यह बात सच है कि धर्मेंद्र की फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री एक अवार्ड शो जीतकर हुई। लेकिन यह भी सच है कि फिल्म इंडस्ट्री के इन अवार्ड शोज़ ने ही धर्मेंद्र को सबसे ज्यादा बर्बाद किया। कैसे किया? यह आज के इस वीडियो में आप समझ जाएंगे।
उस दौर में फिल्मफेयर मैगज़ीन एक अवार्ड चलाती थी। न्यू टैलेंट अवार्ड यानी कि कोई फ्रेश फेस जो फिल्म इंडस्ट्री में आना चाहता है तो उसके लिए एक कंपटीशन रखा जाता था और जो अवार्ड जीतता था उसे इंडस्ट्री में एंट्री मिलती थी उसके साथ फिल्म बनाकर धर्मपाल जी ने भी इसी अवार्ड शो में हिस्सा लिया था और वो यह अवार्ड शो जीतते भी थे।
सारे राउंड्स क्लियर किए थे और उन्होंने फर्स्ट पोजीशन पाई थी। उन्हें एक फिल्म प्रॉमिस भी की गई थी और इसी प्रॉमिस पर वो अपना घर बाहर पंजाब से छोड़कर मुंबई आ गए थे। लेकिन यहां आकर उन्हें पता चला कि अब तो उनके साथ फिल्म बनाई ही नहीं जा रही है। विनर होने के बावजूद धर्मपाजी को तब स्ट्रगल करना पड़ा था। स्ट्रगल करके जैसे-तैसे उन्होंने फिल्मों में काम करना शुरू किया और धीरे-धीरे अपने ही मेरिट बेसिस पर उन्होंने फिल्मों में तरक्की की। इस दौरान एक मुकाम ऐसा भी आया जब धर्मपालजी ने एक फिल्म बनाई सत्य काम और इस फिल्म की कहानी उनकी बाकी फिल्मों से बिल्कुल अलग थी। इनिशियल दौर में धर्मपाल जी को या तो सेकंड लीड्स के रोल मिलते थे या फिर रोमांटिक रोल्स मिलते थे।
कोई भी प्रोड्यूसर उन्हें उसके अलावा कोई दूसरे रोल्स नहीं दे रहा था। यही वजह है कि तब धर्मपाल जी के पास अच्छा खासा पैसा आ गया था और उन्होंने सत्यकाम नाम की ये फिल्म बनाई थी। ईयर 1969 में सत्यकाम फिल्म आई थी और धर्मपाजी और उनकी टीम उम्मीद कर रही थी कि नेक्स्ट ईयर किसी न किसी अवार्ड शो में तो उन्हें बेस्ट एक्टर का अवार्ड मिल ही जाएगा। लेकिन एक बार फिर से फिल्म इंडस्ट्री ने उनके साथ सौतेला व्यवहार किया।
उनकी फिल्म को या उन्हें अवार्ड देना तो दूर की बात उन्हें बेस्ट एक्टर के लिए नॉमिनेट तक नहीं किया गया। 1969 में यह फिल्म आई थी और 1970 में जो एक्टर्स बेस्ट एक्टर्स अवार्ड के लिए नॉमिनेट हुए थे उसमें नाम था राजेश खन्ना साहब का आराधना और इत्तेफाक के लिए और अशोक कुमार साहब का आशीर्वाद के लिए। और यह अवार्ड जीता था अशोक कुमार जी ने।
यानी कि धर्मपाजी का तो नाम तक नहीं था। उनके काम और उनकी फिल्म का जिक्र होना तो दूर की बात। यहां से धर्मपाल जी को समझ आ गया कि अब काम जो करना है वह अवार्ड्स जीतने के लिए नहीं करना है। अपनी मस्ती अपने फन और अपने फैंस के लिए करना है। और वही धर्मपाल जी ने किया। और जैसे ही वह अपने काम को एंजॉय करने लगे तो उनकी फिल्में सक्सेसफुल होने लगी।
बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ परफॉर्म करने लगी। धर्मेंद्र मोस्ट बैंकेबल स्टार बने। उनकी फिल्में सिल्वर जुबली करने लगी। अवार्ड्स वालों ने तब भी उन्हें इग्नोर ही किया लेकिन अब धर्मपाल जी ने इसकी परवाह ही नहीं की। इसके बाद एक टाइम आया जब धर्मपाल जी के बेटे सनी देओल फिल्म इंडस्ट्री में आए और फिल्म इंडस्ट्री में आते ही सनी देओल ने जो स्टारडम हासिल किया उसके बाद तो अवार्ड वाले उनके पीछे भागने लगे। लेकिन इस बार धर्म पाजी प्रोड्यूसर होते थे और अवार्ड वाले उनके सामने आते थे और कहते थे कि सनी पाजी को हम यह अवार्ड देना चाहते हैं। आप क्या कहेंगे? हालांकि धर्मपाजी ने तब अवार्ड वालों के साथ वैसा ट्रीटमेंट नहीं किया जैसा ट्रीटमेंट अवार्ड वालों ने धर्मपाल जी के साथ किया। लेकिन उन्होंने अपनी डिग्निटी मेंटेन रखी। ईयर 1992 में धर्मपालजी ने सनी देओल को लेकर घायल फिल्म बनाई और यह फिल्म इतनी सुपरहिट हुई कि इस फिल्म को बेस्ट अवार्ड दिया गया।
हालांकि यह अवार्ड बतौर प्रोड्यूसर था बेस्ट एक्टर का नहीं। और फिर आया ईयर 1997। धर्मेंद्र को फिल्मफेयर अवार्ड्स ने लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया। उस टाइम धर्मेंद्र की उम्र थी 62 इयर्स। अगर उस टाइम को मैं आज से कंपेयर करूं तो आज की डेट में सलमान, शाहरुख और आमिर तीनों 60 इयर्स के हैं। किसी भी अवार्ड शो वाले में हिम्मत नहीं है कि इन सुपरस्टार्स को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड ऑफर करके बताएं।
लेकिन उस वक्त धर्मपाल जी को 62 की ऐज में लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड देकर उनके करियर पर इस अवार्ड शो ने ब्रेक ही लगा दिया था। जबकि सेम टाइम पर अमिताभ बच्चन फिल्मों में काम कर रहे थे, फिल्में प्रोड्यूस कर रहे थे और उसके कुछ ही सालों बाद ईयर 200 में अमिताभ बच्चन को स्टार ऑफ द मिलनियम के अवार्ड से सम्मानित किया गया।
तो यह काफी दोहरी मानसिकता वाली चीज इंडस्ट्री में देखने को मिली कि कैसे एक स्टार को अवार्ड्स वाले चढ़ा कर रखते हैं। वहीं दूसरा स्टार जो इतना शानदार काम कर रहा है उसके टैलेंट को आपने कभी भी अच्छा सम्मान अच्छा प्लेटफार्म नहीं दिया। हालांकि अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र में पर्सनली कोई रेवेलरी नहीं थी लेकिन अवार्ड फंक्शन और इंडस्ट्री में जो माहौल होता है ये सब लोग जो हरकतें करते हैं उससे दो स्टार्स के बीच दूरियां आ ही जाती भी है।
