भारत- पाकिस्तान तनाव रोकने के 120 घंटे में ही क्यों अपनी बात से पलटे ट्रंप?

आपको याद होगा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डॉन्ड ट्रंप ने सबसे पहले यह दावा किया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव शांत उन्होंने करवाया सोशल मीडिया पर सबसे पहले अपडेट भी उन्होंने किया था लेकिन यू टर्न मामलों के जानकार डोनाल्ड ट्रंप ने अपने फेमस एक यूटर्न एक बार फिर से ले लिया है कैसे यह रिपोर्ट अपनी ही बात को गलत साबित कर देना झूठा साबित कर देना यह कला सिर्फ डोनल्ड ट्रंप को आती है।

एक तरफ पाकिस्तान है जो जब झूठ बोलता है तो अपने झूठ पर टिका रहता है फिर उसके झूठ की पोल दुनिया खोलती है लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप किसी पर डिपेंडेंट ही नहीं है वो आत्मनिर्भर है वो अपने ही झूठ को बेनकाब करने की जिम्मेदारी खुद लिए हुए हैं भारत और पाकिस्तान के बीच सीज फायर ट्रंप ने करवाया यह बात ट्रंप ने एक बार नहीं दो बार नहीं कम से कम तीन बार हर मंच पर कही तीन दिन पहले ट्रंप यह कहकर अपनी पीठ थपथपा रहे थे कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान को दुश्मनी खत्म करने के लिए मजबूर किया उन्होंने दोनों देशों से कहा था कि अगर वो संघर्ष को रोक दें तो अमेरिका उनके साथ बहुत सारा व्यापार करेगा और यह सुनने के बाद भारत और पाकिस्तान संघर्ष रोकने के लिए राजी भी हो गए।

लेकिन सिर्फ 120 घंटे बाद ही ट्रंप अपने ही दावे से यू टर्न लेकर अपनी ही बात से पलट गए तो ट्रंप साहब आखिरकार यह मान ही गए कि सीज उन्होंने नहीं करवाया बल्कि इसमें उनका छोटा सा किरदार था उन्होंने केवल मदद की थी डॉन्ड ट्रंप का यह कुबूलनामा क़तर की राजधानी दोहा से आया है जहां वो अमेरिकी मिलिट्री बेस पर अपनी फौज को संबोधित कर रहे थे अब आप यह सोच रहे होंगे कि दुनिया भर में भारतपाकिस्तान के बीच सीज का श्रेय लेने वाले डोनल्ड ट्रंप ने अपनी ही फौज के सामने यू टर्न क्यों लिया इसके पीछे के तीन प्रमुख कारण हो सकते हैं ।

पहला ट्रंप के दावे पर भारत का सख्त रवैया दूसरा वर्ल्ड ट्रेड के लिए भारत का महत्व और तीसरा यूटर्न लेने की ट्रंप की पुरानी आदत पहली वजह कैसे यह समझिए भारत और पाकिस्तान के बीच 10 मई की शाम को 5:00 बजे सीज फायर हुआ था जिसका श्रेय ट्रंप ने लिया फट से सोशल मीडिया पर पोस्ट किया लेकिन भारत की तरफ से स्टैंड क्लियर था भारत शुरू से ट्रंप के दावे को खारिज करता रहा भारत यह साफ कहता रहा कि पाकिस्तान के साथ मध्यस्थता में किसी तीसरे मुल्क का कोई रोल नहीं डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस ऑफ पाकिस्तान कॉल्ड द डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस ऑफ इंडिया एट 1535 आवर्स दिस अर्लियर दिस आफ्टरनून अह इट वाज़ अग्रेड बिटवीन देम दैट बोथ साइड्स वुड स्टॉप ऑल एंड मिलिट्री एक्शन ऑन लैंड एंड इन द एयर एंड सी विद इफेक्ट फ्रॉम 1700 आवर्स इंडियन स्टैंडर्ड टाइम टुडे इंस्ट्रक्शंस हैव बीन गिवेन ऑन बोथ साइड टू गिव इफेक्ट टू दिस अंडरस्टैंडिंग दी डायरेक्टर्स जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस विल टॉक अगेन ऑन द 12th ऑफ़ मई एट 1200 भारत डटा रहा तो भारत के इस फर्म स्टैंड की वजह से अमेरिका के राष्ट्रपति को आखिरकार अपना बयान बदलना पड़ा और यह मानना पड़ा कि उन्होंने मध्यस्थता नहीं करवाई थी।

