जख्म था जो सिर्फ उनके शरीर पर नहीं उनके ज़हन पर था। 15-16 साल की उम्र से वर्जिनिया एस्टीन के घिनौने खेल का मोहरा बन गई थी। उनका एक बार नहीं बार-बार अलग-अलग लोगों ने शोषण किया था और इसके लिए जिम्मेदार था एक इंसान जेफरी एपस्टीन।

लेकिन वर्जनिया यह खबर जानने के बाद भी खुश नहीं हुई। किस बात के लिए खुश होती? उसके गुनाह साबित नहीं हुई। कोर्ट में अभी केस चल ही रहा था। एपस्टीन के ना जाने कितने साथी और थे। वो लोग जो उसके पाम बीच वाले बंगले में जाया करते थे। उसकी घिनौनी पार्टीज में शरीक होते थे। कौन थे यह लोग?

अब कैसे पता चलेगा? जेफरी तो यह सब बताने के लिए रहा ही नहीं। या फिर यही वजह थी कि उसको रास्ते से हटा दिया गया। एक वक्त पर बेशुमार दौलत का मालिक और ताकतवर लोगों का साथी, हाई प्रोफाइल पार्टियों का होस्ट और ट्रंप से लेकर बिल क्लिंटन तक का दोस्त रहा शख्स।

क्या इतनी आसानी से हार मान गया? क्या है जेफरी एपस्टीन की का सच? एस्टीन ने एक नेक्सिस बना रखा था। इसनेस को चलाने में उसका साथ देती थी गिलन मैक्सवेल। दोनों ने मिलकर बाकायदा अपनी हर घिनौनी हरकत की एक रिपॉजिटरी तैयार कर रखी थी। यही है एब्सन फाइल्स जिनका नाम आपने भी न्यूज़ में सुना होगा। इन फाइल्स में सारा ब्यरा बनाकर रखा गया। कौन एस्टीन से कहां, कब और क्यों मिल रहा था? क्या कर रहा था? यहां तक कि तस्वीरों समेत कई साल से यह मांग उठती रही है कि इन फाइल्स को सार्वजनिक किया जाए। क्योंकि भले ही एप्सन नहीं रहा। गलन जेल में है।

लेकिन जो लोग उस आइलैंड पर जाते थे वो अभी भी कॉलर ऊंचा करके आराम से घूम रहे हैं। जितनी बार एपस्टीन की मौत का जिक्र होता है इन सफेद पोशों की ओर इशारा चला ही जाता है। इसकी बड़ी वजह है वो हालात जिनमें एप्सन के शव को जेल में पाया गया। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने इसकी जांच रिपोर्ट जारी की है। बीबीसी के मुताबिक एफस्टीन को गिरफ्तार किए जाने से लेकर खुद की जान देने से पहले तक का ब्यरा एफबीआई की इस रिपोर्ट में मिलता है और यहीं से उठते हैं तमाम सवाल। एफसीन को 23 जुलाई से ही निगरानी में रखा गया था। यानी अधिकारियों के मुताबिक वो पहले भी ऐसी कोशिश कर चुका था।

माने खुद की जान देने की कोशिश। हालांकि एसीन ने एक दिन बाद ही साइकोलॉजिस्ट को बताया था कि वो खुद को नहीं मारेगा क्योंकि ऐसा करना पागलपन होगा। उसका दावा था कि वो अपने केस के लिए लड़ना चाहता है। वो अपने जीवन में वापस लौटना चाहता है। खैर जेल के वार्डर ने सलाह दी कि एस्टीन को अकेले नहीं छोड़ा जाना चाहिए। हर आधे घंटे पर चेकिंग होनी चाहिए और कभी-कभी ओक निरीक्षण भी होना चाहिए। दिलचस्प बात यह है कि एब्सस्टीन के जेल के कमरे में एक कैदी और था। निकोलस टाटा ग्लनी। यह एक पूर्व पुलिसकर्मी था जिस पर हत्या का आरोप था। एपस्टीन ने भी निकोलस पर उसे जान से मारने की कोशिश का आरोप लगाया था। यहां से उलझती है गु्थी। जेफरी की मौत के एक दिन पहले ही निकोलस को रिहा कर दिया गया। यानी अब एस्टीन अपने सेल में अकेले रह गया था। उस दिन ना ही कोई चेकिंग हुई।

यहां तक कि कैमरे भी उसी दिन नहीं चल रहे थे। अगले दिन सुबह स्टाफ को मिलती है जेफरी एप्सन की बॉडी और खबर आती है कि सेक्स ट्रैफिकिंग और साजिश के आरोप झेल रहे एप्सन ने अपनी जान दे दी है। एस्टीन के हाथों अमानवीयता का शिकार हुए तमाम विक्टिम्स के अंदर कुछ टूट जाता है। वर्जनिया जुफरी ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया था कि उस दिन उन्होंने इस बात के लिए तो राहत की सांस ली कि अब कम से कम इस्टी किसी और मासूम की जिंदगी तबाह नहीं कर पाएगा।

लेकिन उस लड़ाई का क्या जो एक अरसे से अदालतों में चल रही थी। जो जिंदगियां तबाह हो चुकी हैं उनके लिए इंसाफ का क्या होगा? जब यह पता चला कि एप्सन फाइल्स के अंदर मौजूद है पूरा ब्यरा उसकी एक-एक काली करतूत का? तब उठा बड़ा सवाल। क्या एस्टीन को इसीलिए रास्ते से हटा दिया गया क्योंकि कई रसूखदारों के शीश महल उसकी चुप्पी पर ही खड़े थे। क्यों उसी दिन एस्टीन को जेल के उस कमरे में अकेले छोड़ दिया गया था। इतने लंबे अरसे तक कानून के पंजे से बचे रहने वाले इस मास्टरमाइंड के पास कोई तुर्क का इयका क्या अब नहीं बचा था। कुछ दिन पहले ही अपनी जिंदगी को उम्मीद के साथ देखने वाले शख्स ने अचानक हार मान ली।

यह दावा हजम कर पाना बहुत मुश्किल है। अमेरिकी सरकार काफी हल्ले के बाद एस्टीन फाइल्स के हिस्से रिलीज कर रही है। इसमें कई बड़े नाम पहले ही सामने आ चुके हैं।

एप्सन अब नहीं है। इसीलिए इन दस्तावेजों को बड़ी आसानी से खारिज कर दिया जाता है। साजिश करार दे दिया जाता है। गिलन मैक्सवेल को 20 साल की जेल हो चुकी है। यह उन तमाम सर्वाइवर्स के लिए एक छोटी सी जीत ही है।

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