ईरान के द्वीप पर कब्जे की साजिश। मिडिल ईस्ट में बड़ा भूचाल। अगर द्वीप छीना तो तबाही तय। ईरान की सीधी युद्ध चेतावनी। मिडिल ईस्ट में जारी l के बीच अब टकराव एक नए और बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। ईरान ने दावा किया है कि उसके एक अहम द्वीप पर कब्जा करने की तैयारी हो रही है और इस बार चेतावनी सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं है बल्कि सीधे की दी गई है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने 25 मार्च 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर बड़ा बयान जारी किया जिसने पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया है।
कालीबा ने कहा कि इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के दुश्मन एक क्षेत्रीय देश के समर्थन से ईरान के एक द्वीप पर कब्जा करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने साफ चेतावनी दी ईरान की सेना दुश्मनों की हर गतिविधि पर नजर रखे हुए है और अगर किसी ने एक कदम भी आगे बढ़ाया तो उस क्षेत्रीय देश का हर महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर लगातार और बिना किसी रोक-टोक के हमलों का निशाना बनेगा। यह बयान सिर्फ एक चेतावनी नहीं बल्कि सीधे-सीधे जवाबी हमले का ऐलान माना जा रहा है।
जिसके बाद आप सब जानना चाहते होंगे कि कौन सा द्वीप निशाने पर है। सबसे ज्यादा चर्चा खर्ग आइलैंड की हो रही है। यह वही द्वीप है जहां से ईरान का लगभग 90% कच्चा तेल निर्यात होता है। यानी अगर इस पर हमला या कब्जा होता है तो ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगेगा। यूं कह सकते हैं कमर टूट सकती है। इसके अलावा आबू मूसा द्वीप, ग्रेटर टुंब और लेसर टुंब जैसे विवादित द्वीप भी रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। जहां ईरान ने मिसाइल बेस, ड्रोन रनवे और नौसैनिक ठिकाने बना रखे हैं। कौन है वो क्षेत्रीय देश जो ईरान की द्वीप पर कब्जा जमाने वाले हैं।
हालांकि बयान में किसी देश का नाम साफ-साफ नहीं लिया गया है, लेकिन संकेत साफ तौर पर यूनाइटेड अरब इमिट्स की ओर माना जा रहा है। यानी यूएई को कहा जा रहा है। ईरान पहले भी आरोप लगा चुका है कि कुछ खाड़ी देश अमेरिका और इजराइल को अपने एयरबेस और क्षेत्र का इस्तेमाल करने दे रहे हैं और अब चेतावनी साफ है।
अगर वहां से हमला हुआ तो जवाब सीधे उसी देश की जमीन पर दिया जाएगा। फरवरी 2026 से जारी संघर्ष में अमेरिका और इजराइल ने ईरान के तेल ठिकानों, साइट्स और नौसेना बेस को निशाना बनाया है। जहां तक कि रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि हर द्वीप पर कब्जे जैसे विकल्पों पर भी चर्चा हुई है। इसी के जवाब में ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अगर उसके द्वीपों पर हमला हुआ तो पर्शियन गल्फ से भर जाएगा और वह किसी भी तरह से संयम नहीं रखेगा। अब तक अमेरिका, इजराइल या यूएई की ओर से कथित कब्जा योजना की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
विशेषज्ञ इसे ईरान की रणनीतिक चेतावनी और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश भी मान रहे हैं। लेकिन हालात बेहद संवेदनशील है क्योंकि स्टेट ऑफ फॉर्मुच जैसे अहम समुद्री रास्ते पर तनाव बना हुआ है। जहां से दुनिया का बड़ा तेल हिस्सा सप्लाई होता है। तो सवाल बड़ा है क्या वाकई ईरान के द्वीप पर कब्जे की तैयारी हो रही है या यह एक बड़ा रणनीतिक खेल है?
लेकिन इतना तय है अगर इस चेतावनी के बाद भी हालात बिगड़े तो मिडिल ईस्ट में एक और बड़ा युद्ध भड़क सकता है।
