आपकी एक किताब है सर और मुझे पता नहीं आप कितना उसके बारे में बात कर सकते हैं बट फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी उसका नाम है और वो रिलीज होने से रोकी हुई है क्योंकि सेना उसका रिव्यु कर रही है वो रिलीज होने वाली थी और उसे ठीक पहले कहा गया उसके कुछ ब्यरे एक सरकारी समाचार एजेंसी और एक आध जगह और आ गए और वो कुछ ब्यरे अभी भी हैं पब्लिक डोमेन में क्योंकि वो एक बार आउट हो चुके थे बट उसके बाद सेना शायद संभवत कुछ चीजों पर उसमें जो बातें कही गई थी उससे असहज थी और ये रिव्यू करने के लिए इस किताब की रिलीज को रोक लिया गया।
मेरे ख्याल से 15 16 महीने 15 महीने उस बात को हो गए हैं। कुछ उसका स्टेटस अभी आपको मालूम हुआ? वो किताब मैंने पहले लिखी थी फोर स्टार्स ऑफ़ डेस्टिनी एक मेमोर के तौर पे ऑटोबायोग्राफी के तौर पे और पेंग्विन और एमओडी संपर्क में है उसके क्लीयरेंस के संबंध में। मेरा काम था किताब लिखना और पब्लिशर को देना। अभी पब्लिशर ने उस बात को आगे बढ़ानी है, क्लीयरेंस लेना है, पब्लिश करना है। तो उनके बीच में यह बातचीत अभी भी चल रही है और जब कभी वो क्लीयरेंस आएगा तब वो किताब भी निकलेगी कभी ना कभी। सर किताब जैसा जो काम होता है हम लोग भी स्टोरी रिपोर्ट्स लिखते हैं और कुछ हम में से लोग हैं कविताएं कहानियां लिखते हैं और उसमें से कभी कुछ खो जाए मिस हो जाए तो बहुत मतलब मेहनत का काम होता है किताब लिखना और किसी भी वजह से मान लीजिए वो रुकी हुई है।
हाउ डू यू फील अबाउट इट? देखिए ये किताब लिखने का के पीछे भी एक अ स्टोरी है। मेरा कोई मेमोर लिखने का, ऑटोबायोग्राफी लिखने का कोई इरादा नहीं था। लेकिन स्वर्गीय जनरल बिपिन रावत के ऊपर पेंग्विन ने एक किताब छापी थी। तो उसके बुक रिलीज पर मैं गया था।
अ मार्च 2023 में और एक बार फिर जो पब्लिशर थे पिनगविन के तरफ से जो लोग आए थे तो एक बार फिर मजाकमजाक में मैंने उनसे कहा कि आप मेरी एक तो किताब नहीं छाप रहे हो और या मेरी किताब कब छपवा रहे हो तो उसका उसके जवाब में उन्होंने पूछा कि आपने लिखी है किताब मैंने कहा नहीं तो कोई किताब नहीं है लेकिन अगर आप कहते हो तो मैं लिख दूंगा अगर आप उन्होंने कहा हां सर आपका थोड़ी हम रोकेंगे हमें तो राइटली मैटर ऑफ प्राइड अगर आप हमें ये मौका देते हो आपका किताब छपवाने का तो एक बार फिर बाय द वे ये कारवाई शुरू हुई कि मैं किताब लिखूं तो और किताब लिखने सपने में ही मुझे जो एक सेटिस्फेक्शन मिला है वही मेरे लिए बहुत है। सपने की आवश्यकता भी नहीं महसूस होती। जो जो भी मेरे दिमाग में था और कई किस्से ऐसे जैसे मैंने छोटे-छोटे ये चुकले बताए हैं तो वो कन्वर्ट करने में मुझे काफी समाधान मिला है। और देखते हैं आगे जाके क्या होता है। होप इज एटर्नल। सर ऐसा ही ना एक केस है जनरल एनसी विच के साथ उनकी किताब है अलोन इन द रिंग उनके साथ वह तो रिलीज़ भी हो चुकी थी 2 अगस्त 2024 को लॉन्च तय था.
