उम्र घटवाने के लिए शख्स पहुंचा इलाहाबाद हाईकोर्ट , धोखाधड़ी में पकड़ा गया!

उम्र पूछे जाने पर कई लोग एकआध साल कम करके ही बताते हैं और यह बड़ा ही कॉमन सा अटेंड है क्योंकि बढ़ती उम्र लोगों के दिलों को मंजूर नहीं है। लेकिन क्या हो अगर आप अपनी उम्र एक आध साल नहीं पूरे 11 साल कम करके बता दें। असल में एक मिलेनियल जो है वो जेएनजी वालों की जमात में शामिल होना चाह रहा था।

चाहना तो खैर एक बात है लेकिन अगर आप इस चाहत को लेकर सरकारी दफ्तरों में पहुंच जाए फिर क्या होता है वही आपको हम इस वीडियो में बताने वाले हैं। तो यह मामला आया है उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से जहां उम्र घटाने के चक्कर में एक युवक पर एफआईआर हो गई है। हुआ यह कि प्रयागराज के रहने वाले शिव शंकर पाल ने पासपोर्ट विभाग में जाकर कहा कि उनके पासपोर्ट में जो जन्मतिथि लिखी है वो गलत लिखी है।

पहले सरकारी रिकॉर्ड में उनकी जन्मतिथि 11 जुलाई 1994 थी। लेकिन अब वह इसे बदलकर 11 जुलाई 2005 करवाना चाहते थे। यानी कागजों में खुद को पूरे 11 साल छोटा दिखाने की कोशिश। जब पासपोर्ट विभाग ने उनके डॉक्यूमेंट्स वेरीफाई किए तो गड़बड़ी साफ नजर आई। स्कूल के जो सर्टिफिकेट थे और पुराना जो आधार कार्ड था उनमें जन्मतिथि 1994 ही दर्ज थी। लेकिन कुछ समय बाद एक नया आधार कार्ड भी सामने आया जिसमें जन्मतिथि लिखी थी साल 2005।

बस यहीं पर मामला उलझ गया। मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट तक पहुंचा। कोर्ट की बेंच में बैठे थे जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता। उन्होंने कहा कि अगर आवेदक की जन्मति 2005 मान भी ली जाए तो इसका मतलब यह होगा कि शिव शंकर पाल ने हाई स्कूल की परीक्षा छ साल की उम्र में ही दे दी थी। इतना ही नहीं याचिकाकर्ता जो थे शंकरपाल उन्होंने एक नया जन्म प्रमाण पत्र भी पेश किया जो कि ग्राम पंचायत प्रयागराज से हाल ही में जारी हुआ था और उसमें भी उनकी जन्मतिथि जो है वो 2005 दर्ज थी। कोर्ट ने कहा कि इतनी बड़ी हेराफेरी बिना किसी की मिलीभगत के तो संभव है ही नहीं। असल में शिव शंकर पाल को साल 2022 में पासपोर्ट मिल चुका था।

अब वह उसमें अपनी जन्मतिथि बदलवाना चाहते थे। जब पासपोर्ट अधिकारियों ने उनकी मांग को नहीं माना तो वह पहुंच गए कोर्ट। लेकिन कोर्ट ने उसकी बात मानने की बजाय पूरे मामले की परत खोल कर रख दी। हाईकोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि रिकॉर्ड से छेड़छाड़ दिख रही है और नियत भी सही नहीं लगती है। इसलिए कोर्ट ने प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर को यह आदेश दिया कि शिव शंकर पाल के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज बनाने का मामला दर्ज किया जाए।

साथ ही जिन ग्राम पंचायत अधिकारियों ने ऐसा जन्म प्रमाण पत्र जारी किया है उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाए। कोर्ट ने कहा ये जो हालात सामने आए हैं बहुत ही शॉकिंग है। याचिकाकर्ता ने प्रयागराज की ग्राम पंचायत से जारी एक प्रमाण जन प्रमाण पत्र तक जमा करवा दिया है जो कि 4 नवंबर 2025 का है और इस प्रमाण पत्र में उसकी जन्म तिथि 11 जुलाई 2005 लिखी हुई है।

कागजों में इस तरह की हेराफेरी बेहद गंभीर और डिस्टर्बिंग है और यह साफ दिखाता है कि सिस्टम में भ्रष्टाचार कितनी गहराई तक फैला हुआ है। यह कोर्ट की टिप्पणी है। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि इस आदेश को टाला नहीं जा सकता। मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी।

उस दिन अदालत यह देखेगी कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है या नहीं। अगर कोर्ट के आदेश का पालन नहीं हुआ तो कोर्ट खुद सख्त कदम उठा सकती है। कुल मिलाकर एक मिलेनियल कागजों पर जिनजी नहीं बन पाया। उल्टा उस पर एफआईआर हो गई इसी चक्कर में।

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