धुरंधर फिल्म देखने के बाद जो लोग भारत की खुफिया एजेंसी रॉ की तारीफ कर रहे हैं, उन्हें यह शायद ही मालूम होगा कि रॉ ने एक बार इतनी पावरफुल इंफॉर्मेशन इंडिया को पहुंचाई थी जिस इंफॉर्मेशन को यूज़ करके इंडिया पाकिस्तान की सबसे बड़ी पावर यानी कि उसे खत्म करने की ताकत में था। बात होगी ईयर 1976 की।
तब रॉ एजेंट्स इंडिया में थे। उन्हें खबर लगी थी कि पाकिस्तान पावर की तैयारी कर रहा है। क्योंकि भारत में न्यूक्लियर टेस्ट हो चुका था और उसके बाद पाकिस्तान ने भी अपने अधिकारियों को बोल दिया था कि हमें भी बनना है।
फिर क्या था? पाकिस्तान ने खुफिया तरीके से न्यूक्लियर पावर बनने की तैयारी शुरू कर दी। रावलपिंडी का एक पहाड़ी एरिया है कहूता। वहां पर खान रिसर्च लेबोरेटरी है। खबर आ रही थी कि वहां पर बड़े-बड़े साइंटिस्ट का आना-जाना लग रहा है। भारत के जो रॉ एजंट्स पाकिस्तान में थे उन्हें शक हुआ कि हो ना हो यहीं पर पाकिस्तान अपनी न्यूक्लियर फैसिलिटी डेवलप कर रहा है। लेकिन वहां का पता लगाया कैसे जाए? क्योंकि बिल्कुल एक साइड पर यह एरिया था। माउंटेन एरिया था। एक गांव था जहां पर उन्होंने अपनी ये लैब बसाई थी और वहीं पर वो न्यूक्लियर पावर बनने की तैयारी कर रहे थे। एजेंट्स वहां पर जाए तो जाए कैसे और इतना सिक्यर्ड इतना सेपरेटेड एरिया है कि उसमें कोई घुस ही नहीं सकता है। इसके बाद भारत के खुफिया एजेंट्स ने एक तरकीब लगाई जैसा एरिया वैसा भस।
अगर वो गांव है तो वहां पर गांव वाले ही बनकर जाएंगे। जिस वक्त कहुता में पाकिस्तान सबसे बड़ी न्यूक्लियर पावर बनने की तैयारी कर रहा था। भारत के कई खुफिया जासूस तब कहूता पहुंचे। गांव में कभी किसान बनकर, कभी टैक्सी ड्राइवर बनकर तो कभी भिखारी बनकर। इनफैक्ट भारत के जेम्स बॉन्ड कहे जाने वाले अजीत देवल साहब तो भिखारी बनकर पहुंचे थे और उनकी किताब में इस वाक्य का जिक्र भी है कि कैसे वो वहां पर एक साल तक भिखारी के भेष में रहे और खुफिया जानकारी जुटाकर उन्होंने भारत तक पहुंचाई। अब जब लैब में तो किसी को भी एंट्री नहीं थी तो खुफ़िया जानकारी इन्हें मिल कहां से रही थी?
