हरियाणा के फरीदाबाद में रहने वाले एक कबाड़व्यापारी ने 15 लाख के गहने वापस लौटा दिए। मामला करीब 6 महीने पहले का है।सोने के मालिक अशोक शर्मा पिछले साल जनवरी में अपने परिवार के साथ कुंभ स्नान के लिए गए थे। चोरी से बचने के लिए उन्होंने घर का सारा सोना एक डिब्बे में बंद कर बोरे में रख दिया था। कुंभ यात्रा से उनकी वापसी तो हो गई, लेकिन सोने को बोरे से निकालना वह भूल ही गए थे। दीपावली की सफाई के दौरान उसी बोरे को कबाड़ समझकर परिवार के किसी सदस्य ने कबाड़ी को बेच दिया।
बेचने वाले शख्स को कतई अंदाजा नहीं था कि उसमें करीब 10 तोले सोने के गहने रखे हैं। अशोक शर्मा और उनके परिवार को दिवाली पूजन के समय सोने की सुध आई। फिर गहनों की तलाश शुरू हुई।
तलाशी के दौरान पता चला कि जिस बोरे में सोने को छुपाया गया था उसे तो कबाड़ी वाले को दिया जा चुका है। अब शर्मा जी घबराए हुए तुरंत कबाड़ कारोबारी हाजी अख्तर खान के पास पहुंचे। अख्तर खान ने उनके साथ मिलकर काफी देर तक कबाड़ में तलाश किया लेकिन सोना नहीं मिला। निराश होकर शर्मा वापस घर लौट गए।
बातआई गई हो गई। उन्होंने गहने मिलने की आस भी छोड़ दी। करीब 6 महीने बाद अख्तर खान अपने गोदाम में कबाड़ [संगीत] की छंटाई कर रहे थे। तभी उनकी नजर एक पन्नी पर गई। गौर करने पर उसमें सोने के गहने मिले। उन्होंने बताया 17 फरवरी को कुछ कबाड़ चेक कर रहा था तो पन्नी में पड़ा था। फिर चेक कराया सोना है। मुझे लगा कि उन्हीं शर्मा जी का है।
फिर उनको उनका सामान देने का निश्चय किया। सर ये छ महीने पहले कबाड़े में लाए थे। घर से कबाड़ा लाए। इन्होंने कबाड़ा स्क्रम बेचा और ये चले गए। हमने कुछ देखा भी नहीं। ये दो महीने बाद हमारे पास आए। कि हमारा कुछ गोल्ड आया हुआ है। तो मैंने कहा देख लीजिए अगर वो महीने 20 दिन पहले दो महीना पहले आते ना तो हम कैमरे में चेक कर देते।
मगर टाइम निकल चुका था मगर वहां नहीं मिला मगर उसके बाद में क्या होता है मैं परसों कुछ कबाड़ चेक कर रहा था तो उसमें एक पन्नी में पड़ा हुआ था किसी ने रख दिया डाल दिया होगा पीतल समझ के तो मैंने देखा कि ये गो हो सकता है उन्हीं का हो फिर मैंने उसको चेक भी करवाया कि हो सकता है ये पीतल ना हो कभी गलती से तो सुनार ने कहा ये 100% सोना है 22 कैरेट का उसका वेट करवाया तो 100 ग्राम निकला 2 ग्राम कम तो मैंने कहा ये मुनी शर्मा जी का है किसी और का नहीं है तो मैं फिर मैंने उनको वापस देने का विचार किया हाजी अख्तर खान ने सुनार के पास गहनों की जांचकराई जिससे तस्दीक हो पाई कि यह सोने के ही हैं। फिर उनको यकीन हो गया कि यह गहने अशोक शर्मा के ही हैं। इसके बाद उन्होंने अपने परिवार से राय ली।
सब ने मशवरा दिया कि गहने उसके असली मालिक को लौटा देने चाहिए। अख्तर बिना देर किए फरीदाबाद के एसीपी जितेश मल्होत्रा के दफ्तर पहुंचे और अशोक को भी गहने मिलने की जानकारी दे दी। एसीपी की मौजूदगी में उन्होंने शर्मा परिवार को उनकी अमानत वापस कर दी। गहने वापस मिलने पर परिवार ने कबाड़ी व्यापारी का आभार जताया और उनकी ईमानदारी की खुलकर प्रशंसा की।
