हिजाब कंट्रोवर्सी पर नीतीश कुमार के खिलाफ केस क्यों नहीं कर रही पुलिस?

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने 15 दिसंबर को नियुक्ति पत्र सौंपते वक्त एक डॉक्टर का हिजाब खींच दिया। जिसके बाद से लगातार यह मामला तूल पकड़ रहा है। कई लोग इसके लिए नीतीश कुमार की आलोचना कर रहे हैं। जबकि कई लोग उनके सपोर्ट में भी आ गए हैं। समर्थकों के अपने तर्क हैं। जबकि आलोचना करने वालों का मानना है कि यह एक आम घटना नहीं है बल्कि एक क्राइम है। इस तरह आप किसी महिला के कपड़े नहीं खींच सकते। भले ही वह हिजाब ही क्यों ना हो।

इसी दलील के बीच बिहार पुलिस के सबसे बड़े अधिकारी यानी बिहार पुलिस मुखिया डीजीपी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। प्रेस कॉन्फ्रेंस का मुद्दा यह हिजाब कंट्रोवर्सी नहीं था। लेकिन स्वाभाविक है कि जब देश में ये घटना इतना बड़ा मुद्दा बन चुकी है तो डीजीपी से भी इस पर सवाल पूछा गया। सवाल कि इस घटना पर पुलिस क्या एक्शन ले रही है? इसके लिए पत्रकार ने बिहार के उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का एक बयान याद दिलाया। सम्राट चौधरी बिहार के होम मिनिस्टर भी हैं। लिहाजा राज्य में लॉ एंड ऑर्डर मेंटेन करने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की है।

इसी का हवाला देकर पत्रकार ने वहां कोट किया कि सम्राट चौधरी कहते हैं सड़क पर क्या कहीं पर भी कोई दुपट्टा खींच लेता है तो उसे छोड़ा नहीं जाएगा। तो क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की हिजाब कंट्रोवर्सी पर पुलिस ने कोई संज्ञान लिया है? इसके बाद बिहार डीजीपी विनय कुमार ने जो जवाब दिया है उसमें आपको इस सवाल का जवाब मिले तो हमें कमेंट्स में लिखकर जरूर बताइएगा। पहले आप सवाल सहित जवाब सुनिए।

गृह मंत्री सम्राट चौधरी जी ने कहा कि कोई अगर सड़क पर या कहीं पर अगर दुपट्टा खींच लेता है उसको छोड़ा नहीं जाएगा। क्या मुख्यमंत्री के हिजाब प्रकरण पर पुलिस ने कोई संज्ञान लिया है? देखिए इसमें जो जो आपने सार्वजनिक स्थलों पर इस प्रकार के मनचले लोगों के बारे में बताया तो इसके लिए अभिया ब्रिगेड स्टार्ट किया गया है। उसके लिए हम लोग अगले वर्ष में जो एक बहुत बड़ी योजना है करीब 2000 स्कूटी खरीदने का प्रस्ताव अभी हम लोगों ने बना के भेजा है और उसमें हमारी जो महिला सिपाही है महिला सब इंस्पेक्टर है।

है उनको उसमें तैनात किया जाएगा और जो संवेदनशील बिंदु है स्कूल के सम्मुख कॉलेज के सम्मुख कोई कोचिंग सेंटर है उसके सम्मुख तो उन सभी संवेदनशील जगहों पर यहां पर इस प्रकार के मंचलों के द्वारा छेड़खानी आने की संभावना प्रबल रहती है। मॉब लिंचिंग के बारे में कुछ बताएंगे। देखिए के लिए कानून भी बन गया है और मॉब लिंचिंग कभी जैसे अभी जो नवादा में घटना हुई है नवादा में जो घटना हुई है उसमें 10 लोगों पे नामजद किया गया था और लगभग सभी की एक एक की गिरफ्तारी लंबित है।

गिरफ्तारी नहीं हुई है। नहीं सब गिरफ्तार कर लिया गया। आपको सूचना नहीं है। गिरफ्तारियां हुई है। उसमें ज्यादातर की गिरफ्तारियां हो गई है। कुछ ही लोग बचे हुए हैं। दो बचे डीजीपी का जवाब चल ही रहा था कि बीच में किसी ने टोकते हुए कहा सर के बारे में कुछ कहेंगे। शायद यह सवाल पूछने वाले व्यक्ति सीएम नीतीश कुमार से जुड़ी कंट्रोवर्सी पर जवाब नहीं सुनना चाहते थे इसलिए टोक दिया। मगर उनके टोकने से उन लोगों के लिए भी जवाब अधूरा रह गया जो इसका जवाब सुनना चाहते थे। क्योंकि मॉब लिंचिंग वाला सवाल आते ही डीजीपी विनय कुमार ने क्षण भर भी नहीं लगाया अपनी बात को उसी ओर मोड़ने में।

