ईरान और क़तर के बीच बढ़ता तनाव अब वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ी चिंता बन गया है। हाल ही में ईरान ने क़तर के गैस ठिकानों पर बहुत बड़ा हमला किया जिससे क़तर की अर्थव्यवस्था को अब भारी नुकसान पहुंचा है। क़तर के ऊर्जा मंत्री साद अल काबी ने कहा कि उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि रमजान जैसे पवित्र महीने में इस तरह का हमला होगा। उनके अनुसार इन हमलों के कारण क़तर की एलएजी यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस क्षमता का लगभग 17% हिस्सा ठप हो गया है।
इससे हर साल करीब 20 अरब डॉलर का नुकसान होगा। हमले में क़तर के 14 एलएजी प्लांट्स में से दो गैस टू लिक्विफाइड जीटीएल, दो यूनिट्स और एक को गंभीर नुकसान हुआ है। इसके चलते 12.8 मिलियन टन गैस उत्पादन अगले 3 से 5 साल तक प्रभावित रह सकता है। काबी ने कहा कि इस नुकसान ने पूरेक्षेत्र में 10 से 20 साल पीछे धकेल दिया है।।
सबसे ज्यादा असर रास लफान गैस हब पर पड़ा है जो दुनिया के सबसे बड़े एलएजी उत्पादन केंद्रों में से एक है। सामान्य परिस्थितियों में यह अकेले ही दुनिया की करीब 20% एलएनजी सप्लाई करता है। इस हमले का असर सिर्फ एलएनजी तक सीमित नहीं रहने वाला है। क़तर के कंडेंस्ड निर्यात में 24% की गिरावट आ सकती है। जबकि एलपीजी में 13% और हीलियम में 14% की कमी आने की संभावना देखी जा रही है। इसके अलावा नेथेन और सल्फर उत्पादन भी लगभग 6% की गिरावट आ सकती है।
यह हमला इतना बड़ा है कि इसका कुल नुकसान $26 अरब डॉलर तक हो गया है। क़तर की सरकारी एजेंसी क़तर एजेंसी अब इटली, बेल्जियम, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों की गैस सप्लाई भी रोक सकती है जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट और भी गहरा हो सकता है। इस पूरे संकट की शुरुआत तब हुई जब इज़राइल और अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान पर हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने क़तर सहित कई देशों को भी निशाना बनाया। साथ ही स्टेट ऑफ हार्मोंस में भी तनाव बढ़ गया। जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है।
भारत के नजरिए से यह स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है। भारत अपनी लगभग 40% एलएनजी जरूरत कतर से पूरी करता है। ऐसे में अगर सप्लाईlबाधित होती है तो भारत में गैस और पेट्रोलियम उत्पादनों की कीमत काफी बढ़ सकती है। कुल मिलाकर यह संकट सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है। बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और खासकर भारत जैसे देशों पर साफ दिखाई दे रहा है। अब आगे क्या होता है इस पर हमारी नजर बनी हुई है।
