दाऊद को भारत क्यों नहीं ला पाए अजीत डोभाल?

अमेरिका की चोटी की पुलिस एजेंसी ने कहा है कि उसे भी दाऊद इब्राहिम की उसी शिद्दत से तलाश है जितना कि हमारे भारतीय एजेंसियों को।

मुझे एग्जैक्टली नहीं पता कि स्टेटमेंट क्या दी है एफबीआई के डिप्टी डायरेक्टर ने। लेकिन जैसे आपने बताया कि उन्होंने ये कहा कि दाऊद का दो बातें हैं उसके अंदर। एक तो ये कि वो दाऊद की पूर्ण रूप से तलाश कर रहे हैं और दूसरी कि उनकी सूचना के अनुसार पाकिस्तान में है। जहां तक पहली बात है ये तो निश्चित है कि वो एक फॉरेन टेररिस्ट प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर की तरीके से जब से डिक्लेयर हुआ है तब से अमेरिका की लिस्ट में वो एक डेजिग्नेटेड है और वो उसी कैटेगरी में आता है जिस कैटेगरी में कि और शीर्ष शीर्षस्थ जो टेररिस्ट है जिनकी तलाश अमेरिका को है।

हालांकि हमारा विचार यह है कि अमेरिका ने उस शिद्दत से उस अह सिंसियरिटी से इस केस को नहीं पर्सू किया जितना कि उन्होंने अलकायदा की लीडर्स को किया है। जैसे उमर मशेख था या जवाहरी है या है उसको नहीं किया। इसके बावजूद कि दाऊद के बारे में बहुत कुछ इंफॉर्मेशन अवेलेबल थी। दूसरा सवाल जहां पर आता है कि आप आपका कहना है कि वो बता रहे हैं कि वो पाकिस्तान में है। यह मेरे लिए किसी के लिए कोई बड़ी डिस्कवरी या बड़े ताज्जुब की या कोई नई वो खबर नहीं है।

इसके बारे में पूर्ण जानकारी भारत को है कि वो वहां पर था। वो कहां रहता है, क्या करता है? और अब क्योंकि एक जॉइंट मैकेनिज्म भी बन गया है। तो मुझे पूर्ण आशा है कि भारत ने पाकिस्तान की एजेंसीज को बताया होगा और यदि पाकिस्तान सिंसियर है और यदि ये जॉइंट मैकेनिज्म कारगर हो सकता है तो इब्राहिम के खिलाफ जरूर एक्शन लिया जाएगा।

अमेरिकी पुलिस एजेंसी के डिप्टी डायरेक्टर का इस देश में आकर के कहना कि उसे दाऊद की तलाश है और अब जब यह भाषा बोली जा रही है अमेरिका की ओर से तो इस्लामाबाद के लिए कोई मायने हैं इसके? नहीं देखिए अपने में इसका कोई बहुत विशेष महत्व नहीं है क्योंकि ये बात रिटेट की है हर इंटरनेशनल फोरम पर हर काउंटर टेररिस्ट फोरम पर अमेरिका ने।

इसके ऊपर में कोई ये एक ऑफिशियल पोजीशन है उनकी। तो वो चाहे अमेरिका में हो, चाहे भारत में हो, चाहे पाकिस्तान में हो। ये बात तो वो हमेशा कहते रहे हैं। लेकिन वो कितनी कितनी मजबूती के साथ और कितने प्रेशर के साथ में पाकिस्तान से इस चीज़ को टेक अप करेंगे और मजबूर करेंगे पाकिस्तान को कि वो एक्शन ले दाऊद के खिलाफ ये हमें देखने की बात है।

कमाल साहब जो दाऊद के खिलाफ सबसे बड़ा ऑपरेशन रहा ये दाऊद को ट्रेल करने की कोशिश रही, भारतीय सीमा में लाने की कोशिश रही उसमें आपकी अहम भूमिका थी। तो क्या वजह रही कि दाऊद तब नहीं आ पाया और अब तक नहीं आ पाया? नहीं मैं ये तो नहीं कहता मेरी बहुत अहम भूमिका यह तो सरकार के एक टीम का वह रहता है।

वह कई भारत की सुरक्षा के लिए जिन कई लोगों से भारत की सुरक्षा को खतरा है वो भी उनमें से एक था। इसलिए उसके बारे में भी जो कार्यवाही सरकार को करनी चाहिए या एजेंसीज को करनी चाहिए या उनके अफसरों को करनी चाहिए वो मैंने भी की। उसमें कोई विशेष वो नहीं था। लेकिन ये कारण जो कि सबसे बड़ा था कि उसके खिलाफ एक्शन नहीं लिया जा सका।

