जब हम लोग बचपन में स्कूल में पढ़ते थे तो वहां पर जो हमारे टीचर्स हैं वह कहा करते थे कि अपनी हैंडराइटिंग अच्छी करो। अगर हैंडराइटिंग अच्छी होगी तो उसके एक्स्ट्रा मार्क्स दिए जाएंगे। और उस एक्स्ट्रा मार्क्स के चक्कर में हम सभी लोग कोशिश किया करते थे। लेकिन कोशिश कभी भी सफल नहीं होती थी तो उसे भी छोड़ देते थे।
लेकिन उस समय हमने कभी जीवन में यह नहीं सोचा था कि जिंदगी में एक मौका ऐसा भी आ सकता है कि जब शायद अच्छी हैंडराइटिंग की वजह से हमारी समस्या का समाधान हो जाए। शायद आप भी चौंक गए होंगे इस बात को सुनकर। लेकिन कानपुर में कुछ ऐसा ही देखने को मिला। दरअसल हुआ यह कि यहां पर एक छात्रा है शिवानी। उसके घर की कुछ समस्या थी और उसके जो दादा थे वो उसको लेकर आए थे यहां डीएम ऑफिस में। कोई समस्या थी उसको लेकर आए थे। उस समस्या को उन्होंने बताया। जो एप्लीकेशन लिखी थी वो शिवानी ने लिखी थी। तेरे पास है बाबा जी आया मसाला। प्योर बाबाजी मसाला बाबाजी बना सबका राजा ऑल प्योर मसाला जब यहां पर डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने उस एप्लीकेशन को देखा तो एप्लीकेशन को देखने के बाद उनको विश्वास नहीं हुआ और उन्होंने पूछा कि इसको कहां टाइप कराया है तो पता चला कि इसको टाइप नहीं कराया है बल्कि जो उनकी पोती है उन्होंने इस एप्लीकेशन को लिखा है। डीएम साहब को विश्वास नहीं हुआ।
वहां पर जनता दरबार में जो और भी लोग मौजूद थे उनसे कहा गया उनको भी वो एप्लीकेशन दिखाई गई लेकिन सभी का यह कहना था कि यह एप्लीकेशन तो टाइप की हुई है लेकिन नहीं वो एप्लीकेशन टाइप की हुई नहीं थी बल्कि उसको शिवानी ने खुद लिखा था और इस बात को देखकर और इस बात को पता करके सब लोग बहुत चौंक गए क्योंकि जिस तरीके से एप्लीकेशन लिखे गए थे वो कहीं से भी ऐसा नहीं लग रहा था कि उसको किसी इंसान ने हाथ से लिखा है बल्कि ऐसा लग रहा था कि शायद किसी टाइप राइटर से उसको टाइप किया गया है उसकी उसकी हैंडराइटिंग देखकर डीएम इतने खुश हुए कि उन्होंने कहा कि अब तुम्हारा काम जरूर कर दिया जाएगा। लेकिन सबसे पहले हम आपको यह बताते हैं कि उस हैंडराइटिंग को देखने के बाद डीएम ने क्या कहा। जनता दर्शन में एक प्रार्थना पत्र मेरे सामने आया था 7 अप्रैल में। तो जो एप्लीकेशन की जो राइटिंग थी वो बहुत ही ज्यादा खूबसूरत थी। मोतियों की तरह थी। तो जो एप्लीकेशन लेके आए थे मैंने पूछा लिखी किसने है? तो उनके बताया कि मेरी नातिन ने लिखी है। तो यह राइटिंग तो अविश्वसनीय जैसी लगती है। बिलकुल। दो जो बेटी उनकी नातिन जो शिवानी है वो आई है मेरे साथ मिलने के लिए और जो मैंने उनकी क्लास वर्क की कॉपी देखी है वो अमेजिंग है.
इससे अच्छी मतलब हैंडराइटिंग मैंने तो कभी नहीं देखी है तो उन बच्चियों से बात हुई बड़ा टैलेंटेड है कैलीग्राफी में जा सकती हैं आर्टिस्ट हो सकती हैं तो वही [गला साफ़ करने की आवाज़] उनसे संवाद किया गया और एक उदाहरण है कि बहुत साधारण परिवार से जैसे बच्ची ने बताया कि वो तीन चार का पेन आता है उससे ऐसी राइटिंग है तो अविश्वसनीय सा है लेकिन एक जीवन का सकारात्मक पक्ष है अब हैंडराइटिंग इतनी अच्छी थी तो निश्चित तौर पर उसका पुरस्कार भी बनना बनना था और इसी को देखते हुए शिवानी को कलेक्टेट में बुलाया जाता है। वहां पर उसको पुरस्कृत किया जाता है और उसके बाद वो भी खुश हो जाती है। तो वो अपने बारे में और अपनी हैंडराइटिंग के बारे में क्या बताती है? चलिए आपको वो भी सुनाते हैं। मुझे यहां पर स्पेशल बुलाया था और सम्मानित भी किया है।
शुभकामनाएं भी दी उन्होंने और वो मेरे बाबा लोग वो आप एप्लीकेशन लेके आते थे तो मैं लिखती थी तो इस वजह से उन्होंने देखी मेरी राइटिंग तभी ₹ के पेन से पहले तो देखा आपने बचपन में आपको उस हैंडराइटिंग के लिए भले ही कुछ मार्क्स मिले हो या ना मिले हो यह तो हमें नहीं पता
लेकिन इतना जरूर है कि उस हैंडराइटिंग की वजह से एक परिवार का जो काम काफी लंबे समय से फंसा हुआ था वो जरूर पूरा होने वाला है और इसीलिए कहते हैं ना कि अगर अच्छी हैंडराइटिंग हो तो उसके एक्स्ट्रा नंबर तो मिलते ही हैं नंबर मिले भले ना मिले लेकिन कम से कम आपकी समस्या का समाधान जरूर हो जाता है।
