यू!ध पर बड़ी खबर ईरान ने रखीं 6 शर्तें!

मिडिल ईस्ट में चल रही के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब शांति वार्ता की बात कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ ईरान ने यह संकेत दे दिया है कि अगर विराम होगा तो नियम हम तय करेंगे। ईरान ने भी साफ कह दिया है कि उसे में हुए नुकसान का मुआवजा चाहिए और पूरी तरह युद्ध खत्म करने की गारंटी भी।

ईरान ने सिर्फ जवाब नहीं दिया बल्कि छह ऐसी कड़ी शर्तें सामने रख दी जिन्होंने अमेरिका इजराइल की रणनीति को सीधी चुनौती दे दी है। ईरान ने साफ कर दिया है कि कोई भी समझौता सिर्फ कागज पर नहीं चलेगा बल्कि जमीन पर स्थाई बदलाव चाहिए।

ईरान की जो छह शर्तें हैं उसमें पहली यह है कि हमेशा के लिए युद्ध खत्म होने की गारंटी। सिर्फ सीजफाई नहीं बल्कि लीगल कमिटमेंट। दूसरी शर्त है पूरे मिडिल ईस्ट से अमेरिकी सेना की वापसी।

क्षेत्रीय पकड़ खत्म करने की मांग की है। तीसरी शर्त यह है कि युद्ध में हुए नुकसान का पूरा मुआवजा चाहिए। उनका कहना है कि हमले का जवाब सिर्फ शब्दों से नहीं होगा। चौथी शर्त यह है कि पूरे क्षेत्र में चल रहे संघर्षों का अंत होना चाहिए। गजा से लेकर यमन तक शांति।

पांचवी शर्त है हॉर्मोस जलडमरू मध्य पर नई कानूनी व्यवस्था यानी [संगीत] कि दुनिया के तेल रास्ते पर ईरान की मजबूत पकड़ होनी चाहिए। और छठी शर्त यह है कि मीडिया पर कारवाई होनी चाहिए। ईरान विरोधी प्रोपेगेंडा फैलाने वालों पर कानूनी शिकंजा कसा जाना चाहिए। साफ है कि ईरान अब सिर्फ बचाव में नहीं बल्कि गेम कंट्रोल करने के मूड में है। हाल के हमलों ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इजराइल के डिमोना और अराज जैसे संवेदनशील इलाकों तक पहुंच लंबी दूरी की जिनकी रेंज हजारों किलोमीटर और अमेरिकी ठिकानों पर सटीक निशाना भी लगा सकती है।

इससे यह साफ हो गया है कि ईरान अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि ग्लोबल स्ट्राइक कैपेबिलिटी दिखा रहा है। वहीं उधर ट्रंप भी चुप नहीं है। अमेरिका की अलग ही शर्तें हैं। अमेरिका ने छह डिमांड रखी हैं जिसमें पहली है कि 5 साल तक मिसाइल प्रोग्राम ईरान जो है वह बंद करें। दूसरा है यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह से जीरो कर दे। [संगीत] तीसरी है परमाणु केंद्र पूरी तरह बंद करें। चौथा है हिजबुल्ला हमास हुती जैसे जो संगठन हैं उनसे ईरान दूरी बनाए। पांचवी है मुआवजे की मांग जो की है ईरान ने वो नॉन स्टार्टर है। और छठी है 48 घंटे के भीतर ईरान हॉर्मोस खोल दे।

लेकिन ईरान का साफ जवाब है कि यह शर्तें नहीं सरेंडर है और हम सरेंडर नहीं करेंगे। अब ट्रंप की दुविधा यह है कि युद्ध भी नहीं रोक पा रहे। शर्तें भी मनवा नहीं पा रहे। ट्रंप मुआवजे की मांग को मानने से इंकार कर चुके हैं। लेकिन ईरान की जमी हुई अरबों डॉलर की संपत्ति लौटाने पर वह विचार कर रहे हैं।

उधर क़तर, मिस्र और ब्रिटेन जैसे देश मध्यस्थता में जुट गए हैं। फिर भी कोई सीधी बातचीत अभी तक नहीं है। यानी कि मामला बेहद नाजुक है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि फैसला कौन ले रहा है? ईरान के अंदर असली निर्णयकर्ता कौन है? यह अभी तक साफ नहीं है और यही चीज अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

यह साफ दिख रहा है कि ईरान अब दबाव में नहीं है बल्कि डोमिनेंट पोजीशन में बातचीत चाहता है। अमेरिका पहली बार वार्ता के लिए आगे बढ़ता दिख रहा है। लेकिन दोनों देशों के बीच शर्तों की खाई बहुत ज्यादा गहरी है। मतलब साफ है कि जंग अभी रुकी नहीं है। बस अब मैदान से ज्यादा टेबल पर जंग लड़ी जा रही है।

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