वो था पाकिस्तान की सरकार और पाकिस्तान की इंटेलिजेंस एजेंसी का उसे पूर्ण रूप से और ब्लटेंट तरीके से मदद और प्रोटेक्शन देना और एक स्टेट के खिलाफ अगर स्टेट किसी को प्रोटेक्शन दे तो उसकी जमीन के अंदर उसकी धरती के अंदर में उसके खिलाफ एक्शन लेना असंभव नहीं तो काफी कठिन तो हो ही जाता है। आपने कहा कि ये पता अमेरिका कोशिश करता रहा है।

लेकिन अमेरिका को वार अगेंस्ट छेड़े हुए तकरीबन 5 साल बीत गए और दाऊद के बारे में यह भी बार-बार जिस तहत अंतरराष्ट्रीय घोषित किया गया है उसमें ये बात कहा गया है कि दाऊद वहां के संगठनों को जो भारत के लिए काम करते हैं उन्हें करता रहा है। अमेरिकन रिपोर्ट में है।

लेकिन फिर भी अमेरिका उसे अपनी जद में नहीं ला पाया। इसकी वजह कोई डिप्लोमेटिक वजह है या क्या वजह? नहीं देखिए इसकी वजह यह है कि अमेरिका एक पॉइंट के बियों्ड पाकिस्तान को प्रेशराइज करने में स्वयं को असमर्थ पाता है। और क्योंकि अमेरिका को भी पाकिस्तान के जरिए कई सारी ऑपरेशनल चीजों के लिए उनकी मदद की आवश्यकता है। इसलिए एक पॉइंट से अधिक वो पाकिस्तान को मजबूर नहीं कर पाता है। जितना कि वो वेस्टर्न इंटरेस्ट के लिए कर सकता है।

तो ये एक जरूर बात रही है क्योंकि ये बात इसी केस में नहीं और भी इस तरह के दृष्टांत हुए हैं। जबकि पाकिस्तान ने स्वयं को मजबूर पाया है। पाकिस्तान को मजबूर करने में टेररिस्ट कैंप्स के बंद करने के बारे में। ये दूसरा वो था। जब आर्मिटेज यहां पर आया, आर्मिटेज ने वहां पर जाके ये कहा और पाकिस्तान ने आश्वस्त किया कि हम सारे के सारे टेररिस्ट कैंप्स बंद करने जा रहे हैं।

और उसके बावजूद भी वो कैंप्स बंद नहीं हुए। और इसका रफ ने भी आर्मज ने भी पाकिस्तान को एविडेंस दिया कि ये कैंप्स अभी तक चल रहे हैं आपके। साहब फिर इसका मतलब यही है कि एक बार फिर एफबीआई ने कहा यहां आकर के हमें खुश करने के लिए सिर्फ कहा वो इस काबिल नहीं है।

इस स्थिति में नहीं है कि वो वाकई दाऊद को पकड़वा सकते हैं। देखिए ये तो इसको फलीभूत होने पे देखते हैं कि अमेरिका कितना सिंसियर है और कितना सक्षम है। अगर इसका प्रभाव क्या होता है। अगर उन्होंने यहां पर आके ये कहा है तो हमें आशा करनी चाहिए कि इसका कोई ना कोई प्रभाव जरूर पड़ेगा। और ये संभव है कि इस नई परिस्थिति में नए सरकमस्टैंस में अब पाकिस्तान के अंदर में एक नई सोच पैदा हो गई हो।

पाकिस्तान इस चीज को महसूस करता हो कि उसे अब को उतना प्रोत्साहन नहीं देना चाहिए। अब जो हमारा एक नया जॉइंट मैकेनिज्म बन गया है।

शायद उसके कारण उसके अंदर में भी एक रिवज़िट कर रहा हो वो अपनी स्ट्रेटेजी को तो ऐसी स्थिति में अगर अमेरिका उनके ऊपर में जोर दे और अमेरिका भी उनके ऊपर में ये चीज वाज़ करे। आप श्रेष्ठ पुलिस अधिकारियों में से रहे हैं।

डोबाल साहब आपने अपराधियों की मानसिकता को बेहतर तरीके से समझा है। अगर आज की तारीख में आपसे यह सवाल किया जाए या बताने को कहा जाए तो क्या आशंका जाहिर करेंगे? दाऊद इब्राहिम कहां हो सकता है? देखिए इस समय मेरे ख्याल से उसकी स्थिति पाकिस्तान में ही है।

और क्योंकि पाकिस्तान के बाहर इस वक्त जाना उसके लिए बहुत सुरक्षित नहीं है। इसलिए पिछले कुछ दिनों से शायद वो अपने आप को पाकिस्तान में ही। लेकिन उन जगहों पर नहीं जहां पर वो आमतौर पर रहता था। लेकिन उसके बाहर शायद किसी स्थान पर अपने आप को उसने एस्टैब्लिश किया हुआ है।

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