खामेनेई को मरना और जनरल कानी की गद्दारी? क्या मोसाद का मोहरा बन गया था ईरान का कमांडर?

ईरान की एलट इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड यानी जिसके नाम से दुश्मन कांपते हैं। आज उसी के अंदर से की बू आ रही है। अरब मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक कुद्स फोर्स के जनरल इस्माइल खानी को जासूसी के आरोप में सजा-ए-मौत दी गई है। आरोप छोटा-मोटा नहीं है। आरोप है कि इस्माइल खानी इजराइल की सीक्रेट सर्विस मोसाद के लिए काम कर रहे थे और उन्होंने मोसाद के साथ मिलकर खामिनाई की हत्या की साजिश रची।

यूएई के अखबार द नेशनल का दावा है कि काानी ने ईरान के सुप्रीम लीडर आयातुल्ला अली खामिनई की लोकेशन लीक की थी। वो जानकारियां जो सिर्फ ईरान के सबसे भरोसेमंद लोगों के पास होती थी। वो सीधे इजराइल के पास पहुंच रही थी। का पर शक की सुई तब घूमी जब सुप्रीम लीडर खामन की मीटिंग हॉल पर जबरदस्त मिसाइल हमला हुआ। जिसमें खामनई समेत ईरान के कई बड़े अधिकारी मारे गए।

लेकिन जनरल का हमले से महज कुछ मिनट पहले ही वहां से सुरक्षित निकल गए जब का के जिंदा होने की खबर मिली तो ईरान की काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट चौकन्ना हो गई। रिपोर्ट्स कहती है कि खामिनाई का शव मलबे के नीचे पाया गया जबकि का वहां से गायब थे। क्या यह महज इत्तेफाक था या फिर कहानी को पहले से पता था कि वहां मिसाइलें गिरने वाली हैं। यह पहली बार नहीं था। इससे पहले भी बैरूत में जब हिजबुल्ला चीफ हसन नसरल्लाह को निशाना बनाया गया तब भी का मीटिंग से ऐन वक्त पहले गायब हो गए थे। जनवरी 2020 बगदाद एयरपोर्ट के बाहर एक अमेरिकी ड्रोन हमले में जनरल कासिम सुलेमानी की मौत हुई। सुलेमानी ईरान के लिए एक लिविंग लेजेंड थे।

उनकी जगह लेने के लिए इस्माइल का को चुना गया। कहानी को ईरान की प्रॉक्सी वॉर को चलाने की जिम्मेदारी दी गई। लेकिन पिछले 4 सालों में जिस तरह से एक के बाद एक ईरानी कमांडर और वैज्ञानिक मारे गए। उसने तेहरान के भीतर डर पैदा कर दिया था। सितंबर 204 में भी कहानी के मारे जाने की खबर आई थी। लेकिन वह फिर सामने आए। पर इस बार मामला अलग है। इस बार आरोप खुद के ही सुप्रीम लीडर को धोखा देने का है।

खुफिया सूत्रों के हवाले से खबर है कि काली लंबे समय से मुसाद के संपर्क में थे। आरोप है कि उसने ईरान की सुरक्षा रणनीति, कमांडर्स की मीटिंग और खुद खामिनई के मूवमेंट की पल-पल की जानकारी इजराइल को पहुंचाई जिसे ईरान के इतिहास में सुरक्षा की सबसे बड़ी चूक और विश्वासघात माना गया है। आपको बताते हैं कि खामिनई की हत्या को कैसे अंजाम तक पहुंचाया गया। 28 फरवरी की उस सुबह ईरान में सूरज तो होगा लेकिन वहां की सत्ता के लिए वो आखिरी सुबह थी। इजराइल और अमेरिका के जॉइंट ऑपरेशन ने ईरान के सर्वोच्च नेता आया अली खामिनाई समेत 48 टॉप कमांडर्स को मिट्टी में मिला दिया।

यह हमला इतना सटीक था कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। इजराइल के मुताबिक खामनाई को खत्म करने की बिसातक नवंबर 2025 में ही बिछ चुकी थी। पहले यह हमला मई जून 2026 में होना था। मुसाद और आईडीएफ महीनों से रिहर्सल कर रही थी। लेकिन ईरान से आए इंटेलिजेंस इनपुट से ट्रंप के कान खड़े हो गए। अमेरिका इजराइल ने 28 फरवरी को ही खामई को मार गिराने का फैसला लिया। इजराइल के एयरबेस से 200 लड़ाकू विमानों ने एक साथ उड़ान भरी। इनमें वो विमान भी थे जो दुनिया के सबसे घातक बमों जीबीय28 और जीबीयू 57 से लैस थे। यह बम आम नहीं है। इन्हें बंकर बस्टर कहा जाता है। यह सैकड़ों फीट गहरी कंक्रीट की दीवारों को चीर कर पाताल में छुपे दुश्मनों का काल बनते हैं।

सुबह 9:45 पर तेहरान के उस सुरक्षित इलाके पर बमों की बारिश हुई जहां खामई और उनके सिप सलाहकार मीटिंग कर रहे थे। एक के बाद एक 30 बम गिराए गए। जमीन फटी इमारतें जमीदोज हुई और कुछ ही मिनटों में ईरान की पूरी लीडरशिप 48 निर्णायक नेता हमेशा के लिए खामोश हो गए। बड़ा सवाल यह कि क्या इस्माइल का वाकई मुसाद के मोहरे बन गए थे या फिर यह ईरान के भीतर चल रही सत्ता की जंग का नतीजा है?

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