मिल गया ‘ इमाम हुसैन’ का घोड़ा, करबला का जुलजना, ये है ख़ासियत!

लखनऊ के तालकटोरा क्षेत्र के कर्बला से चोरी हुआ कीमती ईरानी नस्ल का जुलजना घोड़ा पुलिस ने उन्नाव से बरामद कर लिया है। इस एक घोड़े को ढूंढने के लिए पुलिस से लेकर आमजन सभी लोग लगे हुए थे क्योंकि इस घोड़े को खोजने वाले को ₹50,000 का इनाम दिया जाना था। अब यह घोड़ा बरामद हो चुका है और साथ ही आरोपी को भी हिरासत में ले लिया गया है।

लेकिन सवाल यह है कि आखिर इस घोड़े में ऐसा क्या है जिसके मिलने से तमाम लोग काफी खुश हैं? आइए जानते हैं। दरअसल जुलजना घोड़ा लंबे समय से कर्बला क्षेत्र के शान है और धार्मिक आयोजनों से जुड़ा हुआ था। यह घोड़ा ना सिर्फ आर्थिक रूप से कीमती है बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी इसका खास महत्व माना जाता है।

जब लोगों को घोड़ा गायब होने की जानकारी मिली तो तुरंत आसपास तलाश की गई लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लग सका। जिसके बाद शिया समुदाय के लोगों में काफी मायूसी छा गई। ईरानी नस्ल का यह घोड़ा करीब डेढ़ साल पहले उत्तराखंड से लाया गया था। इसकी कीमत उस समय ₹4.5 लाख थी। अब लखनऊ से चोरी होने वाला ईरानी नस्ल का घोड़ा बरामद हो चुका है। उसे उन्नाव के पास मोराबा गांव से सही सलामत बरामद किया गया है।

वहीं घोड़ा चोरी का आरोपी सलमान उर्फ़ छोटू को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। बताया जा रहा है कि पूछताछ में उसने बताया कि पहले वह घोड़ा मालिक के घर पर काम करता था। वहीं उसकी देखभाल करता था। उसे पता था कि घोड़ा कितना कीमती है। चुराने के बाद उसने घोड़े को ₹1.5 लाख में बेच दिया था। सैयद फैजी ने बताया कि 24 दिसंबर को जब से घोड़ा गायब हुआ था तब से 5 लाख शिया समुदाय में गम की लहर थी। दुलदुल घोड़ा गायब होने के बाद शिया समुदाय के लोग बेहद मायूस थे। दुलदुल घोड़े के लिए मस्जिदों में दुआ हो रही थी।

इस दुआ का यह असर है कि लगभग 5 दिन बाद घोड़ा सही सलामत बरामद हो गया है। दुलदुल घोड़े को उन्नाव से पूरी सुरक्षा के साथ वापस लखनऊ ताल कटोरा कर्बला लाया गया। उसी अस्तबल में उसे रखा गया है जो खास दुलदुल के लिए तैयार किया गया था। देखिए यहां पे जो जुलजना था यह 8 महीने का आया था और यहां पे काफी टाइम हो गया था। करीब डेढ़ साल हो गए थे इसको यहां पे आए हुए।

तो एक कर्बला में सबकी आस्था भी जुड़ी हुई है और शिया कौम की भी आस्था जुड़ी हुई है। क्योंकि मुहर्रम में सबके यहां मजलिसों में भी जाता था और अंजुमने भी बुलाती थी। तो एक बहुत गमजदा माहौल बना हुआ है लोगों को कि हर आदमी पूछ रहा है कि कैसे गया। अब चलिए आपको बताते हैं कि जुलजनाह घोड़े की क्या है खासियत।

लखनऊ की कर्बला से चोरी हुआ जुलजना घोड़ा सिर्फ एक महंगा जानवर नहीं शिया मुस्लिम समुदाय की गहरी धार्मिक आस्था का प्रतीक है। यही वजह है कि इसे लेकर शहर में इतना तनाव और भावनात्मक माहौल है। जुलजना वह घोड़ा माना जाता है जिसका संबंध कर्बला की जंग में इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम से जोड़ा जाता है। प्रतीकात्मक रूप से इसे इमाम का घोड़ा माना जाता है।

मुहर्रम के दौरान आशुरा के रोज ताजिया और अलम के साथ निकलने वाला शोक जुलूस में जुलजना को बहुत सम्मान से शामिल किया जाता है। लोग इसे छूना, देखना और उसकी जियारत करना सौभाग्य मानते हैं। यह घोड़ा बलिदान, शहादत, इंसाफ और कर्बला की याद का प्रतीक है।

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