बाबा रामदेव ने क्यों कहा-ईरान को कोई हरा नहीं सकता?

जो लड़ नहीं सकेगा वो जिंदा नहीं बचेगा। इस दुनिया में एक बहुत बड़ा इस वक्त चल रहा है बाबा और आपने कहा लड़ना तो सबको पड़ेगा लेकिन इस के लिए जिम्मेदार कौन है? इस के विलेन क्या डोनल्ड ट्रंप है? इस युद्ध का विलेन है राजनैतिक उन्माद। हम आधिपत्यवाद, साम्राज्यवाद, अधिनायकवाद माने एक्यूमुलेशन। एक होता है क्रिएशन। जैसे एनडीt एक न्यूज़ के फील्ड में एक बहुत बड़ा क्रिएटिव काम कर रहा है। आज तीन दशक पुराना इसका गौरवशाली अतीत है। कुछ लोग एक्यूमुलेशन करना चाहते हैं।

सारी दुनिया पर अपना आधिपत्य स्थापित करना चाहते। बात करते हैं सातत्यता की स्वाधीनता की। लेकिन पूरी दुनिया में धोस जमा करके उनको अपने अधीन करना चाहते हैं। यह सारी लड़ाई है गैस की, ऑयल की और एक तरह से अपनी ठसक की, राजनीतिक वर्चस्व की। उसमें ट्रंप भी एक चेहरे हैं। उसके अंदर नेतू भी एक चेहरे हैं। मैं इस पूरे युद्ध में ईरान को यदि दोष की दृष्टि से देखूं, अपराधी की दृष्टि से देखूं तो वो अपना प्रतिकार कर रहा है। अपराधी इसमें अमेरिका और इजराइल है। लेकिन बाबा जी अगर हम पीछे जाएं माफ़ कीजिएगा सोहेल तो जब गाजा में इजराइल का युद्ध चल रहा था तब तक ईरान इस का हिस्सा नहीं था।

ईरान ने सबसे पहले इजराइल पर दागी और उसके बाद इस की शुरुआत हुई तो निर्दोष कैसे है? वो मासूम कैसे है? देखिए मासूम नहीं बता रहा हूं कि इस बार जो शुरुआत हुई है पहले जो था वो छुटपुट था। देखो आपस में कहासनी लड़ाई झगड़े छोटे-मोटे चलते रहते हैं। लेकिन यह जो एक तरह से तृतीय विश्व जैसी थर्ड वर्ल्ड जैसी जो सिचुएशन बनी है और पूरी दुनिया की सांसे जैसी थमी हुई है और इसमें यह आर्थिक भी लड़ा जा रहा है इस पर। इसमें राजनीतिक भी लड़ा जा रहा है। इसमें मजहब युद्ध भी लड़ा जा रहा है। तो यह जो इस इस बार की जो शुरुआत है वो इजराइल ने और अमेरिका ने की है।

बाबा लेकिन खमनई को नतन्या ने मार दिया। आपको क्या लगता है खमनई को मारना सही है या गलत? लोगों को नितन्याहू के साथ होना चाहिए या खमनई के साथ? आप किसी व्यक्ति को मार सकते हो। उसके विचार को, उसके दर्शन को, उसकी सोच को, उसके जज्बे को, उसके शौर वीरता, स्वाभिमान को खत्म नहीं कर सकते। मैं बहुत ज्यादा नहीं जानता हूं ईरान के बारे में। लेकिन इतना जरूर जानता हूं। यह प्रॉफेट मोहम्मद साहब के रियल खानदान के लोग हैं। जिनको सिया कहा जाता है।

इनको कोई झुका नहीं सकता। इनको कोई मिटा नहीं सकता और इनको हरा भी नहीं सकता। कम से कम एक नहीं 1 लाख नहीं उस करीब 9 10 करोड़ की आबादी के अंदर एक करोड़ से ज्यादा लोग खामनाई के विचार को पूरे अस्तित्व के साथ माने रोम रोम से इसको जीते तो आप कैसे खत्म कर देंगे तो ये अमेरिका की एक तरह से मैंने कहा राजनीतिक अपरिपक्वता माने उनका जो आप नेतन्या पर कुछ नहीं बोलते नेतन्या के सेम दोनों वो तो चोर चोर मौसेरे भाई इस मामले में दोनों एक ही जैसे हैं। को चोर कह रहे हो आप। अरे मैं चोर किसी को नहीं कह रहा।

