क्या हुआ जब रहमान दाऊद से लड़ने पर आ गया?

पाकिस्तान के शहर कराची में एक ऐसी जमीन मौजूद थी जिसका दाम पैसों में नहीं बल्कि पावर में लगाया जाता है। 1200 करोड़ की वह प्राइम प्रॉपर्टी जिसे देखकर दाऊद इब्राहिम का दिल भी लालच से भर गया था। प्रॉपर्टी का असल मालिक एक पाकिस्तानी बिजनेसमैन था। लेकिन एक दिन उसकी जिंदगी में वह तूफान आया जब दाऊद के लोगों ने उसको दी। जमीन छोड़ दो वरना जान से हाथ धो बैठोगे। और फिर जैसा हमेशा होता है।

पुलिस ने ना केस दर्ज किया ना सरकार ने कोई सुनवाई की। थक हारकर वह आदमी पहुंचा पाकिस्तान के एक नामवर रहमान डकैत के पास। रहमान जो नेचर से साइकोोटाइप अनप्रिडिक्टेबल बंदा था। भलाई या बुराई से उसे कोई मतलब नहीं था। उसने आओ देखा ना ताव। सीधा दुनिया के सबसे पावरफुल इब्राहिम को फोन लगा दिया। और उस फोन कॉल के बाद शुरू हुई वह जिसने पहली बार को भी महसूस कराया कि हां कोई उससे भी ज्यादा साइको और हो सकता है। आखिर क्या हुआ था रहमान और के बीच?

क्या दाऊद से वह 1200 करोड़ की प्रॉपर्टी वापस ले पाया था? कौन था यह रहमान डकैत जिसका नाम धुरंधर मूवी में छाया हुआ है। जिस कैरेक्टर को अक्षय खन्ना ने अदा किया है और भारत में इसे खूब पसंद किया जा रहा है। यह सारी जानकारी विस्तार से आपको बताएंगे। हेलो दोस्तों, मेरा नाम है फैज और आप देख रहे हैं द करंट वर्ल्ड।

दोस्तों, कराची में एक एरिया है लिया जहां से ना सिर्फ फुटबॉल टैलेंट निकला बल्कि कुछ ऐसे भी पैदा हुए जो सरकार को भी चैलेंज करते थे। उन्हीं में से एक नाम था अब्दुल रहमान बलोच का जिसे दुनिया रहमान के नाम से जानती है। रहमान बचपन से ही जुर्म की दुनिया से जुड़ा हुआ था। उसके पिता भी एक थे।

लेकिन पिता की मौत का बदला लेने के लिए उसने अपने पड़ोसी का किया। अपनी मां तक को भी कत्ल कर दिया क्योंकि उसको लगा था कि दुश्मनों के साथ उसकी मां भी मिली हुई है और यहीं से उसकी जुर्म की दुनिया का सफर का आगाज हुआ था। जब रहमान 20 साल का हुआ तो उसके ऊपर एक्सटॉरशन, और असलाह रखने के दर्जनों मुकदमे दर्ज हो गए।

वक्त के साथ-साथ उसने पॉलिटिकल पावर भी हासिल कर ली और अपना एक अलग एंपायर खड़ा कर लिया। कहते हैं उस वक्त लियारी में दो चीजें मशहूर थी। फुटबॉल और रहमान डकैत का खौफ। रहमान कितना किस्म का व्यक्ति था इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि रहमान किसी को पैसों के लिए नहीं उठाता था।

जब बात उसकी अना पर होती थी वो गुस्से में होता था तो फिर वो क्या करता था खुद उसको भी अंदाजा नहीं होता था। वो बिल्कुल अनप्रिडिक्टेबल था। एक तरफ गरीब लोगों की मदद करता था। कराची में उसकी रोबिन हुड वाली छवि मशहूर थी। दूसरी तरफ बिना सोचे समझे किसी को भी गोली मार देता था। उसके इसी अंदाज की वजह से बॉलीवुड फिल्म धुरंधर में भी उसका रेफरेंस दिया गया है क्योंकि पाकिस्तान में ऑपरेशन के दौरान इंटेलिजेंस एजेंसीज ने रहमान का नाम बहुत ज्यादा सुना था। लेकिन अब सवाल यह है कि आखिर रहमान से क्यों भिड़ गया था?

तो दोस्तों आपको बता दें कराची के क्लिफ्टन एरिया में एक ऐसी लैंड थी जहां से समंदर साफ दिखाई देता था। जहां दुनिया के रिचेस्ट लोग विलास बनाना चाहते थे। वही एक पाकिस्तानी बिजनेसमैन की प्रॉपर्टी थी जिसका दाम 1200 करोड़ के करीब बताया जाता है। दाऊद के करीबी लोगों की नजर इस जमीन पर थी जिनमें नूर मोहम्मद इब्राहिम प्रमुख नाम था। यह दाऊद के लिए ही काम करता था। कहने को यह एक आजाद चलाता था।

