ईरान के हमले से दहल उठा दुबई एयरपोर्ट , कई लोग घायल।

एक बार फिर दुबई दहल उठा है। दुबई के आसमान में एक के बाद एक मिसाइलें और की बारिश हुई। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने दुबई एयरपोर्ट को एक बार फिर से निशाना बनाया है। जहां गिरने से भारतीय समेत चार लोग घायल हो गए हैं। इतना ही नहीं ईरान ने अपना अगला टारगेट भी सेट कर लिया है और खुल्लम खुल्ला बता दिया है कि हम मारेंगे यहां मारेंगे। कहां मारेंगे वह भी बताया है। जी हां, ईरान बदले की आग में झुलस रहा है।

किसी घायल शेर की तरह अकेला आठ देशों में हमला कर रहा है। अमेरिका और इजराइल को दांतों तले चने चबवा रहा है। इन आठ देशों पर ईरान इसलिए हमला कर रहा है क्योंकि उन्होंने अमेरिका को अपनी जमीन ईरान पर हमला करने के लिए दी।

अमेरिका ने इन्हीं देशों में अपने सैन्य बेस से हमला किया। इनमें से एक शामिल था यूएई जिसने बेस तो नहीं दिया लेकिन अमेरिका का साथ कई मामलों में दिया। दुबई मीडिया ऑफिस ने बताया कि हमले में भारतीय नागरिक को कुछ चोटें आई हैं। दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास हुए हमले में भारतीय नागरिक के अलावा घाना के दो नागरिक और एक बांग्लादेशी नागरिक भी घायल हुए हैं।

दुबई मीडिया ऑफिस ने एक्स पर एक बयान में कहा कुछ देर पहले दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट डीएक्सB के पास दो ड्रोन गिरे जिससे घाना के दो नागरिकों और एक बांग्लादेशी नागरिक को मामूली चोटें आई और एक भारतीय नागरिक को चोटें आई। एयर ट्रैफिक सामान्य रूप से चल रहा है।

हालांकि गिरने से कितना नुकसान पहुंचा यह स्पष्ट नहीं हो सका है। अधिकारी घटना के कारणों और ड्रोन के स्रोत की जांच कर रहे हैं। वहीं हमले के बाद भी फ्लाइट जारी है।

आपको बता दें कि दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट इंटरनेशनल ट्रैवल के लिए दुनिया का सबसे व्यस्त हब है। इससे पहले संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने बुधवार तड़के कहा कि उसके वायु रक्षा प्रणालियां ईरान से आने वाले मिसाइल और ड्रोन हमलों का लगातार जवाब दे रही हैं। दुबई में लोगों को सरकारी आपातकालीन मोबाइल अलर्ट भेजकर संभावित मिसाइल खतरे के बारे में चेतावनी दी गई है और तुरंत सुरक्षित इमारतों में जाने को कहा गया है।

हालांकि बाद में अधिकारियों ने स्थिति में सुधार होने पर चेतावनी वापस ले ली। वहीं यूएई के रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली सतर्क है और सहयोगियों के साथ तालमेल से और स्थिति मजबूत हुई है। वहीं मंत्रालय ने बताया कि पिछले 11 दिनों में 10475 ड्रोन और 270 मिसाइल हमले हुए जिनमें से अधिकतर को निष्क्रिय कर दिया गया है। ईरान ने बैंकों को निशाना बनाने की दी चेतावनी।

इस बीच ईरान ने एक बड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा कि वह क्षेत्र में स्थित अमेरिका और इजराइल से जुड़े आर्थिक केंद्रों, बैंकों और Google और माइक्रोसॉफ्ट जैसी अमेरिकी कंपनियों को भी निशाना बना सकता है। यह बयान कथित तौर पर एक ईरानी बैंक पर हुए हमले की प्रतिक्रिया में सामने आया। ईरान में रेवोल्यूशनरी गार्ड से संबंध खतम अल अंबिया मुख्यालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि एक ईरानी बैंक पर हुए हमले के बाद अब दुश्मन के वित्तीय संस्थान उनके निशाने पर हैं। ईरान ने क्षेत्र के नागरिकों को सलाह दी है कि वे सुरक्षा के लिहाज से इन बैंकों के 1 कि.मी. के दायरे से दूर रहें। इसके साथ ही ईरान ने उन दिग्गज अमेरिकी तकनीकी कंपनियों की सूचना जारी की है जिनकी तकनीक का उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। इनमें Google, Microsoft, एनवीjडिया, आईबीएम और ओरेकल जैसी कंपनियां शामिल हैं।

