यह एक्टर कहलाया था पहला सुपरस्टार, मजबूरन करनी पड़ी थी एक्टिंग।

क्या आप सिनेमा के उस सुपरस्टार के बारे में जानते हैं जो एक्टिंग करना ही नहीं चाहते थे? इन्हें तो डायरेक्टर बनना था। और यह सुनिए पिता चाहते थे कि बेटा वकील बने और फैमिली मैन बनकर रहे। लेकिन वकालत और डायरेक्शन दोनों कैसे चुने? किसी की जिद को तो हारना ही था। और वैसे भी जिंदगी की क्रिकेट में ड्रॉ नहीं होता।

होती है तो जीत या हार। और जीत उसी की होती है जो ऊपर होता है और ऊपर वही होता है जो नीचे नहीं है। वे सिनेमा के पर्दे पर नहीं आना चाहते थे बल्कि पर्दे के पीछे रहना चाहते थे। उनका जुनून था फिल्मों की केमिस्ट्री।

कैमरे के पीछे की दुनिया और उनका नाम था कुमुद लाल गांगुली। हम बात कर रहे हैं दादा मुनि अशोक कुमार की। अशोक कुमार फिल्मों में आना नहीं चाहते थे और आए तो अगले 60 सालों तक फिल्मों पर राज किया। हुआ यह था कि अशोक कुमार के पिता का कहना था कि घर में सभी वकील हैं तो उन्हें भी वकील बनना चाहिए। तो अशोक कुमार मान गए। वे लॉ की तैयारी करने लगे। लेकिन कोलकाता में रहते हुए उन्होंने कुछ फिल्में देखी।

उन फिल्मों से इतने इंप्रेस हो गए कि डायरेक्टर बनने का सोचा। अशोक कुमार अपनी लॉ की पढ़ाई बीच में छोड़कर ही बॉम्बे चले गए थे। वहां जाकर वो हिमांशु रॉय से मिले और उनसे कहा कि आप मुझे एक लेटर ऑफ रेकमेंडेशन दे दीजिए ताकि मैं जर्मनी जाकर फिल्म मेकिंग सीख सकूं। लेकिन हिमांशु रॉय ने उन्हें बॉम्बे में ही रोक लिया। उन्होंने कहा कि यहीं रहो और काम सीखो।

अशोक कुमार बॉम्बे में ही रुक गए और टेक्नशियन की तरह काम करने लगे। फिर आया डी डे यानी वो दिन जब अशोक कुमार को उनके जीवन की पहली फिल्म मिली थी। वो भी पूरे संयोग से। हुआ यह था कि अशोक कुमार जिस फिल्म के सेट पर काम कर रहे थे यानी जीवन नया के सेट पर वहां एक्टर आया ही नहीं। तो मजबूरी में हिमांशु रॉय ने अशोक कुमार को हीरो बना दिया। और इस तरह अशोक कुमार का फिल्मी सफर शुरू हुआ था।

अशोक कुमार ने अपने करियर की शुरुआत में ही एक के बाद एक सात सुपरहिट फिल्में दी थी। इन्हीं में से एक फिल्म थी किस्मत जो उनके करियर का कारनामा शुरू हुई थी।

इस फिल्म में वे पहले एंटी हीरो बनकर आए थे। और आपको पता है इस फिल्म ने उस जमाने में 1 करोड़ का बिजनेस किया था और यह उनके खुद के एक्सपेक्टेड कलेक्शन का भी 30 गुना ज्यादा था।

रोमांटिक हीरो से लेकर बुढ़ापे की गंभीर भूमिकाएं और कॉमिक से लेकर एंटी हीरो तक के सभी किरदारों को अशोक कुमार ने अपनी स्वाभाविक अभिनय शैली से अमर कर दिया था। समाधि, बंदिनी, परिणीता, पूरब और पश्चिम मिली और अफसाना जैसे कितने ही नगीने अशोक कुमार के फिल्मी करियर को सजाते हैं।

यूं ही सिनेमा के सुपरस्टार नहीं कहलाए थे अशोक कुमार। यह थी दादा मुनि अशोक कुमार के असिस्टेंट से सुपरस्टार बनने की कहानी। मिलते हैं अगले वीडियो में इसी तरह के नए पुराने किस्सों के

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