तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है मगर यह आंकड़े छूटे हैं यह दावा किताबी यह जो घिस रहा है बीच सड़क पर कागजों के पुलिेक हुआ यह सिस्टम का सताया हुआ एक आम आदमी एक जागरूक नागरिक जो भ्रष्टाचार से इतना हताश हुआ कि सात सालों के संघर्ष और ऑफिस ऑफिस खेलने के बाद उसने सरे बाजार सिस्टम का तमाशा बना दिया.
उस सिस्टम का जिसने मुकेश प्रजापति की जिंदगी दुश्वार कर रखी थी सात सालों से सिस्टम से बेजार हो चुके मुकेश प्रजापति सीधे सीएम मोहन यादव को संबोधित कर क्या कह रहे हैं सुनिए यह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है निमत जिला यह आप ही जानते हो जिला ही जानता है.
राज्य जानता है और मैं आपके माध्यम से मोहन यादव जी को यह बात पहुंचाना चाहता हूं अगर आप में थोड़ी सी भी इंसानियत इतनी सी भी बची है मोहन यादव जी क्योंकि आपके पास गृहमंत्री का पद भी है और मुख्यमंत्री का पद भी है इन सारे भ्रष्टाचारियों को जेल के अंदर डालिए सारे प्रमाण मेरे पास हैं यह है जो इन तुम्हारे अधिकारियों की कुंडलियां हैं जिनमें सारी जाचे हैं और सबकी ऊपर सिले लगे हुए है लोकायुक्त आयोग तक गुमराह हो गया इन जनपद वालों के और जिला पंचायत वालों के जांच आयोग ने भी गलत जांच सौंप दी लोकायुक्त आयोग ने केस नस्ती बद कर दिया गया और अतिक्रमण हुजूरत से ज्यादा उस सरपंच पुष्पा भाई मेघवाल है।

उसके पति गोविंद राम मेघवाल का काकरिया तलाई में हद से ज्यादा करोड़ों रुपए की संपत्ति है और तुम्हारे एक अधिकारी उसके खिलाफ जाने को तैयार नहीं है क्यों नहीं है क्योंकि ये सारे के सारे भ्रष्टाचारी हैं एक कु जट किसके साठगा से काम ये गुरु प्रसाद जी की साठ घठ से हुआ है गुरु प्रसाद पूर्व जिला जनपद सीओ करोड़ों रुपए कमा के लेके गया है.
लगाइए जिला पंचायत सीओ गुरु प्रसाद कागज का पुलिंदा लेके आए ये क्या है ये सारे जांच आवेदन है इनमें जाचे हो चुकी है मौके पे कोई कार्य है ही नहीं लोकायुक्त को भेज दिया गया सारा निर्माण पाया गया सोवन को मोहन दिखा रहे हैं ये लोग आप देख लीजिए इनका हिसाब मैं परेशान हो गया हूं सा से परेशान सात साल सात साल आप सभी जानते हैं.

सा साल में कितनी शिकायत मैं ये सारी शिकायतें तो है ना यार गिन गिन के परेशान हो जाएंगे अपन ये सारी शिकायतें तो है ना जब सिस्टम का तमाशा मुकेश ने बना दिया तो अधिकारी पानी पानी हो गए तमाम लोग इकट्ठा हो गए मीडिया के कैमरे में सब कैद हो गया फिर कलेक्टर साहब ने ना सिर्फ मुकेश प्रजापति की शिकायतें सुनी बल्कि उनके समाधान का भी आश्वासन दिया लेकिन सवाल वही है कि एक आम आदमी को न्याय पाने के लिए इस कदर सड़क पर तमाशा क्यों बनना पड़ रहा है ब