उनका लेकिन वो किताब भी रोक दी गई और वो कारगिल वॉर के समय वो डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन डीजीएमओ थे उस समय वो ब्लूम्सबरी से वो किताब आनी थी वो भी नहीं आई। मैं इसको इस सवाल को थोड़ा सा इस तरह से पूछूं कि कई बार दो तरह के मसले होते हैं कि कई बार आर्मी जनरल्स क्योंकि जो विदेश नीति है हमारी या जो स्ट्रेटजी है बॉर्डर्स सेफ सुरक्षा की वो राजनीति को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। नंबर एक दूसरी बार कई बार ये होता है कि दो आप दो चीजें वेयन करते हैं। एक राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रश्न हैं और दूसरा लोगों तक इंफॉर्मेशन या सत्य उसके सबसे परिष्कृत रिफाइंड रूप में पहुंचना चाहिए जो भी है। सच था। सो आप आप क्या सोचते हैं इन मसलों पे कि सत्य का लोगों तक पहुंचना जरूरी है या नेशनल सिक्योरिटी के लिए अगर कई बार कुछ चीजों को यू नो दबा दिया जाए या कम बताया जाए वो भी देश हित में होता है।
इसको अगर आप देखें तो सभी का एक स्पैन ऑफ़ इंफॉर्मेशन कंट्रोल होता है। एक यंग ऑफिसर को सिर्फ अपने इलाके के बारे में मालूम होता है। उसी तरह आप किसी इंडस्ट्री हेड का हो अगर आप देखो किसी कंपनी के सीईओ को तो उसको शायद सिर्फ अपनी कंपनी का मालूम होगा हम या उस सेगमेंट के बारे में जैसे मैं मान लो ऑटोमोबाइल्स का है उसको ऑटोमोबाइल्स के बारे में सारा मालूम होगा लेकिन मेडिकल फील्ड या सेगमेंट शायद नॉलेज ना हो और उसके वजह से क्या इंपैक्ट हो सकता है तो उसी तरह सभी का एक दायरा होता है। तो आर्मी चीफ के पोजीशन में होते हुए जो जो आपको मालूम है अपने खुद के सर्विस के बारे में तो मालूम होगा ही होगा और बाकी नेवी, एयरफोर्स, डिफेंस के बारे में लेकिन फाइनेंस के बारे में, दूसरे मिनिस्ट्रीज के ऊपर इंपैक्ट कैसे होता है? फॉरेन रिलेशंस, वेशंस अलग-अलग देशों के साथ, रोज के साथ, यूएस के साथ अभी भी जैसे आप देख सकते हो कितना फाइन बैलेंसिंग एक्ट चल रहा है। तो योर लेवल ऑफ एक्सपर्टीज एंड नॉलेज जहां पर भी आप हो थोड़ा सा तो वो सीमित रहेगा ही रहेगा। इसलिए जब कम किताब लिखते हैं अगर उसके ऊपर रिव्यू की जरूरत है तो शायद वो एक नेसेसिटी है ताकि जो पूरे देश के ओवरऑल नेशनल सिक्योरिटी के हिसाब से अगर देखा जाए कि कोई ऐसी बात उसमें ना हो जिससे कि हमारे संबंध बाकी देशों के साथ बिगड़ जाए। इसलिए रिव्यू करने में कोई खराबी नहीं है। रिव्यू जरूर होना चाहिए ताकि गलती से इनएडवंटेंटली कोई ऐसी बात ना निकल जाए। तो यही इसके ऊपर मैं कहना चाहूंगा कि एक ओवरसाइड कह दो या रिव्यू कह दो वो उसमें कोई पर उसकी तय समय सीमा हो तो अच्छा नहीं है कि एक महीना दो महीना 15 महीनों नहीं लगनी चाहिए किसी भी एक किताब को रिव्यू करने के लिए मतलब ये अगर किताब पढ़ने की स्पीड है तो बहुत धीमी है।
तो वो जितने ज्यादा मिनिस्ट्रीज इनवॉल्वड होंगे तो अगर वो देखा जाए तो शायद इतना टाइम भी लग सकता है कि हर मिनिस्ट्री से पूछना पड़ेगा कि इसके ऊपर आपकी क्या राय है? अगर उस किताब में मान लो सड़कों के बारे में कुछ लिखा है तो एमओआरटी8 से भी पूछना पड़ेगा।
अगर डिप्लोमेसी किसी देश के साथ संबंध के बारे में तो एमए को भी पूछना पड़ेगा। तो यह नहीं कि रिव्यू एमओडी के अंदर ही सीमित है। रिव्यू में दूसरे मिनिस्ट्री से भी पूछना पड़ेगा। उनकी भी राय लेनी पड़े। तो वक्त लग भी सकता है। कितना वक्त लगेगा और कितने स्पीड से हम काम करते हैं वो तो सबको मालूम है। एक डिसिप्लिन जनरल का जवाब