पुलिस अफसरों से भरी डायल 112 की गाड़ी ने एक 10 साल की मुस्लिम बच्ची मंतशा को रौंदकर मार डाला के । जिसके बाद मौके पर थी बच्ची की जान गई। मामला बिहार के भागलपुर का है। जहां बाईपास थाना क्षेत्र के एनएच 80 पर तेज रफ्तार में आई पुलिस की गाड़ी ने बच्ची और उसकी चचेरी बहन को रौंद डाला।
हैरानी की बात यह रही कि दुर्घटना के बाद पुलिस की गाड़ी रुकी नहीं और वहां से तुरंत भाग निकली। स्थानीय लोगों ने घायल लड़की को आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया। जहां डॉक्टरों ने उसे देखते ही मरा घोषित कर दिया। दूर-दूर तक पुलिस और उस गाड़ी का कोई अता-पता ना चल पाने पर मृतक बच्ची के परिजन और ग्रामीण गुस्सा हो गए और एनएच पर शव रखकर हाईवे जाम कर दिया। इसके साथ ही टायर जलाकर जोरदार विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। जिसके बाद हाईवे पर लंबा जाम लग गया। हां।
112 धक्का मारा। हां। 112 आया गोला। उसके पास लाइसेंस नहीं है। प्राइवेट नौकरी करता है। सरकारी नौकरी नहीं है। कौन? गोलाखी बन का गोला है। हां। प्राइवेट नौकरी करता सरकारी नौकरी नहीं है। ड्राइवर है क्या वो? हां ड्राइवर है। वो सरकारी नौकरी नहीं करता। प्राइवेट नौकरी करता है। हम चिनते हैं। हम ठीक है। हम भी डिलीवरियां करते हैं किसी दूसरे का। हम रोज करते हैं 6:00 बजे जाते हैं। 5:00 बजे घर आते हैं। हम गड़ा पड़ा करके उस पार गया। उस पारबो नहीं कही है। गई है ना पर उस पार तक। गाड़ी धक्का मारा घुर गया। हम घूरने के बाद गोला घुरा गाड़ी ले चला गया।
हम नतीजा थाना बुलाइए थाना नहीं आएगा। हम जो इंसाफ आप दीजिएगा वही ले लेंगे। क्या मांग कर रहे हैं अब आप लोग? करोड़ एक करोड़ हम लेंगे मुआवजा हां जाम अभी रखेंगे हां जाम रखेंगे अभी तो बहुत क्या नाम था बच्ची का बच्ची का मंसूषा नाम है आपका अबार एमडी अबार कहां घर हुआ दोनों हुआ है मेरी भतीजी हुआ मेरा हुआ भतीजी कहां है हां भतीजी घर में उसको भी चोट लगा है उसका क्या नाम है प्रवीण प्रवीन है घटना की सूचना मिलते ही बायपास थाना समेत तीन थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। थाना अध्यक्ष प्रभात कुमार ने ग्रामीणों और परिजनों से बातचीत कर सड़क पर जाम हटाने की कोशिश की। लेकिन लोग शांत नहीं हो रहे। पुलिस ने लोगों को समझाकर करीब डेढ़ घंटे के बाद जाम हटा लिया है।
फिलहाल देह को ज्वांच के लिए भेज दिया गया है। इस मामले पर पुलिस ने क्या कहा वो भी सुन लीजिए। कुर्बान में एक एक्सीडेंट हो गया था। हम जिसमें एक लड़की का कैजुअल्टी हो गया। हम और एक घायल है जिसका इलाज चल रहा है। हम इसी में हम लोग आए हैं।
किस गाड़ी से हुआ है सर? देखिए यहां के लोगों का कहना है कि 112 से हुआ है। ठीक है। हम अब हम लोग जांच कर रहे हैं। उसको सीसीटीवी देख रहे हैं। हम कौन था, कैसे था, किधर गया, किधर से आया? ये सारा अनुसंधान का विषय है। स्थिति सामान्य है सब आप देख रहे हैं सारा सामान है। यहां के बड़े लोग समझदार हैं। अच्छे लोग हैं और सब तरह से ठीक है और हम लोग इसको जांच के लिए ले जा रहे हैं। मुआवजे की मांग कर रहे थे सर। वो सारी प्रक्रिया नियम के अनुसार हो जाएगी। उसमें कोई विलंब नहीं होगा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस की गाड़ी की रफ्तार काफी तेज थी और लापरवाही से गाड़ी चलाई जा रही थी।
हादसे के बाद पुलिस को रुकना चाहिए था लेकिन वो भाग गए। अब सवाल उठता है कि क्या यह वही बिहार पुलिस है जिसके कंधों पर जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी है और क्या जिम्मेदारी यह पुलिस निभा रही है वो भी अच्छे से देखा जा सकता है। गुंडे माफियाओं को तो छोड़ ही दीजिए। खुद बिहार पुलिस ही जैसे मामलों को अंजाम देकर बिहार के लॉ एंड ऑर्डर की धज्जियां उड़ाने पर लगी हुई है।