अब बात करते हैं दूसरी वजह की दुनिया जानती है कि ट्रंप इस वक्त दुनिया भर में घूम-घूम कर ट्रेड कर रहे हैं डील्स कर रहे हैं और ट्रंप यह जानते हैं कि वो दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के सबसे शक्तिशाली पद पर तो हैं लेकिन भारत दुनिया का सबसे बड़ा मार्केट है और इसीलिए वो भारत के मामले पर भारत से अलग स्टैंड तो नहीं ले सकते ऐसे में वर्ल्ड ट्रेड में भारत काेंस समझते हुए ट्रंप ने यह पलटी मारी इसका एक ताजा उदाहरण यह है कि ट्रंप ने भारत में एप्पल का प्रोडक्शन बढ़ाने पर नाराजगी जताई क्योंकि अमेरिका भी उभरते भारत से डरता है ट्रंप प्रेशर टैक्टिक्स के जरिए हर देश से मनमानी ट्रेड डील करना चाहते हैं लेकिन भारत ने यह साफ कर दिया है कि वो किसी भी तरह के प्रेशर में काम नहीं करता और यह भी एक बड़ी वजह हो सकती है कि ट्रंप ने अपना स्टेंस चेंज किया हो ट्रंप को समझने वाले लोग इस बात को भी जानते हैं कि यू टर्न लेना उनकी आदत है।

दरअसल ट्रंप कब क्या कह दें किस मंच पर क्या बोल दें कोई नहीं जानता उनका तो यह हमेशा से इतिहास रहा है कि वो बिना तथ्यों के कुछ भी बोल जाते हैं एक उदाहरण देख लीजिए 1947 में आजाद हुए भारत और 1947 में ही नए जन्मे मुल्क पाकिस्तान की 1947 से पहले तो हो नहीं सकती थी लेकिन डॉनल्ड ट्रंप को साल 1947 भी हजार साल पुराना लगता है दे हैव बीन फॉर अबाउट थाउजेंड इयर्स आई सेड यू नो आई कुड सेटल दैट अप आई कुड सेटल एनीथिंग पाकिस्तान को अस्तित्व में आए अभी 78 साल भी पूरे नहीं हुए लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप भारत और पाकिस्तान को हजारों साल पहले से लड़वाते आ रहे हैं डॉनल्ड ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति हैं अब राष्ट्रपति के पद पर बैठे व्यक्ति को गंभीरता से तो लेना ही चाहिए लेकिन डॉन्ड ट्रंप को कितना गंभीरता से लिया जाए यह जरूर सोचने वाली बात है ट्रंप का सबसे ताजा यूटर्न तो टेरिफ को लेकर ही था जहां पहले तो उन्होंने हर देश पर मन मुताबिक टेरिफ लगा दिया और अब घूम-घूम कर इसे रिवाइज कर रहे हैं साल 2016 में राष्ट्रपति बनने से पहले वो चीन को सबक सिखाने की कसमें खाते थे लेकिन शपथ ग्रहण के कुछ महीनों बाद ही उन्होंने शी जिनपिंग को अपने घर बुला लिया ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में चीन के सोशल मीडिया ऐप टिकटोक को बैन करने की बात कही टिकटक पर डाटा चोरी करने के आरोप लगाए।

लेकिन साल 2024 में अपने इलेक्शन कैंपेन में उन्होंने टीकटोक की खूब तारीफें की वहीं कोरोना काल के दौरान ट्रंप ने एक बड़ा यूटर्न लिया था पहले तो वो महामारी का मजाक उड़ाते थे लेकिन जब वो खुद कोविड पॉजिटिव हो गए तो वैक्सीन और दवाइयों का महत्व समझाने लगे कुल मिलाकर बात यह है कि ट्रंप वर्ल्ड लीडर तो हैं लेकिन लीडर के साथ-साथ वो एक डीलर भी हैं और डीलर के साथ-साथ कभी-कभी लायर भी उसी समय भारत की ताकत से भी ट्रंप बखूबी परिचित है।

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