ईरान ने तोड़ी अमेरिका की कमर कई सैनिकों को बंदी बनाने का दावा!

मिडिल ईस्ट में जारी n के बीच अब एक नया और चौंकाने वाला दावा सामने आया है। ईरान के एक शीश सुरक्षा अधिकारी ने दावा किया है कि इस के दौरान कई अमेरिकी सैनिकों को बंदी बना लिया गया है। यह दावा ऐसे समय आया है जब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है और पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ता जा रहा है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारी जानी ने सोशल मीडिया पर यह दावा किया। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि लड़ाई के दौरान कई अमेरिकी सैनिक जिंदा पकड़े गए हैं।

लारी जानी का कहना है कि अमेरिका इन सैनिकों को मारे जाने की बात कह रहा है। लेकिन असल में उन्हें बंदी बनाया गया है। अपने बयान में उन्होंने लिखा कि सच्चाई ज्यादा समय तक छिपाई नहीं जा सकती। यह पहली बार नहीं है जब तेहरान की ओर से ऐसे बड़े दावे किए गए हैं। इससे पहले भी ईरान ने दावा किया था कि उसके जवाबी हमलों में 500 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं।

ईरानी सरकारी मीडिया इन दावों को लगातार प्रसारित कर रहा है और कह रहा है कि अमेरिका अपने असली नुकसान को छिपा रहा है। लेकिन अमेरिका ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने कहा है कि ईरान के यह दावे झूठ और भ्रामक जानकारी हैं। पेंटागन के अधिकारियों के मुताबिक किसी भी अमेरिकी सैनिक को बंदी नहीं बनाया गया है और जिन सैनिकों की मौत हुई है उनकी पुष्टि पहले ही की जा चुकी है। अब तक ईरान ने भी अपने दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है। ना तो किसी सैनिक की पहचान बताई गई है और ना ही कोई तस्वीर या वीडियो जारी किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा मामला सूचना युद्ध यानी इंफॉर्मेशन वॉर का हिस्सा हो सकता है। आधुनिक युद्धों में केवल हथियार ही नहीं बल्कि सूचना और प्रचार भी एक बड़ा हथियार बन चुका है। दोनों पक्ष अक्सर ऐसे दावे करते हैं जो उनके समर्थकों का मनोबल बढ़ा सकें और दुनिया की राय को प्रभावित कर सकें। लेकिन अगर कभी यह साबित हो गया कि अमेरिकी सैनिक सच में बंदी बनाए गए हैं तो इससे युद्ध और भी खतरनाक मोड़ ले सकता है। ऐसी स्थिति में अमेरिका की ओर से बड़ी सैन्य कार्यवाही भी हो सकती है। इसी बीच यह अब अपने नवे दिन में प्रवेश कर चुका है और पूरे मिडिल ईस्ट में हमले जारी हैं। इजराइल ने लेबनान में हिजबुल्ला के ठिकानों पर हमले किए हैं। जिनमें कई लोगों की मौत की खबर है।

वहीं ईरान ने भी पश्चिम एशिया में अमेरिकी और इजराइली ठिकानों पर कई जवाबी हमले किए हैं। इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र को युद्ध के एक बड़े खतरे की ओर धकेल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो यह संघर्ष जल्द ही पूरे मिडिल ईस्ट में फैल सकता है।

फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या ईरान अपने दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश करता है या यह सिर्फ युद्ध के बीच चल रही एक नई सूचना लड़ाई है। फिलहाल के लिए बस इतना ही।

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