वैसे नीतीश कुमार हिजाब कंट्रोवर्सी पर पुलिस क्या कर रही है? यह सवाल इसलिए भी जरूरी हो जाता है क्योंकि उसे लेकर अब एफआईआर भी दर्ज की जाने लगी है। मरहूम शायर मुनववर राणा की बेटी और समाजवादी पार्टी नेता सुमैया राणा ने भी इस मामले को लेकर एफआईआर लिखने के लिए कंप्लेंट दी थी। ऐसा उन्होंने घटना के ठीक एक दिन बाद ही कर दिया था। देखिए सोशल मीडिया के माध्यम से एक वीडियो बहुत ही अजीबोगरीब उत्तर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी की वायरल हो रही थी जिसमें उन्होंने एक हिजाबी महिला का ऐसे करके उसको नीचे किया जबकि वो चेहरा ढकी हुई थी।

अगर वो चेहरा ढक के आई थी तो इसका मतलब ये है कि वो चेहरा ढकना चाहती थी और ढकती होगी। उसको इस तरह किसी पुरुष द्वारा बिल्कुल सार्वजनिक तौर पर उसको नीचे करना एक महिला की के साथ इस तरीके का कृत करना यकीनी तौर पर एक अपमान है उसके लिए। और ये एक महिला की बात नहीं है। मैं भी हिजाब करती हूं और जो भी इस तरीके का पर्दे का एतमाम करता है, सर ढकता है या मुंह ढकता है उसको इस बात से बहुत बड़ी गुरेज है कि उसके साथ इस तरीके का कृत किया जाए। एक संवैधानिक पद पर बैठे हुए व्यक्ति के द्वारा इस तरीके का कृत करना इसका मतलब कि आप अपने दूसरे छोटे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा रहे हैं कि वो इस तरीके की हरकत करें। इसके जो नतीजे हैं वो बहुत दूरगामी हो सकते हैं।

तो इसी को लेकर के और उसके बाद आज भाजपा के एक सहयोगी दल जिसके नेता संजय निषाद हैं उन्होंने कहा बहुत ही अभद्र बात करी है कि सिर्फ चेहरे पे ही हाथ लगा कहिए कहीं और नहीं लगा। नहीं तो क्या बवाल होता। मुझे लगता है कि यह एक जानबूझकर समाज में रोष व्याप्त करने की कोशिश की जा रही है। उसी को लेकर के यहां पर कैसरबाग कोतवाली में मैंने एक तहरीर दी है। मुकदमा लिखवाया है और उस पर जांच करके वो मुकदमा सुमैया की कंप्लेंट करने के दो दिन बाद उनका एक और वीडियो आया। उन्होंने दावा किया कि शिकायत लिखाने के एवज में पुलिस ने आरोपियों पर कारवाई करने के बजाय उन्हें ही हाउस अरेस्ट कर लिया है।

एक्चुअली हमने जो नीतीश कुमार जी और इनके संजय निषाद के लिए जो एक तहरीर दी थी कैसरबाग कोतवाली में इनके खिलाफ मुकदमा लिखने के लिए जो उन्होंने बिहार में जिस तरह महिला को एक उसका हिसाब खींचा था और इन्होंने बोला था कि कहीं और हाथ नहीं लगाया ये वो उसके खिलाफ जब हमने बात की तो उन्होंने कोई मुकदमा नहीं लिखा और बल्कि ऑफिसर्स ने यह बात कही केसरबाग कोतवाली की आज कि इस पर यहां से कोई मुकदमा नहीं लिखा जाएगा जबकि आईटी एक्ट के हिसाब से वो हम उसको सोशल मीडिया पर देखने के बाद व्यक्ति कहीं से भी आहत हो या किसी भी कोने से मुकदमा लिखाया जा सकता है।

बहरहाल क्योंकि सत्ता में बैठे लोग हैं उनकी परवरिश हो रही है उन्हीं के हिसाब से तो उसको लेके आज लखनऊ कमिश्नर के पास एक तहरीर देने की तैयारी थी जाने के लिए तो बस उसी में पता नहीं सूंघ के आ गए। क्या ये मतलब आपको रोक रहे हैं या यहां पे खाली सिक्योरिटी पॉइंट ऑफ व्यू से या हाउस रिस्क क्या आपको क्या लग रहा है? नहीं सिक्योरिटी तो इसलिए नहीं हो सकती क्योंकि जब मैंने हमले वाली बात कही थी मुझे मिल रही थी तब तो मेरा इस पर भी मुकदमा नहीं लिखा था कैसे कोतवाली में तो यह रखवाली तो मेरी नहीं कर सकते हैं और आप देखिए कि सबसे बड़ी बात यह है कि संजय निषाद जैसे व्यक्ति जिसने इतनी बड़ी गंदी बात कही एक महिला के लिए उसको उसके लिए सुरक्षा बढ़ा दी आज पुलिस ने तो उसको लेकर के यह हमारा विरोध है और हम पूरी तरीके से संवैधानिक प्रक्रिया की का सफर तय करते हुए हम यह चाहते हैं कि मुकदमा दर्ज हो और दर्ज करना पड़ेगा इनको क्योंकि अगर यह नहीं करेंगे तो हम हमारे पास दूसरे तरीके हैं, न्यायपालिका भी है।