एक्चुअली इस लैब में कई सारे साइंटिस्ट काम कर रहे थे और गांव में एक सैलूून था जहां पर यह सारे साइंटिस्ट बाल कटवाने आते थे और अगर यह साइंटिस्ट न्यूक्लियर फैसिलिटी पर काम कर रहे हैं तो डेफिनेटली इनके बालों में यूरेनियम और रेडिएशन के अंश मिलेंगे। अजीत देओल साहब को बस यही इंतजार था कि कैसे ना कैसे सैलून में कटे हुए जो साइंटिस्ट के बाल हैं वो उनके हाथ लग जाए। लेकिन सैलूून वाले के सामने एक भिखारी जाकर सलूून से बाल उठाएगा तो पकड़ा जाएगा।
वो शाम तक इंतजार करते कि कब सलूून वाला दुकान बंद करेगा। दुकान बंद करने से पहले दुकान के अंदर जितने भी बाल है उन बालों को वह बाहर डालेगा और उसके बाद दुकान बंद करके निकलेगा।
जैसे ही सैलूून वाला दुकान बंद करके निकलता अजीत दोवाल ने वहां से बालों के कुछ सैंपल्स उठाए और उन सैंपल्स को भारत भेज दिया। यहां पर जब रिसर्च की गई तो वो पॉजिटिव निकले। यानी कि उनमें यूरेनियम और रेडिएशंस के अंश मिले। जिससे यह श्योर हो गया कि पाकिस्तान न्यूक्लियर फैसिलिटी तैयार कर रहा है। इसी बीच एक और रो एजेंट है जिसे एक शख्स मिल गया जिसके पास पाकिस्तान के का पूरा प्लान था। पूरा ब्लूप्रिंट था। लेकिन वो शख्स यह ब्लूप्रिंट भारत को हैंडओवर करने के लिए लाखों रुपए की डिमांड कर रहा था। रॉ एजेंट्स ने यह जानकारी भारत को दी और अपने ऑफिसर को कहा कि पाकिस्तान का पूरा हमारे हाथ में होगा। बस इतना रुपया एक शख्स को देना है।
लेकिन उस वक्त भारत में कुछ अजीब चीजें हुई। इमरजेंसी की वजह से पॉलिटिकल शिफ्ट हुआ। इंदिरा गांधी हटी और उनकी जगह मोरारजी देसाई आए। मोरारजी देसाई को शक था कि इंदिरा गांधी रॉ को सिर्फ पाकिस्तान की जासूसी नहीं बल्कि उनकी पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं की भी जासूसी करने के लिए इस्तेमाल करती है। यही वजह है कि उन्होंने पीएम बनते ही रॉ का बजट ही काट दिया और जब रॉ की तरफ से यह डिमांड आई कि कुछ लाख रुपए देने हैं पाकिस्तान के न्यूक्लियर ब्लूप्रिंट को हासिल करने के लिए तो उन्होंने इस ऑफर को ही रिजेक्ट कर दिया। इतना ही नहीं जिस वक्त भारत के पीएम रॉ के साथ नहीं थे तब इजराइल रॉ के साथ था और इजराइल ने यह तक कह दिया था कि अगर पाकिस्तान के प्लांट को उड़ाना है तो मैं तुम्हारे साथ हूं। लेकिन इसकी परमिशन भी पीएम ने नहीं दी। यही वजह है कि पाकिस्तान के न्यूक्लियर पावर प्लांट का पता होने के बावजूद भारत उसका कुछ नहीं कर पाया। और तो और मोरारजी देसाई ने इतना बड़ा नुकसान पहुंचाया।
उन्होंने पाकिस्तान से अपने अच्छे रिश्ते बनाए रखने के लिए पाकिस्तान के डिक्टेटर जियाउल हक को बातों ही बातों में यह भी बता दिया कि आपकी न्यूक्लियर पावर प्लांट की तैयारी कैसी चल रही है। जिसके बाद पाकिस्तान में खलबली मच गई। वो यह सोचने को मजबूर हो गए कि आखिर भारत तक यह जानकारी पहुंची कैसे? हमने तो बहुत ही खुफिया तरीके से इस फैसिलिटी को डेवलप किया। भारत तक की खबर कैसे पहुंची?
पाकिस्तान ने अपनी इंटरनल इन्वेस्टिगेशन शुरू की और उन्हें पता चला कि यहां पर भारत के कुछ एजेंट्स है जो हमारी जासूसी कर रहे हैं। पाकिस्तान ने इन्वेस्टिगेशन शुरू किया। भारत के कई एजेंट्स को पकड़ा गया और उन्हें बहुत बुरा टॉर्चर दिया गया। जिसकी कुछ झलक आपने धुरंधर फिल्म में भी देखी है और हमने उन सभी अनसंग हीरोज़ को खो दिया एक बेवकूफी भरे डिसीजन की वजह