ईरानी मीडिया के अनुसार इन कंपनियों के इजराइल और कुछ खाड़ी देशों में स्थित कार्यालय और क्लाउड आधारित बुनियादी ढांचे अब ईरान के वैध सैन्य लक्ष्य हैं। ईरान का कहना है कि जैसे-जैसे युद्ध का दायरा बढ़ रहा है, वह अपने हमलों का विस्तार आर्थिक और तकनीकी संपत्तियों तक करने के लिए मजबूर हैं। अब फिलहाल ईरान लगातार हमले कर रहा है। हमारी अगली रिपोर्ट में देखिए इस युद्ध से जुड़ी बड़ी खबर। मिडिल ईस्ट में जारी जंग को पूरे 12 दिन हो चुके हैं और इसी बीच एक ऐसी धमकी सामने आई जिसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़ते तनाव के बीच एक ईरानी सैन्य अधिकारी ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान में रेजिंग चेंज यानी कि सत्ता परिवर्तन की कोशिश की गई तो ईरान अपने आखिरी प्रभावी से इजराइल के सबसे संवेदनशील चिकाने यानी कि डिमोना रिएक्टर को निशाना बना सकता है। यह धमकी इसलिए भी खतरनाक मानी जा रही है क्योंकि भले ही ईरान के पास आधिकारिक तौर पर नहीं है लेकिन रिएक्टर पर हमला होने की स्थिति में उसका असर किसी हमले से कम नहीं होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि परमाणु रिएक्टर में मौजूद भारी मात्रा में वातावरण में फैल सकता है। जिससे पूरे इलाके में बादल बन सकते हैं। इजराइल का कार्यक्रम लंबे समय से रहस्य और विवादों से घिरा रहा है। नेगेव रेगिस्तान में स्थित डिमोना का शिमोन पेरिस नेगेव रिसर्च सेंटर इजराइल का सबसे संवेदनशील ठिकाना माना जाता है। इस रिएक्टर का निर्माण 1958 में शुरू हुआ था और इसमें फ्रांस के गुप्त रूप से इजराइल की मदद करने की बात भी सामने आई थी। शुरुआत में जब अमेरिका ने इस परियोजना पर सवाल उठाए थे तो इजराइल ने इसे एक टेक्सटाइल फैक्टर बताया था। लेकिन कुछ साल बाद इसी साइट में काम करने वाले एक टेक्नशियन के खुलासे से साफ हो गया था कि वहां बनाया जा रहा था। 1962 से 1964 के बीच यह रिएक्टर सक्रिय हो गया था और माना जाता है कि 1967 तक इजराइल ने अपने पहले परमाणु हथियार तैयार कर लिए थे।

हालांकि इजराइल ने आज तक आधिकारिक तौर पर परमाणु हथियार रखने की बात स्वीकार नहीं की। वह हमेशा ना तो स्वीकार और ना ही इंकार की नीति पर कायम रहा है। लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं और विशेषज्ञ मानते हैं कि इजराइल दुनिया के उन नौ देशों में शामिल है जिनके पास परमाणु हथियार है। रिपोर्ट्स के मुताबिक डिमोनर रिएक्टर से अब तक लगभग तैयार किया जा चुका है। इसके अलावा छह दशक से जमा हुआ कचरा और अन्य भी वहां मौजूद है।

यही वजह है कि अगर इस को निशाना बनाया जाता है तो परमाणु तो नहीं होगा लेकिन की स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर डिमोना पर हमला हुआ तो धुआं पहले शहद और फिर इजराइल के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले सकता है। इजराइल के तटीय इलाकों तक यह बादल पहुंच सकता है।

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