सुमैया राणा ने कहा कि अगर पुलिस कोई एक्शन नहीं लेती है तो अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा। हालांकि यहां एक और बात साफ करनी जरूरी है कि सपा नेता सुमैया ने अपनी शिकायत यूपी पुलिस को सौंपी थी और प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल बिहार पुलिस के डीजीपी से पूछा गया है। जिस मामले पर ये सारी खबरें आ रही हैं उसके बैकग्राउंड की भी जानकारी पर बात कर लेते हैं। केस शुरू होता है 15 दिसंबर से बिहार के सीएम नीतीश कुमार राजधानी पटना में मुख्यमंत्री सचिवालय में थे। जहां एक कार्यक्रम जारी था। यह कार्यक्रम नियुक्ति पत्र बांटने का था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वहां 1000 से ज्यादा न्यूली अपॉइंटंटेड आयुष डॉक्टर्स को अपॉइंटमेंट लेटर बांटे। इन्हीं डॉक्टर्स में डॉ. नुसरत परवीन भी शामिल थी। जब वह अपना नियुक्ति पत्र लेने मंच पर पहुंची तो उन्होंने हिजाब पहना हुआ था। जब मुख्यमंत्री उन्हें पत्र सौंपने लगे तो वो हिजाब की ओर इशारा करते हुए बोले यह क्या है? फिर उन्होंने एकदम से डॉक्टर नुसरत के चेहरे से हिजाब खींच कर हटा दिया। स्वाभाविक सी बात है कि सीएम का कार्यक्रम था तो कैमरे लगे हुए थे। वीडियो कैद भी हुआ और सोशल मीडिया पर वायरल भी।

तभी से आपत्तियों का दौर जारी है। खबर यह भी आई कि डॉ. नुसरत परवीन ने इस घटना के चलते अपमानित महसूस किया और इसी वजह से उन्होंने नौकरी लेने से भी इंकार कर दिया है। बाद में 20 दिसंबर को ऑफिशियल सोर्सेस के हवाले से रिपोर्ट्स चलने लगी कि डॉ. नुसरत सरकारी तिब्बी कॉलेज में अपनी पोस्ट पर ज्वाइन करेंगी। हालांकि 22 दिसंबर को यानी जब हम यह आपके लिए रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं तब आई जानकारी के मुताबिक डॉक्टर नुसरत परवीन ने ड्यूटी ज्वाइन नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि उनसे कांटेक्ट नहीं हो पा रहा है ना ही उनके परिवार से संपर्क स्थापित किया जा सका। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक पटना के सिविल सर्जन अविनाश कुमार सिंह ने पुष्टि की है कि डॉक्टर नुसरत परवीन ने शनिवार शाम 7:00 बजे तक दफ्तर में रिपोर्ट नहीं किया था। जिसके बाद उस दिन उनके ड्यूटी जाइन करने की संभावना खत्म हो गई। उन्होंने आगे कहा मुझे जानकारी मिली है कि जॉइनिंग की आखिरी तारीख 20 दिसंबर 2025 से आगे बढ़ा दी गई है। यह देखना होगा कि इसके बाद भी डॉक्टर परवीन जॉइ करती हैं या नहीं। बाद में उन्होंने 22 दिसंबर को इंडिया टुडे से जुड़े पत्रकार सुजीत कुमार गुप्ता के साथ बातचीत में यह कंफर्म किया कि जॉइनिंग की ये डेडलाइन बढ़ाकर 31 दिसंबर 2025 तक कर दी गई है।

अब देखना यह है कि डॉक्टर नुसरत परवीन इस दौरान ड्यूटी जॉइ करती हैं या नहीं। अगर नहीं करती है तो क्या यह डेडलाइन फिर से बढ़ाई जाएगी या फिर उनकी नियुक्ति रद्द कर दी जाएगी? बड़ा सवाल तो यह भी है कि पुलिस इस केस में क्या करती है? जैसे-जैसे इन सवालों के जवाब मिलने शुरू होंगे हम आप तक खबरें लाते रहेंगे।

Leave a Comment