बैटल ऑफ गलवान का टीजर क्या आया? चीन तिलमिलाया फिर रहा है। 15 जून 2020 को गलवान के इलाके में भारत और चीन के सैनिकों की भिड़ंत पर बनी फिल्म का टीजर आने के 3 दिन बाद ही ग्लोबल टाइम्स में आर्टिकल आ गया है। ग्लोबल टाइम्स चीन का सरकारी मीडिया है। ग्लोबल टाइम्स ने बैटल ऑफ गैलवान के लिए लिखा है कि इसमें तथ्यों से छेड़छाड़ की गई है।
ग्लोबल टाइम्स के इस आर्टिकल की हेडलाइन है बॉलीवुड फिल्म बैटल ऑफ गलवान स्पार्क्स कंट्रोवर्सी फॉर डिस्टोर्टिंग फैक्ट्स एक्सपर्ट सेज़ नो ओवर द टॉप ड्रामा कैन अफेक्ट अ नेशंस सेक्रेड टेरिटरी। आर्टिकल में चीन के कुछ सोशल मीडिया के कमेंट्स शामिल कर यह साबित करने की कोशिश की गई है कि यह ओवर द टॉप फिल्म है। यानी जो कुछ हुआ उससे कहीं अधिक बहुत बढ़ा चढ़ाकर चीजें दिखाईगई।
एक यूजर सिका 98 का कमेंट लिखा गया है कि जब इतिहास में कुछ कमी रह जाती है तो बॉलीवुड की एंट्री होती है। टीजर के आखिर में लाठी लिए सलमान जिस तरह चीनी सैनिकों पर वार करते दिखते हैं चीनी उस सीन को गेम्स ऑफ थ्रोन्स की कॉपी बता रहे हैं। एक्टर और एक्स्ट्रा की ड्रेस और हेयर स्टाइल पर भी बात कर रहे हैं। अब बताते हैं चीन की हिपोक्रेसी। गलवान की जिस झड़प को केंद्र में रखकर बैटल ऑफ गलवान बनाई गई, उसमें भारत के 20 सैनिक शहीद हुए। चीन ने पहले तो नंबर नहीं बताए लेकिन जब बताए भी तो सिर्फ चार सैनिकों के मारे जाने की बात [संगीत] कबूल की। बाद में ऑस्ट्रेलिया के न्यूज़पेपर द कलेक्सोन ने सोशल मीडिया रिसर्च के एक ग्रुप के हवाले से रिपोर्ट किया कि गलवान की लड़ाई में चीन के 38 सैनिकों की जान गई। यानी जितना वो दावा कर रहे थे उससे नौ गुना ज्यादा। फिल्मों में सिनेमाई छूट ली जाती है। 38 को चार बताना, इतिहास को छिपाना होता है और बहादुरी को बढ़ा चढ़ाकर बताना। ग्लोबल टाइम्स के आर्टिकल में चीन के मिलिट्री एक्सपर्ट सॉन्ग जोंगपिंग को कोट किया गया है। वह कहते हैं कि भारत में नेशनलिज्म की भावना को भड़काने के लिए फिल्मों का इस्तेमाल होता है। सॉन्ग यह भी लिखते हैं कि ड्रामा कितना भी ओवर द टॉप हो देश की सेक्रेट टेरिटरी को प्रभावित नहीं कर सकता। इतनी विदुतापूर्ण बात चीन के एक्सपर्ट तब नहीं करते जब वो अरुणाचल प्रदेश को साउथ तिब्बत कहते हैं। मेंड्रिन में अरुणाचल की जगहों के नाम रखते हैं। यह होता है ओवर द टॉप। आधिकारिक तौर पर एक देश की संप्रभुता पर हमला करना| चीन को पता है कि वह अपनी सेना को लेकर बजट और तकनीक की कितनी भी बात कर ले भारतीय सैनिकों का मुकाबला आसान नहीं है। 2017 में डोकलाम में भारत के सैनिक डटे रहे और 73 दिन बाद चीनी सैनिक पीछे हटने को तैयार हुए। ईस्टर्न लद्दाख में भी भारत के डटे रहने के कारण ही चीन को पीछे हटने पर समझौता करना पड़ा। बता दें कि बैटल ऑफ गलवान में सलमान का किरदार बिहार रेजीमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल बी संतोष बाबू से प्रेरित है। उन्होंने चीनी सैनिकों को भारतीय इलाके में पेट्रोलिंग से रोका। गलवान की लड़ाई में तेलंगाना के रहने वाले बी संतोष बाबू को मणोपरांत महावीर चक्र दिया गया था। उनके अलावा गलवान में शहीद नायब सूबेदार नूडूराम सोरेन, हवलदार के पिलानी, हवलदार तेजेंद्र सिंह, नायब दीपक सिंह और सिपाही बुरतेज सिंह को गलवान घाटी के शौर्य के लिए वीरता मेडल दिया गया।
वहीं 14 अन्य सैनिकों को सेना मेडल मिला था। बैटल ऑफ गलवान 2026 के अप्रैल में रिलीज़ होगी फिल्म को अपूर्व लाखिया ने डायरेक्ट किया है। रही बात सेक्रेट टेरिटरी की तो पवित्रता की बात उसको नहीं करनी चाहिए जो विस्तारवादी सोच रखता हो। जिसने तिब्बत को हड़पा हो, भारत के अभिन्नंग अरुणाचल पर दावा करता हो, जिसके पाकिस्तान को छोड़कर लगभग हर पड़ोसी से जमीन को लेकर विवाद हो। चीन के इस तरह के गेम्स कहीं से भी सेक्रेट तो नहीं है।