एक कहावत है चोरचोर मौसेरे भाई। मतलब दोनों एक ही जैसे हैं। दोनों युद्ध अपराधी मैं मानता हूं। युद्ध अपराधी भी मानता हूं। मानवता के अपराधी भी मानता हूं। प्रकृति पर्यावरण के अपराधी मानता हूं। और ये पूरी की पूरी एक तरह से राजनीतिक अविश्वास का एक इन्होंने हिमालय खड़ा कर दिया। इसको तोड़ने में बहुत वक्त लगेगा। और इसका परिणाम आने वाले 500 सालों तक मैं खाली इंटरव्यू देने के लिए नहीं बैठा हूं। मैं इस देश का एक जागरूक व्यक्ति होने के नाते और एक सन्यासी होने के नाते एक मैं वैश्विक नागरिक हूं। उस नाते इसमें इस बात को कह रहा हूं इस युद्ध का खामियाजा आने वाले 500 सालों तक इजराइल और अमेरिका को भुगतना पड़ेगा। ना इसमें अमेरिका और इजराइल जीत सकते हैं और ना इसमें ईरान हार सकता। पर स्वामी जी अगर आप इन्हें युद्ध अपराधी कहते हैं तो भारत एक युद्ध अपराधी के साथ दोस्त है। देखिए भारत की जो विदेश नीति है या रणनीति है या कूटनीति है वो इसमें तटस्थता की है। तो हम हम तटस्थता की भूमिका में है और ये वक्त का तकाजा है। ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर जितनी गंभीरता बरतनी चाहिए उतनी मोदी साहब बरत रहे हैं। मैं इसमें विपक्ष से भी कहूंगा कि थोड़ा संयम बरतें। मतलब आपके पास बहुत मुद्दे होते हैं। महंगाई है, बेरोजगारी है, गरीबी है, गैस है, पेट्रोल है, डीजल है। ये सब मुद्दे उठाइए आप। यह भी मुद्दा उठाइए कि स्वामी रामदेव कहते थे ₹35 पेट्रोल गैस गैस सिलेंडर सस्ता हो जाएगा। हमको भी खूब गाली दीजिए। कोई दिक्कत नहीं है। क्योंकि हमने बोला था वो झूठ नहीं बोल रहे हैं। पर आप तो खुद युद्ध अपराधी कह रहे हैं तो देश का विपक्ष क्यों नहीं कहेगा? वो क्यों नहीं हल्ला करेंगे? मैं जो बात कह रहा हूं कि इस समय विदेश नीति की जो कूटनीति और रणनीति होती है उसमें बहुत सारी बातें डिप्लोमेटिक लेकिन ईरान के विदेश मंत्री तो खुद कह चुके हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहेंगे तो 24 घंटे में रुक जाएगा।

हां मैं आपको बता रहा हूं ये ये हकीकत है ये बात। पुतिन को कभी भी ट्रंप पसंद नहीं करेंगे कोई बीच में आए। चाइना भी कभी भी बीच में नहीं आना चाहेगा। क्यों? वो एक अलग उनके लिए पूरी दुनिया एक बाजार है। भारत के लिए पूरी दुनिया एक परिवार है। और यह सच है कि अब अमेरिका की सांसे थमी। इनको लगता था कि इनके पास 1000 1500 फीट तक वार करने वाली है।

इनको पता लगे तो 5000 मील दूर जाकर के ठोक सकते हैं। तुम इनकी मिसाइलों को अपने एंटी सिस्टम से उड़ा सकते हो। लेकिन उसमें से क्लस्टर बम निकलेंगे उनका क्या होगा? और अभी तो एक बहुत अनसुलझा रहस्य है। इसके पास कितने बड़े घातक हैं। मैं की बात नहीं कर रहा हूं। उसके अलेदा भी बहुत कुछ है और ये तैयारी ईरान ने पिछले 40 45 सालों में की है। एक दिन की तैयारी नहीं है और उसको पता था वो शत्रु देशों से घिरा है। सिया सुन्नी का एक अलग संघर्ष और अमेरिका का पूरा राजनीतिक और आर्थिक जो वर्चस्व पूरी दुनिया में चाहता वो वो अलग है और उस के बीच में जिस रणनीति से ईरान चल रहा है। मैं उसकी सराहना करता हूं

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