वेस्टर्न एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा संकट के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है जिसने भारत और ईरान के रिश्तों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। दरअसल एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने भारत के सामने कई शर्तें रखी हैं। ईरान चाहता है कि भारत उसकी शर्तें माने जिसके बदले में ईरान ने भरोसा दिलाया है कि वह स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस से गुजरने वाले सभी भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता देगा।
नमस्कार, मैं हूं आपके साथ गरिमा शर्मा और आप देख रहे हैं india.com। रिपोर्ट्स के अनुसार भारत ने कुछ समय पहले तीन टैंकर, असफाल्ट स्टार, अलजफजिया और स्टेल रूबी को रोका था। आरोप था कि यह जहाज अपनी पहचान छिपा रहे थे और समुद्र में संदिग्ध तरीके से एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल ट्रांसफर कर रहे थे। स्टेलर रूबी पर ईरान का झंडा था।
जबकि बाकी दो जहाजों पर अन्य देशों के झंडे लगे थे। इसके अलावा यह भी खबर सामने आई कि ईरान ने भारत से कुछ दवाएं और मेडिसिन उपकरण की मांग की है। नई दिल्ली में ईरान के राजदूत और भारतीय अधिकारियों के बीच मुलाकात भी हुई है।
जिनमें इन मुद्दों पर चर्चा होने की बात कही गई है। हालांकि इस दावे को भारत के विदेश मंत्रालय ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि इस तरह की कोई बातचीत नहीं हुई है और यह रिपोर्ट्स निराधार है। भारत सरकार के सूत्रों ने साफ कर दिया है कि ऐसी कोई डील हुई ही नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सतर्क नजर आ रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि मौजूदा हालात में ईरान के साथ संवाद बनाए रखना ही सबसे बेहतर रास्ता है। उनका कहना है कि भारत लगातार बातचीत के जरिए स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोज में अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है।
इस बीच भारत के लिए राहत भरी खबर भी आई है। भारतीय एलपीजी जहाज आईएएस शिवालिक सुरक्षित रूप से गुजरात के मंजोरा पोर्ट पहुंच चुका है जो बड़ी मात्रा में एलपीजी लेकर आया है।
एक और भारतीय जहाज जगलाडकी जो संयुक्त अरब अमीरात से करीब 81,000 टन कच्चा तेल लेकर चला है, वह भी सुरक्षित रूप से भारत की ओर बढ़ रहा है। कुल मिलाकर वेस्टर्न एशिया के इस तनावपूर्ण माहौल में जहां एक तरफ कूटनीतिक दावे और जवाब सामने आ रहे हैं। वहीं भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव कदम उठाता नजर आ रहा है।
