गैस की किल्लत के बाद ये देश आया सामने,करेगा भारत की मदद ।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान, इजराइल अमेरिका के बीच बढ़ती सैन्य टकराव की स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है। इस संघर्ष का असर केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं है बल्कि इसका प्रभाव दुनिया भर की ऊर्जा आपूर्ति पर भी अब साफ तौर पर दिखने लगा है। भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए यह स्थिति चिंता का कारण बन गई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस और तेल की सप्लाई में अनिश्चितता के कारण भारत में भी एलपीजी और नेचुरल गैस की उपलब्धता को लेकर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। कई जगहों से एलपीजी और प्राकृतिक गैस की कमी की खबरें सामने आई हैं। जिसके बाद केंद्र सरकार को वाणिज्यिक और घरेलू गैस के वितरण से जुड़े नियमों में तत्काल बदलाव करने पड़े ताकि आम उपभोक्ताओं और उद्योगों पर इसका असर कम से कम पड़े। भारत की ऊर्जा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं और ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ रही है।

भारत के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्त्रोतों की तलाश बेहद जरूरी है। इसी बीच कनाडा भारत की मदद के लिए आगे आया है और उसने भारत को लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी एलएनजी की सप्लाई देने का प्रस्ताव रखा है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कोनी ने साफ तौर पर कहा कि उनका देश एक एनर्जी सुपर पावर के रूप में भारत की तेजी से बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। दरअसल बुधवार को कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कोनी ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपना एक वीडियो बातचीत साझा की।

इस में कोनी ने कहा कि कनाडा दुनिया में सबसे कम कार्बन उत्सर्जन वाले और भरोसेमंद तरीके से उत्पादित एलएनजी का उत्पादन करता है। उन्होंने कहा कि कनाडा से मिलने वाली एलएनजी का इस्तेमाल एशिया और यूरोप के कई देशों में बड़े पैमाने पर हीटिंग, बिजली उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों के लिए किया जाता है। उनके मुताबिक कनाडा के पास साफ ऊर्जा उत्पादन की मजबूत क्षमता है। वह भारत जैसे तेजी से बढ़ते देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में एक स्थाई साझेदार बन सकता है। कोनी ने यह भी स्वीकार किया कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने वैश्विक गैस बाजार को बुरी तरह से प्रभावित किया है।

खासतौर पर क़तर से होने वाली गैस सप्लाई पर इसका असर पड़ा है जो एशिया के कई देशों के लिए प्रमुख आपूर्ति करता रहा है। इस युद्ध के कारण गैस की कीमतों में अचानक उछाल देखने को मिला है और कई देशों को अपने ऊर्जा आयात के स्त्रोतों पर दोबारा विचार करना पड़ रहा है। ऐसे में कनाडा खुद को एक भरोसेमंद और स्थिर सप्लायर के रूप में यहां पेश कर रहा है। कनाडा का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा मांग तेजी से बढ़ने वाली है। अनुमान है कि साल 2040 तक भारत की कुल ऊर्जा जरूरत लगभग दोगुनी हो जाएगी।

भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और औद्योगिक विकास, शहरीकरण और बढ़ती आबादी के कारण ऊर्जा की खपत लगातार बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत अपनी ऊर्जा नीति में बड़े बदलाव कर रहा है। भारत ने इस दशक के अंत तक अपने नवीनीकरणीय ऊर्जा क्षमता को 500 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही भारत अपने ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है। वर्तमान में भारत के कुल ऊर्जा मिक्षण में प्राकृतिक गैस की स्थिति लगभग 6 से 7% के आसपास है जिससे आने वाले वर्षों में लगभग दोगुना करने की योजना है।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को एलएनजी आयात बढ़ाना होगा और इसके लिए नए साझेदारी की जरूरत भी पड़ने वाली है। आपको बता दें इसी बीच पिछले महीने कनाडा के सरकारी प्रसारक की रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत ने कनाडा को यह संकेत दिया है कि वह वहां से उपलब्ध लगभग सभी तरह के ऊर्जा संसाधनों को खरीदने के लिए तैयार है।

रिपोर्ट्स की मानें तो भारत कच्चा तेल, एलपीजी, एलएनजी और यहां तक कि यूरेनियम जैसे संसाधनों के आयात में भी दिलचस्पी दिखा रहा है।

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