हरीश राणा ने 13 साल के अंतहीन कष्ट के बाद आखिरकार दुनिया को 24 मार्च की शाम को अलविदा कह दिया। 25 मार्च बुधवार की सुबह उन्हें पंचतत्व मेंविलीन कर दिया गया। हरीश राणा को जब श्मशान ले जाया गया था तो उनके पार्थिव शरीर को गुलाबी की गुलाब की पंखुड़ियों से सजायागया।
हरीश के पिता भाई-बहन मां ने उसे अंतिम विदाई दी। हरीश देश के पहले ऐसे इंसान बने जिन्हें सुप्रीम कोर्ट से इच्छा l की इजाजत मिली थी। हरीश राणा के माता-पिता ने बेटे के लिए इच्छाकी मांग की थी। जिस पर लंबे प्रोसेस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था।
11 मार्च को आज भले ही हरीश का शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया लेकिन उसका दिल आज भी धड़क रहा है। उसकी आंखों [संगीत] की चमक आज भी किसी की आंखों की रोशनी बनने को तैयार है। हरीश की जिंदगी पिछले [संगीत] 13 सालों से बिस्तर पर सिमटी हुई थी। जब उनके ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं बची तब पिता अशोक राणा ने सुप्रीम [संगीत] कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और इक्षा मृत्यु की याचिका लेकर पहुंचे। एम्स प्रशासन के सूत्रों ने बताया कि [संगीत] हरीश के परिवार ने उनकी दोनों कॉर्निया और हार्ट वॉल को दान कर दिया है।
इससे पहले पिता अशोक राणा और मां निर्मला देवी ने भी कहा था कि बेटे की यह पीड़ा खत्म हो तो उनके काम में आने [संगीत] वाले अंग को दान कर दिया जाएगा। और फिर मां-पिता ने हरीश के अंग जो उनकी से पहलेतक काम कर रहे थे और टिश्यू को दान कर दिया है। हरीश 13 सालों से कोमा में पैसिव यूथनेशिया के कारण उनका हार्ट, किडनी और लीवर दान नहीं हो सकता था क्योंकि वह काम करना बंद कर चुका था। एम्स प्रशासन ने हरीश की दोनों आंखों की कॉर्निया हार्ट के चारों बल्ब को सुरक्षित कर लिया है।
एम्स [संगीत] के विशेषज्ञ और डॉक्टरों का कहना है कि हरीश की कॉर्निया की जांच की जाएगी। अगर यह ठीक हुए तो दृष्टिबाधितयानी ब्लाइंड लोगों को की आंखों को रोशनी दे सकेगी।
मतलब दो लोग हरीश की कॉर्निया से इस दुनिया को देख सकेंगे। उनकी आंखें इस दुनिया को देखती रहेंगी और उन्होंने दुनिया को अविद्या कह दिया है। एम्स प्रबंधन का यह भी कहना है कि अंगदान के बाद हरीश के पार्थिव शरीर को परिवार को सौंपा गया। अब सुप्रीम कोर्ट ने एम्स जो है वह अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।
