जाने अनजाने जाने आपको कोई दुख जो पहुंचा हो हरीश राणा 31 साल के हरीश राणा चले गए दुनिया से और पीछे छोड़ गए यादें कभी ना खत्म होने वाली कजक और गम का घेरा घर के कोने का सूनापन लेकिन इस बीच सबकी आंखों को डब डबा गया एक भाई का अपनापन जो भले ही रिश्ते में हरीश से छोटा है।
लेकिन निभाता रहा बड़े का फर्ज जो अर्थी उठाते हुए रोता मुखाग्नि देते हुए टूटता घर के उस कोने को जहां भैया थे उसे निहारते हुए रात काटता है और सुबह होते ही पहुंच जाता है उसी दर पर जहां कल हरीश हुए थे पंच तत्वों में विलीन निभाने आगे की रस्म परंपराएंसाउथ दिल्ली के ग्रीन पार्क के मोक्ष धाम में विधिविधान के साथ नम आंखों से आशीष राणा फूल चढ़ाते हैं।
अस्थियां चुनते हैं एक टक राख में बदले भैया को निहारते हैं और हाथ जोड़कर मांगते हैं माफी। भले ही वह रस्म का हिस्सा रहा हो लेकिन भारी मन से भरे गले से आशीष राणा के बोले गए यह शब्द भावुक करने वाले हैं। आपको बता दें कि हरीश राणा के भाई आशीष राणा के इन भावुकता के पलों में उनके साथ थे उनके जीजा, उनके पिता और उनकी मां। अस्थियां चुनने के बाद यह परिवार निकल गया हरिद्वार ताकि हरीश को सौंपा जा सके मां गंगा की गोद में ताकि हरीश को मिल सकेमोक्ष। वो हरीश जिसने 13 साल तक बड़े दर्द को झेला वो मुक्त हो सके।
हरिद्वार में किया जाएगा हरीश का अस्थि विसर्जन। जिसके बाद पूरा परिवार जाएगा हिमाचल के अपने पैतृक गांव आगे की रस्मों को निभाने के लिए। दरअसल हरीश राणा का परिवार मूल तौर पर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा का रहने वाला है। पिता अशोक राणा परिवार को लेकर दिल्ली आ गए थे और होटल में नौकरी कर रहे थे।
लेकिन 21 अगस्त 2013 को हरीश के साथ हुआ ऐसा हादसा जिसने हंसते खेलते फिट हरीश को तब्दील कर दिया एक तरह से जिंदा लाश में सीमित कर दिया एक बेड तक पिता ने भरसककोशिश की हरीश को ठीक करने की पैसे भी पानी की तरह बहाए कई बड़े नामचीन डॉक्टरों से इलाज कराया लेकिन स्थिति में सुधार नहीं आया कहा गया कि हरीश के सिर में चोट लगी जिसकी वजह से वह कोमा में चले गए उनके ना ठीक होने की उम्मीद के बाद कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। मांगी गई इच्छा मृत्यु और 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इस पर परमिशन भी दे दी। लेकिन आपको बता दें कि एक ऐसा ही वीडियो 11 मार्च के बाद भी सामने आया था जब हरीश को एम्स ले जाया जा रहा था। उसके कुछ वक्त पहले ब्रह्मकुमारीज की एक दीदी हरीश को माफ करने और माफी मांगने के लिए कहती हैं। उसवक्त भी भावुकता का वो वीडियो हर किसी की आंखों को नम कर गया था। सबको माफ करते हुए तुम सब से माफी मांगते हुए आ जाओ। ठीक है।
आपको बता दें कि 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसले में हरीश राणा को पैसिव यूथनेशिया की परमिशन दी। जिसके बाद मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत 14 मार्च को हरीश राणा को दिल्ली गेम्स में एडमिट करवाया गया। जहां पैलिएटिव केयर यूनिट में एक्सपर्ट डॉक्टर्स की टीम उनके साथ रही। डॉक्टर्स ने सुप्रीम कोर्ट के डायरेक्शन के मुताबिक धीरे-धीरे लाइफ सपोर्ट सिस्टम को हटाने का काम शुरू किया। यह कोई अचानक लिया गया कदम नहीं था बल्कि पूरे मेडिकल निगरानी में चरणबद्ध तरीके से किया गया था। इस दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि हरीश को किसी भी तरह का दर्द या असुविधा ना हो।
उन्हें लगातार दर्द कम करने की दवाएं भी दी जाती रही और आखिरकार 24 तारीख को एम्स में हरीश ने अंतिम सांस ली और कल यानी कि 25 मार्च को ग्रीन पार्क के मोक्ष धाम में उनका किया गया अंतिम संस्कार। दिल्ली से गौरव पांडे के साथ ब्यूरो रिपोर्ट यूपी तक।
