गुजरात के अहमदाबाद में प्लेन हादसे की जो तस्वीरें मौकाए वारदात से आ रही है वो बेहद डरावनी है। आप देख सकते हैं कि पूरा का पूरा प्लेन मलबे में तब्दील हो चुका है और इन तस्वीरों को देखने के बाद कोई नहीं कह सकता कि इसमें जो भी सवार होगा उसमें से कोई भी जीवित बच पाया होगा। यह प्लेन मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल बिल्डिंग पर क्रैश हुआ है। इससे यह भी आशंका जताई जा रही है कि इस हॉस्टल में रहने वाले कई लोग भी हताहत हुए होंगे।
आपको बता दें कि एयर इंडिया के इस विमान में गुजरात के अहमदाबाद के इंटरनेशनल एयरपोर्ट से लंदन के लिए उड़ान भरी थी। लेकिन उड़ान भरने के तुरंत बाद ही एयर इंडिया का यह ड्रीम लाइनर विमान क्रैश हो गया। इस विमान में 230 पैसेंजर, दो पायलट और क्रू के 10 मेंबर यानी कि कुल 242 पैसेंजर सवार थे। लेकिन इस प्लेन के क्रैश होने से ठीक पहले प्लेन के पायलट सुमित सबरवाल ने मेडे कॉल किया था।
विमानन की दुनिया में पायलट यह संकेत आखिरी वक्त में देता है। इसका मतलब होता है कि मेरी मदद करो। जब पायलट को यह लग जाता है कि अब हालात उसके हाथ में नहीं है। काबू से बाहर हो चुके हैं। तब वह मेड संकेत जारी करता है। बोइंग 787 को उड़ा रहे पायलट को बहुत अनुभवी बताया जा रहा है। उनके पास 82,000 घंटे उड़ान का अनुभव था। जानकार यह भी बता रहे हैं कि दरअसल विमान में कोई गड़बड़ी बहुत शुरुआत में ही पता चल गई थी। हालांकि इस संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि स्थितियों को जज करने में पायलट या एटीसी से कोई गड़बड़ ना हुई हो। पायलट कैप्टन सुनील सबरवाल ने बेड़े का संकेत तो दे दिया लेकिन गड़बड़ी को सुधारने या ठीक करने का उनके पास वक्त ही नहीं था।
विमान कुछ ही क्षणों में नीचे गिरने लगा और देखते ही देखते आग के गोले और गाढ़े काले धुएं में तब्दील हो गया था। जानकार बता रहे हैं कि इस तरह की कोई गड़बड़ बहुत ऊंचाई पर होती है तो पायलट को सोचकर कुछ करने का वक्त भी मिलता है। लेकिन जाहिर है कि पायलट ने उड़ते ही मेडे का संकेत दिया।
यानी उसी समय उसे लग गया था कि हालात उसके कंट्रोल में नहीं है। मेडे शब्द फ्रेंच के मैडर यानी कि मेरी मदद करो शब्द से लिया गया है। 1927 में वाशिंगटन के इंटरनेशनल रेडियो टेलीग्राफ कन्वेंशन में इसे आधिकारिक आपातकालीन कॉल बनाया गया। पायलट इसे तीन बार दोहराते हैं।
मेडे मे डे ताकि एटीसी इसे तुरंत समझ ले और बाकी रेडियो संदेशों के बीच यह साफ सुनाई दे। यह कॉल इंजन फेल आग दबाव में कमी या किसी ऐसी स्थिति में दी जाती है जहां तुरंत मदद की जरूरत होती है। जानकारी यह भी मिल रही है कि अहमदाबाद हादसे में पायलट ने टेक ऑफ के 2 मिनट बाद ही मेडिकॉल दिया था। उस वक्त विमान सिर्फ 625 फीट की ऊंचाई पर था। इससे साफ है कि पायलट को तुरंत किसी गंभीर समस्या का एहसास हो गया था। यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि विमान का पिछला हिस्सा किसी पेड़ या दीवार से टकराया हो। साथ ही इंजन में तकनीकी खराबी की भी अटकलें लगाई जा रही है। लेकिन यहां यह भी जिक्र करना जरूरी है कि विमान की दो बार दिल्ली और अहमदाबाद में जांच की जा चुकी थी। वे टेक ऑफ के तुरंत बाद इमरजेंसी कॉल कर एयर ट्रैफिक कंट्रोल यानी कि एटीसी को कुछ बताना चाह रहे थे। हालांकि जब तक ATC की ओर से जवाबी कॉल किया गया पायलट उसे रिसीव ही नहीं कर पाए।
इसके तुरंत बाद प्लेन क्रैश हो गया। इस हादसे पर एयर इंडिया का बयान भी आया है। Air इंडिया ने कहा कि प्लेन क्रैश होने के बाद फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंची है। राहत और बचाव का काम किया जा रहा है। हालांकि इस हादसे में कितने जान माल का नुकसान हुआ है। इस बारे में अभी तक00:03:28 कोई आधिकारिक जानकारी नहीं आ पाई है। Air इंडिया ने सोशल मीडिया हैंडल एक्ट्स पर कहा है कि फ्लाइट AI171 अहमदाबाद से लंदन गेटविक जा रही थी। 12 जून को दुर्घटना का शिकार हुई है। अभी हम विवरण की जांच कर रहे हैं और इस मामले में अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स और एयर इंडिया के वेबसाइट पर ज्यादा जानकारी साझा करेंगे। आपको बता दें कि बोइंग कंपनी के मेहमान पहले भी कई दुर्घटनाओं में शामिल रहे हैं। सबसे हालिया दुर्घटना दक्षिण कोरिया के जेजू एयर की उड़ान है जो दिसंबर 2024 के आखिरी में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। आंकड़ों के मुताबिक विमान लैंडिंग का प्रयास करते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और इसमें 189 लोगों की जान चली गई थी।
यह विमान भी बोइंग 737800 था और अहमदाबाद में जो विमान क्रैश हुआ है वो भी बोइंग 7878 ड्रीम लाइनर प्लेन था। इस खबर के बाद अब बोइंग के शेयर प्रीम मार्केट ट्रेडिंग में 6% तक से अधिक तक फिसल गए हैं। दोपहर 3:30 बजे तक बोइंग के शेयर प्रीम मार्केट में 6.42% की गिरावट के साथ 196.51 पर थे।
