राजस्थान के झालावाड़ की स्कूल में गिरी छत, बच्चो ने गवाई जान।

राजस्थान के झालावाड़ के पिपलौदी प्राइमरी स्कूल की बिल्डिंग के मलबे में दबने से अब तक सात बच्चों ने जान गवाई है। जबकि इस हादसे में 27 बच्चे घायल हैं। इस हादसे के बाद एक सवाल बड़ी तेजी से सिर उठा रहा है कि क्या इन मासूम बच्चों को बचाया जा सकता था? हालांकि हादसे के बाद आसपास के लोगों ने तुरंत ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया था। एंबुलेंस भी थोड़ी देर से ही सही लेकिन मौके पर पहुंच गई थी।

एंबुलेंस में भर-भर कर बच्चों को झालावाड़ जिला अस्पताल पहुंचाया जा रहा था। स्ट्रेचर में बच्चों को अस्पताल के अंदर ले जाया जा रहा था। कुछ बच्चों को गोद में टांग कर भी अस्पताल के अंदर की ओर भागते लोग दिखे। अस्पताल के डॉक्टर और वहां के कर्मचारी अफरातफरी के इस माहौल में भी पूरी मुस्तैदी के साथ बच्चों का इलाज करने में लगे थे। पर असल सवाल है कि यह हादसा क्यों हुआ? क्या जजर बिल्डिंग की जानकारी किसी को नहीं थी?

इस सवाल पर तो बात होगी ही लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बच्चों ने स्कूल में मौजूद शिक्षक को बताया था कि छत से कंकड़ गिर रहा है। कहीं छत ही ना गिर जाए। मगर बच्चों का आरोप है कि टीचर उस वक्त पोहे खा रही थी। हम स्कूल में आए। सर ने बोला आप कमरे में बैठ जाओ प्रार्थना करेंगे। फिर ऊपर से कंकर गिरने लगे। किसी बच्चे ने बोला सर कंकर गिर रहे हैं तो उन्होंने कहा कुछ नहीं गिर रहा है तो फिर एकदम से बिल्डिंग गिर गिरने लगी और हम तो बाहर निकल आए और वो अंदर ही रह गए तो ये अचानक हादसा कैसे हुआ उस समय क्या पहले से पता था कि कुछ ऐसा नहीं था सर दीवार के साए एक बेटा उस वक्त आप लोग क्या कर रहे थे सर हम झाड़ू निकाल रहे थे कमरे का हां हां कितने के बच्चे होंगे उस वक्त मौजूद 30 30 बच्चे 30 के आसपास 30 40 के लगभग अच्छा और आपके टीचर कहां थे उस वक्त? बाहर थे बैठकर ये खा रहे थे पोहे।

पोहे खा रहे थे और प्रार्थना हो रही थी उस टाइम। नहीं हो रही थी। प्रार्थना के लिए तो अंदर बैठा। इतना ही नहीं जब बच्चों ने फिर से अपने टीचरों को आगाह किया तो इस बार टीचर ने क्लासरूम की कुंडी बाहर से लगा दी। जबकि तकरीबन 40 बच्चे कमरे के अंदर थे। बिना मैडम उन्हीं की गलती है। उन्होंने एक छोटा बच्चा था। उसने बोल दिया था कि यहां पर कंकर गर से उसने छत गिरने वाली इसके पहले उसने बच्चों के गेट की कुंदी लगा दी। कुंदी लगाने के बाद डांटने के बाद वो बच्चे दने के बाद फिर जिसके बाद गांव वाला ने खोली कुंदी उसने नहीं खोली। वो तो बाहर बाहर ही रही मैडम तो। मैडम थी वो मीना मैडम।

इस बीच यहां पक्ष विपक्ष के नेताओं के आने का सिलसिला शुरू हो चुका है। भाजपा नेता वसुंधरा राजे भी अस्पताल का दौरा कर चुकी हैं। घायल बच्चों और उनके परिजनों से अस्पताल में मुलाकात कर लौट गई।

राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर भी अस्पताल का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने इस हादसे के बाद पपलौदी प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों सहित पांच कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है और निष्पक्ष जांच कराने की बात कही है। क्योंकि शिक्षा मंत्री तो मैं ही हूं। दूसरा तो कोई है नहीं। तो जिम्मेदारी तो मुझे ही लेनी पड़ेगी। किसी के ऊपर मैं आरोप प्रत्यारोप करूं वो ठीक नहीं है।

फिर भी इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच करवा रहे हैं और जो दोषी होगा उसके खिलाफ कार्यवाई करेंगे। अभी अभी हमने प्रारंभिक तौर पर निलंबन किया है और उसकी जांच करवा रहे हैं। ये जरूरी नहीं निलंबन का मतलब कि दोषी हो। परंतु पर प्रथम दृष्ट ऐसा लगा कि इनको जिस प्रकार से उस बच्ची ने कहा कि कंकर गिर रहे थे।

हमने इनको सूचना दी तो इन्होंने हमारी बात को सुना नहीं नाश्ता करते रहे। तो ये सारी बातों को देख के लगा कि प्रथम दृष्ट्या है। फिर भी हम इसकी निष्पक्ष जांच करा रहे हैं। यदि दोषी होगा तो कड़ी सजा मिलेगी विधि सम्मत। अब वास्तविकता क्या है? यह तो जांच के बाद शायद सामने आ जाए। लेकिन यह तय है कि उन सात बच्चों की जिंदगी नहीं लौटेगी। इन मांओं की रुलाई जिंदगी भर नहीं थमेगी और पता नहीं इस हादसे से हमारा प्रशासन और हमारी सरकारें कोई सबक लेंगे या नहीं।

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