ईरान और इजराइल की लड़ाई लगातार जारी है इस लड़ाई के बाद अब अमेरिका और इजराइल खामने को अपने निशाने पर लेना चाहते हैं लेकिन इराक के सबसे बड़े शिया धर्मगुरु ने अमेरिका और इजराइल दोनों को खुली डर दे रहे है।
न्यूज़ एजेंसी एएफबी की रिपोर्ट के मुताबिक अयातुल्लाह अली सिस्तानी ने गुरुवार को खामने की ओर इशारा करते हुए कहा कि अगर सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नेतृत्व को निशाना बनाया गया तो इसके भयंकर परिणाम होंगे उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र में लोगों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी और सभी के हितों को गंभीर नुकसान पहुंचेगा उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वे इस युद्ध को समाप्त करने और ईरान के कार्यक्रम का शांतिपूर्ण समाधान खोजने के लिए हर संभव कोशिश करें इराक के शीर्ष धर्मुरु का यह बयान तब सामने आया जब ट्रंप ने कहा कि उन्हें पता है कि खामोई कहां छिपे हैं।
लेकिन अभी अमेरिका उन पर हमला नहीं करेगा ट्रंप को जवाब देते हुए खामन ने तब कहा था कि अगर इजराइल के साथ लड़ाई में अमेरिका अपनी सेना भेजता है तो उसे हम ऐसा नुकसान पहुंचाएंगे कि वह सोच भी नहीं सकता अगर अलसिस्तानी की बात करें तो अलसिस्तानी दुनिया के प्रमुख शिया धर्मुरुओं में से एक माने जाते हैं उन्हें शिया इस्लाम में मजा तकलीद का दर्जा प्राप्त है यानी वो धार्मिक नेता जिसकी व्याख्याओं और आदेशों का अनुसरण शिया मुसलमानों के लिए जरूरी माना जाता है।
भारत समेत दुनिया के कई देशों के शिया मुसलमान उन्हें अपना मार्गदर्शक मानते हैं अयातुल्लाह अली अलस्तानी सार्वजनिक रूप से जीवन में दूरी बनाए रखते हैं वह बहुत कम मौकों पर सामने आते हैं हालांकि उन्होंने 2014 में आईएसआईएस के खिलाफ इराक की जनता से देश की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की थी जो उस समय काफी प्रभावशाली भी साबित हुई।
आपको बता दें कि अलस्तानी का संबंध सद्दाम हुसैन की सरकार से कभी सहज नहीं रहा कई रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें वर्षों तक नजरबंद रहना पड़ा इसके बावजूद उन्होंने खुद को सक्रिय राजनीति से दूर रखा 2003 में जब अमेरिका ने इराक में एक गवर्निंग काउंसिल बनाने की योजना पेश की तो अल्सिस्तानी ने उसमें शामिल होने से इंकार कर दिया ये कदम उनकी स्वायत्तता और सिद्धांतों के प्रतिबद्धता का प्रतीक माना गया बता दें कि ईरान इजराइल युद्ध में अगर अमेरिका उतरता है तो पाकिस्तान के रास्ते से यह सब होगा।
आपको बता दें ट्रंप ने असीम मुनीर से मुलाकात में पाकिस्तान से बिना शर्त रणनीतिक और सैन्य सहयोग मांगा है अमेरिका चाहता है कि अगर अमेरिका ईरान से युद्ध करता है तो पाकिस्तान अमेरिका का साथ दे रणनीतिक तौर पर अमेरिका पाकिस्तानी एयरबेस जमीनी स्तर पर लॉजिस्टिक समर्थन और नौसैनिक मार्गों का उपयोग करना चाहता है इसके बदले में पाकिस्तान को अमेरिका एक प्रमुख रीजनल प्लेयर के तौर पर स्थापित होने में मदद देगा।
आपको बता दें कि फिलहाल अमेरिका इजराइल और ईरान युद्ध में दखल नहीं देगा राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले को वाइट हाउस के प्रवक्ता ने पढ़कर सुनाया जिसके मुताबिक ईरान के साथ बातचीत की संभावना है यह बातचीत निकट भविष्य में हो सकती है बातचीत के आधार पर दो सप्ताह के बाद यह तय किया जाएगा कि अमेरिका लड़ाई में हिस्सा लेगा या फिर नहीं।
