अमेरिका और ईरान के बीच चल रही को फिलहाल दो हफ्तों के लिए रोक दिया गया है। दोनों ही देशों ने इस पर सहमति जताई है। ट्रंप ने ईरान को आज सुबह यानी कि 8 अप्रैल 5:30 बजे तक का एक अल्टीमेटम दिया था और कहा था कि ईरान नहीं माना तो पूरी सभ्यता एक रात में खत्म हो सकती है। लेकिन फिर अचानक अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने एक ऐलान किया और कहा कि ईरान पर होने वाली फिलहाल दो हफ्तों के लिए रोक दी गई है। आपको याद होगा कि 28 मार्च को पहली बार ईरान पर इजराइल और अमेरिका ने हमला किया था और यह दावा किया गया था कि ईरान की जो टॉप लीडरशिप है इस हमले में खत्म हो गई और फिर खबर आई थी कि जो उस वक्त के मौजूदा सुप्रीम लीडर थे ईरान के आया अली खामनी भी उस हमले में उनकी हो गई थी। तो चलिए अब पॉइंट दर पॉइंट समझते हैं कि अभी
फिलहाल जो ये दो हफ्तों का हुआ है उसमें ट्रंप ने क्या कहा है? ईरान की तरफ से क्या कहा गया है? पाकिस्तान की क्या भूमिका रही? साथ ही इजराइल ने इस सीज फायर पे सहमति जताई है या नहीं। ट्रंप ने कहा है कि दो हफ्तों के लिए ईरान पर बमबारी हमले रोकने को तैयार हैं। उनका कहना है कि यह फैसला तब लिया गया जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अमेरिका से हमले रोकने की अपील की।
साथ ही यह शर्त रखी गई कि ईरान तुरंत पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्ट्रेट ऑफ हार्मोस खोल देगा। ट्रंप ने कहा कि यह दोनों तरफ से यह जो सीज फायर है वो दोनों ही तरफ से लागू होगा। लेकिन उन्होंने साफ तौर पर इजराइल का नाम नहीं लिया है। इजराइल की भी एक अहम भूमिका है। जैसे कि यह जो सीज फायर दो हफ्तों के लिए कहा जा रहा है। इसमें फिलहाल इजराइल के तरफ से इस वीडियो को रिकॉर्ड किए जाने तक कोई भी ऑफिशियल स्टेटमेंट नहीं आया है। हालांकि ईरान और अमेरिका के तरफ से दोनों ही तरफ से स्टेटमेंट सामने आ चुके हैं कि पहले दो हफ्तों के लिए ट्रंप ने कहा कि हम हमले रोक रहे हैं और उस पे ईरान की सहमति आई। उन्होंने भी पुष्टि कर दी है की। ट्रंप के मुताबिक ईरान ने 10 पॉइंट का एक प्रस्ताव दिया है जिस पर बातचीत हो सकती है।
उन्होंने कहा कि दो हफ्तों का समय इस समझौते को फिलहाल करने के लिए दिया गया है। ट्रंप ने दावा किया है कि लंबे समय से चला आ रहा यह विवाद अब सुलझने के करीब है। अब बात करते हैं ईरान की। ईरान की तरफ से क्या कहा गया है? ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने भी दो हफ्ते के डील की पुष्टि कर दी है। मेहर न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक यह समझौता पाकिस्तान की मध्यस्था में हुआ है। ईरान ने कहा है कि इस सीज फायर को उसके नए सुप्रीम लीडर आया मुस्तफा खामिने की मंजूरी मिली है। ईरान ने इस डील को अपनी जीत बताया है। साथ ही यह भी कहा है कि अब एक परमानेंट समझौते के लिए बातचीत इस्लामाबाद में होगी। ईरान की तरफ से क्या कहा गया है? उनके स्टेटमेंट में क्या कहा गया है।
उसको भी समझते हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने ईरान को बताया कि अमेरिका ने ईरान के 10 पॉइंट प्लान को बातचीत का आधार मान लिया है। इसके बाद तय हुआ कि ईरान और अमेरिका के बीच दो हफ्तों तक इस्लामाबाद में बातचीत होगी और यह बातचीत सिर्फ इन्हीं शर्तों पर होगी। ईरान ने साफ कहा कि इसका मतलब जंग खत्म होना नहीं है। उनका कहना है कि जंग तभी खत्म मानी जाएगी जब 10 पॉइंट्स प्लान के सारे डिटेल्स बातचीत में फाइनल हो जाएंगे। बातचीत 11 अप्रैल से इस्लामाबाद में शुरू होगी। ईरान ने कहा है कि उसे अमेरिका पर भरोसा नहीं है। इसलिए फिलहाल दो हफ्ते का समय दिया गया है। जिसे जरूरत पड़ने पर बढ़ाया भी जा सकता है।
ईरान का संदेश यह भी है कि अगर बातचीत में दुश्मन की हार पक्की होती है तो इसे बड़ी ऐतिहासिक जीत माना जाएगा। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो ईरान मैदान में लड़ाई जारी रखेगा जब तक उसकी सभी मांगे पूरी नहीं हो जाती। आखिरी चेतावनी भी दी गई है कि हमारी उंगली ट्रिगर पर है। दुश्मन की जरा सी गलती पर भी पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा। अब बात करते हैं इजराइल की। इजराइल इस सीज फायर में इजराइल की क्या भूमिका रही? तो फिलहाल अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इजराइल ने भी के लिए हामी भर दी है।
सीएनएन की रिपोर्ट में एक वाइट हाउस अधिकारी के हवाले से दावा किया गया है कि इसी खबर को इजराइल के पब्लिक ब्रॉडकास्टर कैन ने भी चलाया है। वाइट हाउस के एक सोर्स ने इजराइल के चैनल 12 से कहा कि सीज फायर तभी लागू होगा जब ईरान स्टेट ऑफ हार्मोस खोलेगा। हालांकि अभी तक इजराइल या अमेरिका की तरफ से कोई भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है इजराइल के लिए। चलिए अब बात करते हैं पाकिस्तान की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच जो सीज फायर हुआ है उसमें उनके सहयोगी देश भी शामिल हैं। जैसे कि लेबनान और अन्य देश। उन्होंने बताया कि यह सीज़ फायर अभी से लागू हो चुका है।
शबाज़ शरीफ ने दोनों देशों की लीडरशिप को धन्यवाद दिया है और कहा है कि दोनों पक्षों ने समझदारी दिखाई है। उन्होंने आगे बताया कि अब अगला कदम इस्लामाबाद टॉक्स होगा जिसके लिए दोनों देशों के रिप्रेजेंटेटिव्स को 10 अप्रैल को इस्लामाबाद बुलाया गया है ताकि सभी मुद्दों पर आखिरी समझौता हो सके। शरीफ ने उम्मीद जताई है कि यह बातचीत परमानेंट शांति की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा और आने वाले दिनों में और अच्छी खबरें भी मिल सकती है। साथ ही इराक जो है इराक ने भी सीज फायर का स्वागत किया है।
इराक के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि इस समझौते से तनाव कम होगा और इलाके में सुरक्षा और स्थिरता बढ़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि सभी पक्षों को सीजफायर का पूरी तरह पालन करना चाहिए और किसी भी तरह की नई तनाव की तरफ बढ़ने से बचना चाहिए। तो फिलहाल इस खबर में इतना ही।