लेकिन इसे दाऊद की भी सपोर्ट प्राप्त थी। एक दिन इसी नूर मोहम्मद इब्राहिम का फोन उस बिजनेसमैन को आया। इसने धमकी दी कि जमीन हमारे नाम कर दो नहीं तो जान से हाथ धो बैठूंगी। धमकियां दिन रात बढ़ने लगी। बिजनेसमैन घबराया और एफआईआर दर्ज करने के लिए पुलिस स्टेशंस के चक्कर काटने लगा। इतना ही नहीं उसने पाकिस्तानी लीडर्स से भी कांटेक्ट किए लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिर में उसे समझ आ गया यह खेल कानून का नहीं बल्कि पावर का है। तभी किसी ने उसे मशवरा दिया लियारी जाओ रहमान डकैत के पास। वही बंदा है जो दाऊद से बात कर सकता है। बिजनेसमैन घबराकर रहमान के अड्डे पर जा पहुंचा। रहमान ने पूरा मामला सुना और सीधा को कॉल मिला दी। दुनिया में बहुत से लोग दाऊद से बात करने से भी कतराते हैं। नब दाऊद से कांटेक्ट करना इतना आसान है। लेकिन रहमान डकैत को कोई फर्क नहीं पड़ा। उसने सीधा दाऊद से कांटेक्ट किया और दाऊद से कहा सुनो लिया का रहमान बोल रहा हूं। जो प्रॉपर्टी तुम्हारे आदमी नूर मोहम्मद इब्राहिम ने कब्जा की है उसको वापस छोड़ दो। रहमान की इस फोन कॉल के बाद दाऊद को लगा शायद कोई उससे मजाक कर रहा है। आखिर दाऊद को कौन धमकी दे सकता था। लेकिन दोस्तों दूसरी तरफ कहते हैं रहमान का अंदाज मजाक वाला नहीं था। रहमान ने दोबारा बोला जमीन इस्तेमाल में लाने की हिम्मत मत करना। अगर एक भी ईंट हिली तो कराची का नक्शा बदल दूंगा। काफी देर बहस होती रही। दोनों तरफ गुस्से की चिंगारियां उबलती रही। आखिर में दाऊद की तरफ से फोन कॉल कट कर दिया गया। इसके बाद रहमान का माथा ठनक गया और उसने कराची में मौजूद दाऊद के गुरे नूर मोहम्मद इब्राहिम को उठवा लिया और उसे दर्दनाक दी। सिर्फ इतना ही नहीं उस प्रॉपर्टी से दाऊद का कब्जा छुड़वाने के लिए उसने अपने 200 से ज्यादा लोगों को प्रॉपर्टी साइट पर भेज दिया।

के वो गुर्गे जो पहले से इस प्रॉपर्टी पर कब्जा जमाए बैठे थे वह खुद डर के वहां से हट गए क्योंकि कराची में उनका मुखिया नूर मोहम्मद इब्राहिम पहले ही मारा जा चुका था और अब भी खामोश था। इसलिए पीछे हटने में ही उन्होंने बेहतरी समझी। इसके बाद कहा जाता है कि दाऊद की तरफ से उस पाकिस्तानी बिजनेसमैन को मैसेज भेजा गया था कि हम पीछे हट गए हैं। इस मसले को यही बंद कर दो। जानकार यह बताते हैं कि के पूरे करियर में यह पहली बार हुआ था जब कोई व्यक्ति दाऊद को सीधा चैलेंज कर रहा था और उसने दाऊद को पीछे हटने पर भी मजबूर कर दिया था। कहते हैं रहमान का नाम जितना मशहूर था उतनी ही लंबी उसके दुश्मनों की फहरिस्त भी थी।

उसकी बढ़ती शोहरत की वजह से पाकिस्तान के कई बड़े लीडर्स भी उससे नाराज थे। इसी वजह से पाकिस्तान की पुलिस, एफआईए इंटेलिजेंस ब्यूरो सब उसके पीछे पड़े थे और आखिरकार 2009 में कराची के लियारी एक्सप्रेसवे पर चौधरी असलम नाम के एक पाकिस्तानी पुलिस अधिकारी ने उसका एनकाउंटर कर दिया।

जब चौधरी असलम से पूछा गया, यह वही पुलिस अधिकारी थे, जिन्होंने रहमान डकैत का एनकाउंटर किया था कि आपने रहमान डकैत को क्यों मारा? तो उन्होंने कहा था कि रहमान डकैत पुलिस के काबू में नहीं आ रहा था और लगातार पुलिस पर फायरिंग कर रहा था। जवाबी कार्यवाही में हमने उसको गोली मार दी। जबकि दूसरी तरफ लिया के लोगों का आज तक यह मानना है कि रहमान को पुलिस ने नहीं बल्कि सियासत ने मरवाया था। क्योंकि वह इतना पावरफुल हो चुका था कि कराची की पॉलिटिक्स उसके बगैर चलती ही नहीं थी। लेरी में उसका दबदबा क्या था? इसका अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि उसकी के बाद लगातार तीन दिनों तक लिया की मार्केट वहां की दुकानें बंद रही थी और लोगों ने कहा था चाहे वो एक था लेकिन हमारे लिए वो एक शील्ड था।

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